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रेमडेसिविर कालाबाजारी में गिरफ्तार डॉक्टर निकला जालसाज:दमोह से फर्जी डिग्री बनवा कर जबलपुर में निजी अस्पताल में पाई थी नौकरी, एसटीएफ ने दर्ज की दूसरी FIR

जबलपुर3 महीने पहले
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कालाबाजारी में गिरफ्तार डॉक्टर जालसाज भी निकले। - Dainik Bhaskar
कालाबाजारी में गिरफ्तार डॉक्टर जालसाज भी निकले।

रेमडेसिविर की कालाबाजारी में गिरफ्तार डॉक्टर जालसाज भी निकला। उसकी फर्जी डिग्री की पुष्टि के बाद एसटीएफ ने दूसरी एफआईआर दर्ज की है। आरोपी ने दमोह से उक्त फर्जी डिग्री बनवाई थी। आरोपी अभी भोपाल जेल में बंद है। एसटीएएफ की एक टीम उसे रिमांड पर लेने भोपाल पहुंची है।

एसटीएफ ने 20 अप्रैल को चार रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें दो डॉक्टर भी शामिल थे। गिरफ्त में आए आशीष हास्पिटल में कार्यरत डॉक्टर नीरज साहू की डिग्री को लेकर पहले से ही एसटीएफ को संदेह था। इलेक्ट्रो होम्यौपैथी कॉलेज द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के बाद एसटीएफ ने जालसाजी का एक और प्रकरण आरोपी के खिलाफ दर्ज किया है।

रिमांड पर लेने की तैयारी में एसटीफ

एसटीएफ थाना जबलपुर में होने की वजह से भोपाल कोर्ट में सभी आरोपियों को पेश किया गया था। भोपाल सेंट्रल जेल में सभी आरोपी बंद है। जबलपुर एसटीएफ ने डॉक्टर नीरज साहू को रिमांड पर लेने कोर्ट में प्रकरण लगाया है। एसटीएफ इस फर्जीवाड़े की तह तक जाने की जुगत में है। प्रारंभिक छानबीन में सामने आया है कि आरोपी ने दमोह से उक्त फर्जी डिग्री तैयार कराई थी। यहां से कई दूसरे लोगों ने भी इसी तरह से फर्जी डिग्री तैयार कराई है। एसटीएफ रिमांड पर लेकर इस नेक्सेस को तोड़ने की जुगत में है।

रेमडेसिविर मामले में आरोपी डॉक्टरों की डिग्री फर्जी:जबलपुर में STF ने दो डॉक्टरों को 4 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ दबोचा था, 18-18 हजार रुपए में बेच रहे थे इंजेक्शन

नागपुर की महिला डॉक्टर गिरोह की सरगना-

एसटीएफ ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में नीरज साहू के अलावा डॉ. जितेंद्र ठाकु, सुधीर सोनी, राहुल उर्फ अरुण विश्वकर्मा को पकड़ा था। उनसे पूछताछ में जबलपुर निवासी व नागपुर में निजी अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर संगीता पटेल का नाम सामने आया था। आरोपितों ने बताया कि उनके गिरोह की सरगना संगीता है। जिसके बाद एसटीएफ टीम ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया था। उसने तीन इंजेक्शन डॉक्टर नीरज साहू के माध्यम से 18-18 हजार रुपए में तीन इंजेक्शन बेचे थे।

मरीजों वाला इंजेक्शन चुराते थे

एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि गिरफ्त में आए सभी आरोपित निजी अस्पतालों से जुड़े रहे। पूछताछ में पता चला कि कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए जो इंजेक्शन वार्ड में भेजे जाते थे, उन्हें न लगाकर उनकी कालाबाजारी की जाती थी। 3-5 हजार रुपये कीमती रेमडेसिविर इंजेक्शन को 18 से 25 हजार रुपए में बेचते थे। आशंका जताई जा रही है कि निजी अस्पतालों में फैले इस नेटवर्क के कारण कोरोना संक्रमित तमाम मरीजों को जान से हाथ धोना पड़ा।

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