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जबलपुर में डेंगू से महिला कॉन्स्टेबल की मौत:बेटा-बेटी भी अस्पताल में भर्ती, अब तक 399 लोगों की एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि; 35 मरीज चिकुनगुनिया के भी मिले

जबलपुर10 दिन पहले
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पति के निधन के बाद ऊषा तिवारी को पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। - Dainik Bhaskar
पति के निधन के बाद ऊषा तिवारी को पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।

जबलपुर में डेंगू बेकाबू हो गया है। रविवार को डेंगू से पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ कॉन्स्टेबल ऊषा तिवारी (55) की मौत हो गई। वह निजी अस्पताल में भर्ती थीं। बेटा व बेटी भी डेंगू की चपेट में हैं। जिले में अब तक सरकारी रिकॉर्ड में 399 में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 35 मरीज चिकुनगुनिया के भी मिले हैं।

RI सौरव तिवारी के मुताबिक, पति के निधन के बाद ऊषा तिवारी को पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। निकट के लोगों ने बताया कि पहले उनका बेटा लकी तिवारी बीमार हुआ। उसकी रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आई। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब वह ठीक हो चुका है। इसके बाद ऊषा तिवारी खुद और बेटी स्नेहल तिवारी डेंगू की चपेट में आ गईं। दोनों अस्पताल में भर्ती थीं। ऊषा तिवारी की रविवार को मौत हो गई। वहीं, बेटी की हालत अब ठीक बताई जा रही है।

विक्टोरिया में डेंगू के मरीजों से वार्ड फुल।
विक्टोरिया में डेंगू के मरीजों से वार्ड फुल।

बेड नहीं मिला तो आईसीयू में हुआ भर्ती
डेंगू की चपेट में आए एक कॉन्स्टेबल को परिजन कई अस्पतालों के चक्कर लगा डाले। विक्टोरिया पहुंचे तो वहां फर्श पर मरीजों को देखकर उनके परिजनों की हिम्मत जवाब दे गई। इसके बाद वे एक बड़े निजी अस्पताल गए। वहां भी बेड नहीं मिला। फिर इस शर्त पर भर्ती किए गए कि जब तक बेड खाली नहीं होता, उन्हें ICU में रहना होगा। रांझी थाने सहित रांझी पुलिस आवास, छठवीं बटालियन में 100 से अधिक लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। जबलपुर पुलिस के 80 के लगभग जवान डेंगू से पीड़ित हो चुके हैं।

बेड कम पड़ गए तो फर्श पर बिछा दिया गद्दा।
बेड कम पड़ गए तो फर्श पर बिछा दिया गद्दा।

रांझी बना रेड जोन, अस्पतालों में बेड नहीं
रांझी जल भराव वाल क्षेत्र है। फैक्ट्री होने की वजह से खाली जमीन और वहां जल भराव के चलते मच्छर तेजी से पनप रहे हैं। नगर निगम के स्तर से फाॅगिंग और मच्छर विनिष्टीकरण के लिए दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया। महीने भर पहले रांझी से शुरू हुआ डेंगू अब पूरे शहर में पांव पसार चुका है। यही नहीं, अब चिकुनगुनिया भी फैलने लगा है। हेल्थ विभाग अब तक 2 लाख घरों से लार्वा का सर्वे कर चुका है। इसमें 2705 घरों में डेंगू के लार्वा मिल चुके हैं। वहीं, 399 में डेंगू पॉजिटिव होने की पुष्टि एलायजा टेस्ट से हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या 5 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहा।

हर दो बेड के बीच में एक गद्दा डालकर मरीजों का कर रहे इलाज।
हर दो बेड के बीच में एक गद्दा डालकर मरीजों का कर रहे इलाज।

हर तरह के बुखार में प्लेटलेट्स गिरता ही है: डॉ. चौधरी
विक्टोरिया अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके चौधरी के मुताबिक, किसी भी तरह का बुखार प्लेटलेट्स की कमी का कारण बन सकता है, इसलिए जब तक प्लेटलेट्स की बहुत कमी न आ जाए, मरीजों को डरने की जरूरत नहीं। 10 हजार से नीचे आने पर ही प्लेटलेट्स चढ़ाना पड़ता है। डेंगू के मरीज पानी खूब पीएं। वहीं दिन के मच्छरों के काटने से बचें।

हेल्थ विभाग के सर्वे में इस तरह बुखार पीड़ित मिले

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