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  • Encroachment In The Pond And Green Belt Due To Ignoring The Revenue Officials, Many Thousands Of Houses Were Built, Yet Only FIR On 5!

खसरा नंबर 662 का गड़बड़झाला:राजस्व अधिकारियों की अनदेखी से तालाब व ग्रीन बेल्ट में हुआ अतिक्रमण, मकान बने कई हजार फिर भी सिर्फ 5 पर एफआईआर!

जबलपुर9 दिन पहले
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ग्रीन बेल्ट और तालाब को निपटाने वाले अब किसी कीमत पर नहीं बच पाएँगे। पहली किश्त में पाँच लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया जाना इस बात का संकेत है। प्रशासनिक टीम न केवल खसरा नंबर 662 के साथ छेड़खानी करने वालों का पता ठिकाना ढूँढ रही है बल्कि अवैध रूप से प्लॉटिंग कर करोड़ों का कारोबार करने वालों के दरवाजे तक पहुँचने की कोशिश में जुटी हुई है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब किसी सरकारी जमीन को बेचने-खरीदने वालों के साथ-साथ उसकी दलाली करने वालों की भी पतासाजी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि मेडिकल के पीछे स्थित सरकारी जमीन पर भू-माफिया बरसों से गिद्ध दृष्टि जमाए हुए थे और तथाकथित जिम्मेदारों और दलालों के साथ मिलकर करोड़ों के वारे-न्यारे कर लिये जाते। सरकारी जमीन पर कांक्रीट के जंगल इस बात के पुख्ता सुबूत हैं। जैसे-जैसे दलालों, बिचौलियों और भू-माफियाओं के खिलाफ सुबूत मिलते जाएँगे, प्रशासन का शिकंजा और मजबूत होता जाएगा। हालाँकि शुरूआती कार्रवाई में बड़े नामों का सामने न आना भी संदेह का विषय माना जा रहा है। फिलहाल पाँच लोगों के खिलाफ हुई एफआईआर के बाद सरकारी जमीन को ठिकाने लगाने वालों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

ग्रीन बेल्ट में बने हैं हजारों मकान कलेक्टर द्वारा बनाई गई जाँच टीम ने तालाब व ग्रीन बेल्ट की जमीन में हजारों मकान व प्लॉट होने का खुलासा किया है। इन सभी के खिलाफ जमीन पर अवैध मकान बनाने, प्लॉट काटने और शासकीय जमीन को खुर्दबुर्द करने का मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। क्योंकि जितने लोगों ने मकान बनाए हैं या प्लॉटिंग की है, उन्होंने विभागीय परमीशन लिए बिना तालाब की जमीन का विक्रय किया है और सीधे-साधे लोगों से पैसा वसूला है।

दलाली में लिप्त लोगों तक पहुँचने की कोशिश खसरा नंबर 662 की तालाब और ग्रीन बेल्ट की जमीन को बेचकर जितने लोगों ने मुनाफा कमाया है। वे चाहे जमीन की दलाली में लिप्त लोग हों या जमीन दिलवाने में इसमें उनकी भूमिका रही है। उन सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जबकि नगर निगम ने अभी तक केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कराये हैं, जिन्होंने मेडिकल अस्पताल के पीछे स्थित खसरा नंबर 662 के कई बटांक में से 4 बटांक पर भूमि स्वामियों द्वारा अवैध कॉलोनियाँ विकसित की गई हैं। टीएण्डसीपी और तहसीलदार गोरखपुर द्वारा गठित दल की सर्वे रिपोर्ट में तालाब और ग्रीन जोन की भूमि होने का खुलासा हुआ है और जमीन को नियम के विपरीत बिना किसी परमीशन के बेचा जाना पाया गया है। इसी को आधार बनाते हुए 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

फैक्ट फाइल

  • खसरा नंबर 662 रकबा 220.90 एकड़ जमीन वर्ष 09-10 में पानी मद में दर्ज है।
  • वर्ष 1955-56 में पानी मद की भूमि के 13 बटांक किये गये थे।
  • निजी भूमि स्वामी के नाम दर्ज करने के संबंध में न तो कोई प्रकरण और न ही कोई आदेश है।
  • वर्ष 1953 से 58 तक का 5 साला खसरा जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है।
  • वर्ष 1991-92 में 23.04 एकड़ भूमि शहरी सीलिंग में अतिशेष घोषित की गई, जो खसरा के कॉलम में शासकीय भूमि दर्ज है।

जमीन को खुर्दबुर्द करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा
खसरा नंबर 662 की जमीन को खुर्दबुर्द करने में जितने लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके लिए नगर निगम को निर्देशित किया गया है। कार्रवाई हो ऐसा सुनिश्चित किया जाये। क्योंकि इस खसरे की जमीन ग्रीन बेल्ट और तालाब मद की है। इस जमीन का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
भरत सिंह यादव, कलेक्टर

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