रेत का खेल / जब्ती, प्रतिवेदन और अनुमति के बीच उलझा मशीनों से रेत के खनन का मामला

Case of sand mining by machines entangled between seizure, reporting and permission
X
Case of sand mining by machines entangled between seizure, reporting and permission

  • 16 जून को जब्त मशीन को लेकर जारी नहीं हुए नोटिस
  • 29 को जब्त दो पोकलेन को लेकर खनिज अधिकारी ने अलापा संदेह का राग

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

सिवनी. रेत के खेल में अंपायर की भूमिका निभाने वाले खनिज महकमे के दो अलग-अलग रूप सामने आए हैं। पहला मामला 16 जून को जिले की 11 रेत खदानों के समूह का 19 करोड़ रुपए में ठेका लेने वाली जय महाकाल एसोसिएट की बागडोंगरी खदान का है। खनिज महकमा यहां मशीनों से रेत के उत्खनन में लगी पोकलेन मशीन जब्त करता है। इस कार्रवाई पर से पर्दा उठता है २२ जून को, जबकि इसकी भनक मीडिया को लगती है। 6 दिन पुरानी इस कार्रवाई को बमुश्किल स्वीकारने वाली खनिज अधिकारी 15 दिन बाद भी ठेका कंपनी को नोटिस जारी नहीं कर पाईं। दूसरा मामला 29 जून का है जबकि कलेक्टर को कलेक्टर को ग्राम इमलीटोला खुरसुरा स्थित पुल के नीचे व बागडोंगरी खदान में दायरे से बाहर जाकर रेत का खनन किए जाने की शिकायत मिली। कलेक्टर के निर्देश पर केवलारी एसडीएम  के नेतृत्व में निकली टीम ने खदान के पास से दो पोकलेन मशीनें जब्त कीं।
अनुमति व जब्ती के मसले पर उलझा महकमा

मामला सामने आने पर जब खनिज अधिकारी आशालता वैद्य से मशीनों से खनन के बावद सवाल किया तो उनका जवाब आया कि ठेका कंपनी को इसकी अनुमति है। अनुमति है, फिर मशीनों की जब्ती क्यों हुई? इस सवाल पर वे बोलीं कि अवैध उत्खनन का मामला है। साथ ही यह भी कहा कि जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां खनन तो नहीं हो रहा था लेकिन बागडोंगरी व खुरसुरा में पोकलेन मशीनें जरूर खड़ी थीं, उन्हें संदेह के आधार पर जब्त किया गया है। सिया (स्टेट एनवायरमेंट इम्पेक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी) द्वारा जय महाकाल एसोसिएट को जो पर्यावरणीय मंजूरी संबंधी पत्र दिया गया है उसमें मशीनों से उपयोग का उल्लेख न होने के सवाल पर खनिज अधिकारी ने पहले तो यह जवाब दिया कि मशीनों का उपयोग नहीं होगा, ऐसा भी पत्र में नहीं लिखा है। थोड़ी देर बाद वे बोलीं कि माइनिंग प्लान में इसका उल्लेख है और उसी के अनुसार मशीनों का उपयोग हो रहा है। 
प्रतिवेदन तक नहीं पहुंची बात

बागडोंगरी व खुरसुरा में पोकलेन जब्ती का मामला नया है। फिर इसमें भी कार्रवाई के दूसरे दिन यानी 30 जून को विभाग ने संदेह  के आधार पर की गई कार्रवाई बताया। यही नहीं फौरन नोटिस भी जारी कर दिए गए। लेकिन 16 जून को बागडोंगरी में खनन करते जब्त हुई पोकलेन का मामला हुए 15 दिन हो चुके हैं। इसके प्रतिवेदन की बात भी तब हो जबकि ठेका कंपनी को नोटिस जारी हुआ हो। खनिज महकमा अभी यह तक पता नहीं लगा सका कि पोकलेन मशीन किसकी है और मशीन की सुरक्षा का ये आलम की वह थाने के बजाए सचिव व रोजगार सहायक की अभिरक्षा में देते हुए बागडोंगरी की  एक राइस मिल में खड़ी करा दी गई। इसी तरह से 29 जून को संदेह के आधार पर जब्त दोनों पोकलेन भी थाना ले जाने के बजाए दो अन्य जनों की अभिरक्षा में दे दी गई।

वायरल तस्वीरें कुछ और कहानी कह रहीं 

सोमवार को केवलारी तहसील क्षेत्र की बागडोंगरी खदान की कुछ तस्वीरें व वीडियो वायरल हुए। इन फोटो व वीडियो में उस पोकलेन मशीन द्वारा भी धनई नदी से रेत निकाली जाती नजर आ रही है, जिसको खनिज विभाग ने 16 जून को जब्त किया था। रोजगार सहायक व सचिव इसे लेकर सकते में हैं। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि दिन में तो यह मशीन राइस मिल में ही खड़ी रहती है, लेकिन शाम ढलते ही अंधेरे में इसे खदान क्षेत्र में ले जाकर रात भर रेत निकाली जाती है। खनिज अधिकारी आशालता वैद्य इसेे जांच का विषय बताते हुए कहती हैं कि यदि जब्त की गई मशीन का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना