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हाथियों की सेहत जांचने जंगल पहुंचे डॉक्टर:नेशनल पार्कों में रह रहे 75 पालतू हाथियों के ब्लड-यूरिन जांच से पता लगाएंगे गंभीर बीमारी

जबलपुर11 दिन पहले
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नेशनल पार्कों में रह रहे 75 पालतू हाथियों की जांच करने नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय ने बनाई डॉक्टरों की टीम। - Dainik Bhaskar
नेशनल पार्कों में रह रहे 75 पालतू हाथियों की जांच करने नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय ने बनाई डॉक्टरों की टीम।

जंगल के साथी हाथी की सेहत जांचने का अभियान नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय की डॉक्टरों की टीम ने शुरू किया है। नेशनल पार्कों में रह रहे 75 पालतू हाथियों का हेल्थ जांच होगा। बांधवगढ़ में 14 हाथियों की जांच की गई। टीम हाथियों के ब्लड और यूरिन लेकर उनकी बीमारियों का पता लगाने में जुटी है।

जबलपुर के आसपास बांधवगढ़, पन्ना, पेंच, कान्हा, सतपुड़ा और संजय टाइगर रिजर्व में 75 पालतू हाथी हैं। इनकी मदद से जंगल में वन विभाग की टीम भ्रमण करती है। कई बार जंगली हाथियों को काबू में लाने के लिए भी उनका उपयोग किया जाता है।

सैंपल से पता चलता है कि कौन सी बीमारी है

नेशनल पार्कों बांधवगढ़, पन्ना, पेंच, कान्हा, सतपुड़ा और संजय टाइगर रिजर्व में हाथियों को सुरक्षित रखने के लिए हर साल गुजरते मानसून बीच हेल्थ कैंप आयोजित होता है। जांच से पता चलता है कि साल भर में हाथी कौन सी बीमारियों से पीड़ित रहा है। वर्तमान में उसका स्वास्थ्य कैसा है? हाथियों के यूरिन-ब्लड सैंपल लेकर वेटरनरी के डॉक्टर लैब में चैक कर बीमारियों का पता लगाने विश्लेषण करते हैं।

बायोकैमिकल किट से जांच

हाथियों की लंबाई, चौड़ाई के साथ उनके गर्दन की मोटाई, नाखून कितने बढ़े हैं, मलमूत्र और खून की जांच होती है। ब्लड सैँपल से बुखार सहित अन्य बीमारियों की जांच होती है। टीम अपने साथ बायोकैमिकल किट लेकर कैंपों में पहुंचती है। इसी किट से हाथियों की जांच होती है।

बांधवगढ़ा में 14 हाथी और उनके बच्चों की सेहत की जांच की गई।
बांधवगढ़ा में 14 हाथी और उनके बच्चों की सेहत की जांच की गई।

हाथियों में ईईएचवी का रहता है ज्यादा खतरा

हाथियों को एंडोथेलियोट्रोपिक हर्पीज वायरस (ईईएचवी) से ज्यादा खतरा रहता है। यह बीमारी 6 माह से लेकर 10 साल के तक के हाथियों को ज्यादा प्रभावित करती है। इस बीमारी में हाथियों के जान गंवाने का खतरा अधिक रहता है। इस बीमारी में हाथियों में रक्तस्राव होता है, जिसे रोक पाना मुश्किल होता है। हाथियों को गलाघोंटू, टीवी, ग्लोसिस जैसी बीमारियां भी होती है। इसके अलावा फीवर-सर्दी जुकाम से भी ये परेशान रहते हैं।

पार्कों में हाथियों की संख्या

बांधवगढ़ में 14, पेंच में 06, पन्ना में 12, कान्हा में 16, सतपुड़ा में 06 और संजय टाइगर में 04 हाथ हैं। वेटरनरी के डॉक्टर अमोल रोकड़े, डॉक्टर केपी सिंह, डॉक्टर निधि राजपूत, डॉक्टर देवेंद्र शिवहरे के साथ एक-एक पीजी का छात्र भेजा गया है। नानाजी देशमुख विवि के कुलपति एसपी तिवारी के मुताबिक बांधवगढ़ में 14 हाथियों की जांच हो चुकी है। कुछ बीमार मिले थे। उन्हें जरूरी दवाएं दी गई हैं। 20 सितंबर तक सभी नेशनल पार्कों में हेल्थ चेकअप का अभियान पूरा हो जाएगा।

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