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जबलपुर जिला कोर्ट में मानहानि का केस फाइल:OBC मामले में सीएम, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और मंत्री भूपेंद्र सिंह पर गलत बयानबाजी का आरोप, 10 करोड़ का मानहानि

जबलपुरएक वर्ष पहले

ओबीसी प्रकरण में कांग्रेस नेता एवं राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा पर गलत बयानबाजी मामले में मंगलवार को जबलपुर जिला कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया गया। सांसद तन्खा की ओर से उनके अधिवक्ता शशांक शेखर ने केस फाइल किया। मामले में अगले सप्ताह सुनवाई होगी। सीएम शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और मंत्री भूपेंद्र सिंह पर 10 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा किया है।

जबलपुर जिला कोर्ट में क्रिमिनल केस फाइल करते हुए पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने बताया कि मेरे पक्षकार पर ओबीसी मामले में गलत बयानी की गई। पूर्व में नोटिस जारी कर तीन दिवस में माफी मांगने को कहा गया था। पर उनके द्वारा माफी नहीं मांगी गई। गलत बयानी में वो बातें कही गई, जो मेरे पक्षकार ने न तो याचिका में लगाई थी और न ही कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान ही ऐसा कुछ बोला था।

वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर जिला कोर्ट में केस दायर करने जाते हुए।
वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर जिला कोर्ट में केस दायर करने जाते हुए।

सीएम सहित तीन के खिलाफ केस फाइल

राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने जबलपुर जिला कोर्ट में सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ क्रिमिनल केस फाइल किया है। अगले सप्ताह मामले में सुनवाई होगी। इसी के साथ वे परिवाद दायर कर सामाजिक छवि को धक्का पहुंचाने के एवज में 10 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा है। इसके लिए जरूरी डेढ़ लाख रुपए का चेक जमा करा दिया है।

राज्य सभा सांसद पहले ही रख चुके हैं अपना पक्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा का दावा है कि सीएम ने मुझ पर मिथ्या आरोप लगाते हुए मेरे साथ या कांग्रेस और जनता के साथ ही छल नहीं किया है। इन्होंने कोर्ट-कचहरी के साथ भी छल किया है। सर हमारा कटा है, या उनका कटा है। यह जनता तय करेगी। हम जनता की अदालत में भी हैं और कोर्ट में भी है। अब दोनों डिबेट साथ-साथ चलेगी।

सरकार नहीं चाहती ओबीसी को आरक्षण मिले

तन्खा ने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती है कि ओबीसी को आरक्षण मिले। कांग्रेस ने 1994 में ही पंचायत और निकाय चुनावों में ओबीसी को 25 प्रतिशत आरक्षण दिया था। इसी फरवरी में हाईकोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। पर सरकार की ओर से इस स्टे काे हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट में हम रोटेशन और परिसीमन के मामले को लेकर गए थे। सुनवाई के दौरान मेरी बात समाप्त हो चुकी थी। सरकार के वकीलों को अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए था, जो वो नहीं कर पाए।

राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा अपना रख चुके हैं पक्ष।
राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा अपना रख चुके हैं पक्ष।

ये है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमपी में ओबीसी सीटों के निर्वाचन पर रोक लगाए जाने के बाद सीएम शिवराज सिंह, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसके लिए विवेक तन्खा काे जिम्मेदार ठहराया था। दावा किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका के चलते ऐसा आदेश हुआ।

माफी मांगने का टाइम खत्म:विवेक तन्खा ने CM, प्रदेशाध्यक्ष और मंत्री भूपेंद्र सिंह को 10 करोड़ मानहानि का भेजा नोटिस; डेढ़ लाख जमा कराया

इसे मिथ्या और आधारहीन बताते हुए विवेक तन्खा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने 19 दिसंबर को 10 करोड़ रुपए मानहानि का दावा करते हुए सीएम सहित तीनों नेताओं को नोटिस भेजा था। नोटिस में तीन दिन में माफी मांगने की बात लिखी थी। क्रिमिनल केस में कहा गया है कि इस आरोप से तन्खा की सामाजिक छवि धूमिल हुई है।

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