पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Jabalpur
  • Depression In The First Wave, Fear Of Death In The Second, People Telling Different Types Of Mental Pain In The Call Center

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

दूसरी लहर में पहले से ज्यादा भयभीत:पहली लहर में डिप्रेशन दूसरी में मौत का भय, काॅल सेंटर में अलग-अलग किस्म की मानसिक पीड़ा बता रहे लोग

जबलपुर8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • कोरोना से करीबी, परिचितों की मृत्यु के बाद खुद की सेहत को लेकर सवाल कर रहे

कोरोना की पहली लहर का वायरस ज्यादा जानें नहीं ले सका हालात कुछ ठीक थे लेकिन दूसरी लहर ने जो हाहाकार मचाया है उसका असर लोगों की मानसिक दशा में भी पड़ रहा है। आसपास रहने वाले लोगों में से कोरोना की गिरफ्त में आने के बाद दुनिया से चला जाना, परिचितों की अचानक मौत से घर में रहकर असुरक्षा, अनहोनी यहाँ तक कि असमय मौत का भय सता रहा है। लोकल कमांड काॅल सेंटर से लेकर स्टेट लेबल तक अलग-अलग तरह से मानसिक पीड़ा के बाद लोग सवाल पूछ रहे हैं।

लॉकडाउन में घर में बैठे रहने के दौरान फोन लगाकर पूछा जाता है कि कहीं मुझे भी यह वायरस चपेट में तो नहीं ले लेगा। यदि हो गया तो मेरे परिजनों का क्या होगा, मैं घर में बैठकर क्या करूँ कि इसकी गिरफ्त में न आ सकूँ। पलंग मिलेगा कि नहीं, बेड खाली न हुआ तो क्या होगा और नहीं मिलेगा तो कहीं मेरी मौत न हो जाए।

कई तरह के सवाल हैं जिनका उत्तर मानसिक चिकित्सक राज्य स्तर पर दे रहे हैं। मानसिक चिकित्सक डॉ. रत्नेश कुरारिया कहते हैं कि मैं खुद इस वायरस से अभी जूझ रहा हूँ समझ सकता हूँ कि किस तरह यह लहर लोगों को मानसिक पीड़ा भी पहुँचा रही है। इससे लेकिन घबराना नहीं है, जो चिकित्सक सलाह दें उसका पालन करना जरूरी है।

बेवजह नकारात्मक सोच के साथ पैनिक बना लेने से परिवारजन परेशान हो सकते हैं। ऐसे लोग जो पहले ही डिप्रेशन से ग्रसित हैं या कुछ मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं उनके परिजनों को उनका और भी ज्यादा ख्याल रखना हाेगा। यह सेहत को लेकर एकदम धैर्य का वक्त है।

नकारात्मकता डिप्रेशन में बदलती है

मानसिक चिकित्सक कहते हैं कि ज्यादा दिनों तक दिमाग में बैठी नकारात्मकता बाद में डिप्रेशन जैसी बीमारी को जन्म दे सकती है। अच्छे खासे आदमी को यह शुरूआत में समझ में नहीं आती है इसका इलाज किया जाना जरूरी हो जाता है। अशंका, भय, खौफ, असुरक्षा, उदासी, मन विचलित रहना सब ये लक्षण हैं जिनकाे पहचानना जरूरी है।

इस तरह की परेशानी बता रहे

  • पड़ोसी की मौत के बाद से मुझे नींद नहीं आती।
  • मेरी मौत हो गई तो मेरे बच्चों का क्या होगा।
  • मेरे चाचा स्वस्थ थे फिर भी जान नहीं बची डर लग रहा।
  • रात को नींद नहीं आती, सुबह जल्द नींद खुल जाती है।
  • कोई बीमारी नहीं है कुछ दिनों से डर से भूख लगना बंद हो गई।
  • नकारात्मकता और अनहोनी का भय, असुरक्षा महसूस करता हूूँ।

डरने की बजाए यह करें

  • डर, खौफ, घबराहट में चिकित्सक की सलाह लें।
  • जा नहीं सकते तो टेलीमेडिसिन से परामर्श जरूरी।
  • अवसाद और बीमारी में अंतर चिकित्सक बतायेंगे।
  • योग, व्यायाम, सकारात्मक सोच को विकसित करें।
  • बीमार होने पर बताये नियम का पालन करें।
  • किसी के बीमार होने पर खुद सजग बनें, डरें नहीं।
  • हमेशा गैर जरूरी सूचनाओं से बचें।
खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव - आज की स्थिति कुछ अनुकूल रहेगी। संतान से संबंधित कोई शुभ सूचना मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। धार्मिक गतिविधियों में समय व्यतीत करने से मानसिक शांति भी बनी रहेगी। नेगेटिव- धन संबंधी किसी भी प्रक...

    और पढ़ें