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  • Even After 10 Years, Only 13% Of 275 Posts Were Filled, The Posts Of Registrar, Deputy Registrar And Data Anti Operator Were Filled.

मप्र आयुर्विज्ञान यूनिवर्सिटी के बुरे हाल:10 वर्ष बाद भी 275 पदों में महज 13% ही भर पाए, कुलसचिव, उपकुलसिचव और डाटा एंटी ऑपरेटर के पद भरे गए

जबलपुर13 दिन पहले
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10 वर्ष बाद भी अपने स्वरूप में नहीं आ पाया मेडिकल यूनिवर्सिटी। - Dainik Bhaskar
10 वर्ष बाद भी अपने स्वरूप में नहीं आ पाया मेडिकल यूनिवर्सिटी।

मप्र आयुर्विज्ञान यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक व्यवस्थाएं बेपटरी हो चुकी है। 10 वर्ष बाद भी विवि के सभी 275 पद नहीं भरे जा सके। 35 कर्मचारी-अधिकारियों के बूते चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को पटरी में लाने की कवायद जारी है। रिक्त पदों की वजह से जहां यूनिवर्सिटी प्रबंधन परेशान हैं, तो छात्रों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

यूनिवर्सिटी के खाली पदों को भरने के लिए कवायद कई बार हुई, लेकिन भोपाल में जाकर प्रक्रिया रूक जाती है। रिक्त पदों पर भर्ती का खाका यूनिवर्सिटी को तैयार करके भर्ती करना है। यूनिवर्सिटी में अभी तक कुलसचिव, उपकुलसचिव और डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद ही भरे हैं। जबकि भृत्य-माली और सुरक्षा गार्ड के पद आऊटसोर्स से भरे गए हैं।

कार्यवाहक कुलपति बना चुकें है रूपरेखा

कार्यवाहक कुलपति कमिश्नर बी. चंद्रशेखर विवि के खाली पदों को भरने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर चुकें हैं। प्रभारी कुलपति के मुताबिक अगले कुछ महीने में विवि को एक नया आकार दिया जाएगा। नए और कुशल कर्मचारी लाए जाएंगे। विवि का पूरा कामकाज ऑनलाइन होगा। इसके लिए 8-10 आईटी विशेषज्ञों का एक आईटी सेल बनाया जाएगा। इसमें प्रतिनियुक्ति के साथ से बाहर से विशेषज्ञ लाएंगे।

मप्र आयुर्विज्ञान यूनिवर्सिटी।
मप्र आयुर्विज्ञान यूनिवर्सिटी।

ये पद खाली है

रेक्टर,अधिष्ठाता छात्र संगठन, वित्त अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, सहायक कुलसचिव-6 पद खाली, सहायक अभियंता-1, सहायक अभियंता विद्युत-2, अनुभाग अधिकारी-11 पद, बॉयो मेडिकल इंजीनियर-1, कैशियर-3, शीघ्रलेखक-9, सहायक वर्ग-12, सहायवर्ग2- 22, स्टेनो-06, डाटा एंट्री ऑपरेटर- 48 में 13 पद भरे है शेष खाली है।

ये व्यवस्थाएं बेपटरी हुई

  • समय परीक्षा और परिणाम घोषित नहीं हो रहे हैं।
  • ऑनलाइन काम रूका हुआ है, कोर्ट संबंधी कामकाज भी प्रभावित।
  • सहायक कुलसचिव नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं बिगड़ गई है।
  • विद्यार्थियों को अंकसूचियां नहीं मिल रही है। समय पर परीक्षा की कॉपियां भी चेक नहीं हो रही है।
  • लेखापाल संबंधी सारे कार्य ठप्प हो गए हैं।
  • विवि की गोपनीय सुरक्षा भी खतरे में है।
  • ऑऊटसोर्स कर्मचारियों से ईमेल और ऑनलाइन काम काज कराए जा रहे हैं।