न्यायविदों का मंथन:सीजेआई बोले- न्यायाधीशों को पहले प्रशिक्षण से तराशें, फिर नियुक्ति मिले

जबलपुर9 महीने पहले
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (फाइल फोटो)
  • जबलपुर में ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट का राष्ट्रपति ने किया उद्घाटन
  • सीएम ने कहा- सायबर क्राइम से निपटने के लिए दक्ष न्यायाधीशों की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि कुछ प्रदेशों में पहले न्यायाधीश नियुक्त किए जाते हैं, फिर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। कुछ प्रदेशों में पहले प्रशिक्षण दिया जाता है, फिर न्यायाधीश को नियुक्त किया जाता है। मेरा मानना है कि न्यायाधीशों को पहले प्रशिक्षण के जरिए तराशना चाहिए, फिर उन्हें न्यायाधीश के रूप में काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। वे ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट के उदघाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया।

सीजेआई ने सुनाया रोचक किस्सा-

सीजेआई ने कहा कि हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने एक जस्टिस से रोचक अनुरोध किया कि मैं जज की कुर्सी पर बैठूंगा। आप वकील की तरह बहस करिए। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ऐसी जिज्ञासा आपको नहीं होगी, क्योंकि एक वकील होते के नाते आप पूरी व्यवस्था को जानते है। मध्यप्रदेश के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक ने स्वागत भाषण के दौरान ऋग्वेद के श्लोक का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार हमारे पास आएं, हमारा ऐसा प्रयास है।

कार्यक्रम में किसने-क्या कहा

आनंदीबेन पटेल, राज्यपाल-

कोरोना काल में न्यायालयों का काम बाधित नहीं हुआ। शीघ्र न्याय के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग होना चाहिए।

आज सायबर क्राइम नई चुनौती बनकर उभर रहा है। आज भी महिलाएं अपने खिलाफ हुए अपराध के बारे में शिकायत नहीं करती हैं।

गुजरात की महिला विकास मंत्री के रूप में मैंने नारी अदालत की शुरूआत की थी, इससे महिलाओं को न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ था।

शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री-

  • कोरोना काल में प्रदेश में तीन लाख मुकदमे बढ़े हैं, लेकिन शीघ्र, सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है।
  • न्यायपालिका पर आम आदमी को विश्वास है। हाल ही में नीरव मोदी के मामले में लंदन की अदालत ने भी कह दिया है कि उसे भारत में न्याय मिलेगा।
  • साइबर क्राइम से निपटने के लिए दक्ष न्यायाधीशों के मानव संसाधन की भी जरूरत है। ऑल इंडिया ज्यूडिशियल एकेडमीज डायरेक्टर्स रिट्रीट में निकलने वाले निष्कर्षों को पूरा करने में मप्र सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

छह प्रदेशों के मुख्य न्यायाधीश हुए शामिल

कार्यक्रम में छह प्रदेशों के मुख्य न्यायाधीश शामिल हुए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रविशंकर झा, कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अभय श्रीनिवासन ओका, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, बाम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता, मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विश्वनाथ सोमद्दर और जम्मू एंड कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश पंकज मिथल ने कार्यक्रम में शिरकत की।

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