कोराेना काल के सक्सेस स्टार्टअप की कहानी:जबलपुर के इंजीनियर ने बड़े पैकेज की जॉब छोड़ बनाई कंपनी, 2500 कस्टमर्स को घर बैठे 'ताजा' सब्जियाें की डिलिवरी

जबलपुरएक वर्ष पहलेलेखक: संतोष सिंह

कोरोना ने कई युवाओं को नए सपने बुनने का अवसर दिया। ऐसे ही कहानी है जबलपुर के एक युवक की। बायजूस में पढ़ाने का अच्छा-खास पैकेज छोड़कर ‘ताजा” नाम से खुद का स्टार्टअप शुरू किया। खेती-बाड़ी से जुड़कर कैसे बेरोजगार युवक कमाई के अवसर निकाल सकते हैं? आइए जानते हैं भास्कर खेती किसानी सीरीज-26 में एक्सपर्ट रौनक जैन (‘ताजा” कंपनी के हेड) से…

कंप्यूटर साइंस से पढ़ाई हुई है। पुणे में बायजूस से जुड़कर बच्चों को कम्प्यूटर साइंस पढ़ाता था। अच्छा पैकेज था। 2020 में कोरोना महामारी ने सोच बदल दी। तीन महीने के लंबे लॉकडाउन के बाद जुलाई में घर पहुंचा। खुद का बिजनेस शुरू करना चाहता था। कोरोना ने महसूस कराया कि लोगों में ताजा सब्जी की बड़ी डिमांड है। बस यहीं से आइडिया आया और ‘ताजा' नाम से स्टार्टअप शुरू कर दिया।

पॉश कालोनियों में लोगों को रहता है 'ताजा" के वाहन का इंतजार।
पॉश कालोनियों में लोगों को रहता है 'ताजा" के वाहन का इंतजार।

‘ताज' नाम से ऐप भी बनाया

इसी नाम से एक एप्लीकेशन ऐप तैयार किया। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के जवाहर राबी से जुड़कर अपने इनोवेशन को मुकाम पर पहुंचाया। इसके लिए मुझे 18 लाख रुपए का फंड भी मिला। इसके बाद स्मार्ट सिटी के इन्क्यूबेशन सेंटर में मैनेजर अग्रांशु द्विवेदी और स्टार्टअप कंसल्टेंट श्वेता नामदेव की मदद से बिजनेस को आगे बढ़ाने और मार्केटिंग का गुर सीखा। ‘ताजा' ऐप को गूगल ऐप से कोई भी शहरवासी डाउनलोड कर सकता है। इस ऐप पर ऑर्डर मिलने पर ताजा सब्जी लोगों के घरों तक पहुंचाने का काम होता है।

ताजा सब्जी, फल-फ्रूट आदि सामान उपलब्ध कराते हैं।
ताजा सब्जी, फल-फ्रूट आदि सामान उपलब्ध कराते हैं।

पॉश कॉलोनियों में ताजा की जाती है गाड़ी

जवाहर राबी योजना से मिले फंड से लोडिंग वाहन को आरटीओ की अनुमति से डिजाइन कर चलते-फिरते सब्जी की दुकान में तब्दील करवाया है। पॉश कॉलोनियों में ये गाड़ी सुबह-शाम एक तय समय पर जाती है। वहां सीधे लोग इससे ताजा सब्जी ले सकते हैं। मोबाइल एप्लीकेशन पर मिले ऑर्डर के मुताबिक भी पैकेट तैयार कर घर पहुंचा दिया जाता है।

किसानों से सीधे नीबू, अमरूद खरीद कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।
किसानों से सीधे नीबू, अमरूद खरीद कर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।

35 किसानों से कांट्रैक्टर फार्मिंग

‘ताजा” स्टार्टअप में किसानों और ग्राहकों के बीच के दलालों को समाप्त करने का प्रयास किया गया है। इसका दोहरा फायदा है। किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत मिल जाती है और लोगों को भी खेत से ताजा सब्जी बाजार से सस्ते कीमत पर मिल जाती है। अब तक 35 किसानों से कांट्रैक्ट फार्मिंग का अनुबंध किया गया है। ये किसान तय सब्जी उगाते हैं। किसानों से न्यूनतम कीमत का अनुबंध पहले ही कर लिया जाता है। किसान टमाटर, पीला और लाल शिमला मिर्च, सलाद पत्ती, गोभी, धनिया पत्ती सहित कई तरह की सब्जियां उगवा रहे हैं।

रौनक जैन अपनी टीम के साथ।
रौनक जैन अपनी टीम के साथ।

2500 कस्टमर जोड़ चुके हैं

‘ताजा” एप्लीकेशन से ढाई हजार कस्टमर जुड़ चुके हैं। यादव कॉलोनी में ही उनका स्टोर है। यहां चार से पांच महिलाएं सब्जियों की ग्रेडिंग, सफाई और आधा व एक किलो की पैकिंग करती है। जल्द ही वे हाइड्रोपोनिक व ऑर्गेनिक फार्मिंग का भी कांट्रैक्ट करने जा रहे हैं। इसके लिए किसानों को जरूरी ट्रेनिंग, बीज, खाद वे स्वयं उपलब्ध कराएंगे। उनका कोल्ड स्टोरेज सोलर पैनल से संचालित होता है।

जवाहर राबी के साकार योजना से 18 लाख का मिला था फंड।
जवाहर राबी के साकार योजना से 18 लाख का मिला था फंड।

आगे महिलाओं को स्वरोजगार देने का प्लान

‘ताजा” स्टार्टअप के साथ वे ऐसी घरेलू महिलाओं को भी जोड़ने जा रहे हैं, जो घर में मसाले, अचार, पापड़ और अन्य उत्पाद तैयार करती हैं। बस वे मार्केंटिंग नहीं जानती। ऐसी महिलाओं को अपने ‘ताजा” ब्रांड से जोड़कर उनके उत्पाद को भी वे बेचने की तैयारी में जुटे हैं। महिलाओं पर फोकस करने की वजह बताते हैं कि महिलाओं को अच्छे से पता होता है कि परिवार के लिए क्या हेल्दी है? उनकी कोशिश लोकल फॉर ग्लोबल की है। जबलपुर के बाद वे दूसरे शहरों में अपनी फ्रेंचाइजी शुरू करने की तैयारी में है।

भास्कर खेती-किसानी एक्सपर्ट सीरीज में अगली स्टोरी होगी इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़कर कैसे युवा सपनों को दे रहे पंख। आपका कोई सवाल हो तो इस नंबर 9406575355 वॉट्सऐप पर मैसेज करें।

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