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MP में पहली बार नैरोबेस टावर:जबलपुर में बिजली ट्रांसमिशन कंपनी ने काम शुरू किया, 10 गुना कम जगह घेरने के साथ 5 मीटर अधिक होगी ऊंचाई

जबलपुर4 महीने पहले
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घनी आबादी के लिए ट्रांसमिशन कंपनी ने नेरो बेस टावर डिजाइन की। - Dainik Bhaskar
घनी आबादी के लिए ट्रांसमिशन कंपनी ने नेरो बेस टावर डिजाइन की।

एमपी में बिजली की ट्रांसमिशन कंपनी पहली बार जबलपुर में नैरोबेस टावर लगा रही है। इसका काम भी शुरू हो गया है। यह लाइन शहर के बीच से गुजरने वाली है। ऐसे में जगह की किल्लत की समस्या इस टावर ने दूर कर दी। वहीं, अधिक ऊंचाई होने से सुरक्षा के लिहाज से भी यह उपयोगी साबित होगा। सामान्य टावर की तुलना में ये टावर 10 गुना कम जगह घेरता है। वहीं, ऊंचाई 5 मीटर अधिक होगी।

जबलपुर में नई पावर ट्रांसमिशन लाइन घनी आबादी से निकालने के कारण आ रही दिक्कतों का समाधान मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने निकाल लिया है। जबलपुर के सबसे महत्वपूर्ण और वीआईपी क्षेत्रों को सप्लाई करने वाली कंपनी के 132 केवी सब स्टेशन विनोवा भावे से ये ट्रांसमिशन लाइन निकाली जा रही है। वीकल फैक्ट्री से विनोवा भावे सब स्टेशन की 5 किमी लाइन शहर की घनी आबादी से निकल रही है। यहां जमीन की उपलब्धता के साथ सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हाे गया था।

93 वर्गमीटर की तुलना में महज 9 वर्गमीटर जगह घेरता है।
93 वर्गमीटर की तुलना में महज 9 वर्गमीटर जगह घेरता है।

ट्रांसमिशन कंपनी ने इसका हल नैरोबेस टावर के रूप में खोज लिया है। एमपी में इस तरह का टावर पहली बार किसी शहर में लगाया जा रहा है। ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक जहां पारंपरिक टावर को फाउंडेशन होने के बाद करीब 94 वर्ग मीटर की भूमि की जरूरत पड़ती है। वहीं, नैरो बेस को मात्र 9 वर्ग मीटर की जगह लगेगी।

इसके अलावा इन टावरों की ऊंचाई भी अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षात्मक होगी। परंपरागत टावर जहां 10 मीटर ऊंची होती है, वहीं नैरो बेस टावर की ऊंचाई 15 मीटर होगी। जबलपुर में विनोवा भावे सब स्टेशन में डबल सर्किट लाने करीब 18 लोकेशन पर नए टावरों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 13 टावर नैरोबेस डिजाइन के और 5 टावर पारंपरिक तरीके वाले होंगे।

घनी आबादी को देखते हुए नैरो बेस टावर की डिजाइन
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी के मुताबिक 132 केवी सब स्टेशन विनोवा भावे सघन आबादी वाले इलाके में स्थापित है। इसके विस्तार और डबल सर्किट करने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए कंपनी ने पहली बार नई डिजाइन के नैरो बेस टावर का उपयोग कर रही है। इसके अलावा, शहर की बिजली आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ करने 132 केवी सब स्टेशन वीएफजे और 132 केवी सब स्टेशन विनोवा भावे का विस्तार किया जा रहा है।

नैरो गैस टावर की ऊचाई 5 मीटर अधिक होगी।
नैरो गैस टावर की ऊचाई 5 मीटर अधिक होगी।

चार फीडर बनाए जा रहे हैं
132 केवी सब स्टेशन वीकल फैक्ट्री जबलपुर में चार 132 केवी के फीडर बनाए जा रहे हैं। इसमें अति संवेदनशील सुरक्षा संस्थानों को दो से अधिक 132 केवी लाइन की सप्लाई उपलब्ध रहेगी। साथ ही 132 केवी सब स्टेशन वीकल फैक्ट्री जबलपुर और विनोवा भावे सब स्टेशन जबलपुर की 220 केवी. सब स्टेशन नयागांव जबलपुर पर निर्भरता कम हो जाएगी। वीकल फैक्ट्री में वर्तमान में सिर्फ 220 केवी सब स्टेशन से जबलपुर में सप्लाई आती है।

इसे विस्तारित करते हुए यहां 132 केवी के चार फीडर निर्मित किए जा रहे हैं, जो 132 केवी माढ़ोताल होते हुए 220 केवी सब स्टेशन पनागर से जोड़े जाएंगे। इस तरह सब स्टेशन में दो अतिरिक्त 132 केवी. की सप्लाई उपलब्ध रहेगी। 132 केवी. माढ़ोताल में 220 केवी. सब स्टेशन पनागर, 220 केवी सब स्टेशन नयागांव जबलपुर के अलावा कचरे से विद्युत उत्पादन करने वाले एम. एस.डब्ल्यू. की 132 केवी पर सप्लाई उपलब्ध रहती है।

शहर को मिलेगा अधिक विकल्प
इस विस्तार के बाद जबलपुर शहर के हर सब स्टेशन के पास दो या दो से अधिक इनकमिंग सप्लाई का विकल्प मौजूद रहेगा। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने 220 केवी सब स्टेशन सूखा और 220 केवी सब स्टेशन गोराबाजार के माध्यम से शहर के पश्चिम और पूर्व क्षेत्र में ट्रांसमिशन सिस्टम पहले ही मजबूत बना लिया गया है।

220 केवी जबलपुर शहर के दक्षिण हिस्से की बिजली आपूर्ति करता है। उत्तर की ओर 220 केवी सब स्टेशन पनागर के साथ 132 केवी सब स्टेशन माढ़ोताल, 132 केवी वीकल फैक्ट्री सब स्टेशन और मध्य में 132 केवी विनोवा भावे सब स्टेशन के विस्तार से जबलपुर की बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम काफी मजबूत हो जाएगा।

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