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फर्जी बही पर जमानत वाली गैंग का मामला:मैहर में 500 रुपए में बनवाता था एक सील, फोटो काॅपी की दुकान पर बही और आधार कार्ड होता था तैयार

जबलपुर6 महीने पहलेलेखक: संतोष सिंह
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फर्जी बही पर जमानत लेने वाला शौकत सील मैहर में 500 रुपए में बनवाता था। - Dainik Bhaskar
फर्जी बही पर जमानत लेने वाला शौकत सील मैहर में 500 रुपए में बनवाता था।
  • गैंग की गहरी हैं जड़ें, कानून में खामियों का उठाते थे फायदा
  • जेडीए के ईडब्ल्यूएस क्वार्टर में रहता है आरोपी का परिवार, फर्जी जमानतदारों के दूसरे गैंग भी सक्रिय

जिले में फर्जी बही तैयार कर जमानत कराने वाले गैंग के कारनामे सामने आने लगे हैं। पांच जिलों में सक्रिय यह गिरोह हर साल 30 से 35 लोगों का जमानत पांच से 10 हजार रुपए लेकर कराता था। इसमें साधारण प्रकरण से लेकर धोखाधड़ी और गंभीर प्रकरणों के आरोपी शामिल होते थे। खासकर पेशेवर अपराधी, जिसकी जमानत कराने में उनके अपने भी बचते थे। सरगना गाजीनगर गली नंबर एक निवासी मुन्ना उर्फ शौकत अली मैहर से 500 रुपए में फर्जी सील बनवाता था। वहीं, महेंद्र जायसवाल अपनी फोटो काॅपी की दुकान पर फर्जी बही और आधार कार्ड तैयार करता था।

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फर्जी बही में विवरण भरते थे असली, सिर्फ बदलते थे फोटो।
फर्जी बही में विवरण भरते थे असली, सिर्फ बदलते थे फोटो।

असली बही की फोटो काॅपी तैयार कर बनता था फर्जी बही
EWS मकान में परिवार के साथ रहने वाले मास्टरमाइंड शौकत अली ने असल बही का जुगाड़ किया था। इसी बही की हूबहू फोटोकाॅपी शीतलामाई घमापुर निवासी महेंद्र महेंद्र जायसवाल की दुकान से कराकर उसकी प्रिंटिंग करते थे। आरोपी के पास से 25 कोरी बही जब्त हुए हैं। इसमें आरोपी जमानत के लिए असली बही के खातेदार का ब्यौरा दर्ज करते थे, जबकि फोटो गिरोह के किसी सदस्य की लगती थी।

पुरानी बही दिखाने के लिए ये करते थे
ये रैकेट बही को पुरानी दिखाने के लिए उसे चाय के पानी में भिगो कर सुखा लेते थे। इसके बाद हर पन्ने को प्रेस कर देते थे। फिर हाथ से बही में नाम, पता, हलका, पटवारी, तहसील आदि का ब्यौरा भरते थे। फर्जी आधार कार्ड तैयार करने के लिए कम्प्यूटर प्रोग्राम फोटोशाॅप का सहारा लेते थे। असली आधार कार्ड को स्कैन कर उसकी फोटो और पता बदल देते थे। इसमें महेंद्र जायसवाल को महारत हासिल है। गिरोह के लोग बहुत ही शातिर हैं। वे कोर्ट के बाहर खड़े रहते थे। गांव के अनपढ़ और सीधे-सादे लोगों की ये बही देखने के बहाने लेते थे। उसकी फोटो खींच कर रख लेते थे। फिर इसी का उपयोग वे फर्जी बही तैयार करने में करते थे।

17 साल में सिर्फ 10 बार पकड़ा गया शौकत
शौकत अली 2003 से 2018 के बीच में 10 बार फर्जी बही के आधार पर जमानत कराने के प्रकरण में आरोपी बना है। कुछ में वह मुख्य आरोपी है, ताे कुछ में सह आरोपी है। शौकत के गिरोह में बेटे, समधन सहित कुल आठ लोग शामिल हैं। सभी जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, दमोह जिले के तहसील कोर्ट से लेकर जिला व हाईकोर्ट में जमानत लेते थे।

इस खामी से चल रहा था फर्जीवाड़ा
गिरोह का एक सदस्य किसी भी एक कोर्ट में एक वर्ष में एक ही जमानत कराता था। इसकी वजह से गिरोह के सदस्यों पर संदेह भी नहीं होता था। जमानत के लिए कोर्ट में बही और आधार कार्ड का मिलान किया जाता है। सत्यापन नहीं कराने का फायदा गिरोह उठाता था। कोर्ट चाहे तो आधार कार्ड का ऑनलाइन सत्यापन करा सकती है, लेकिन ये भी नहीं होता। सिर्फ संदेह वाली बही प्रकरण में संबंधित एसडीएम या तहसीलदार से जांच कराई जाती है। इसी तरह के प्रकरणों में पूर्व में एफआईआर दर्ज हुई है।

जमानत कराने का प्रावधान
केस डायरी कोर्ट में मुख्य लोक अभियोजक के माध्यम से पेश की जाती है। किसी प्रकरण में जमानत होने या न होने की बहस लोक अभियोजक आरोपी के अधिवक्ता से करता है। कोर्ट से जमानत अर्जी मंजूर होने पर उसकी जमानत कौन ले रहा है। ये लोक अभियोजक नहीं देखते। कोर्ट में रोज बड़ी संख्या में जमानत के प्रकरण लगते हैं। ऐसे में कौन छह महीने या एक साल बाद फिर से जमानत कराने आया है। इसकी जानकारी कोर्ट के बाबू भी नहीं कर सकते हैं। हालांकि कोर्ट के बाबुओं की संलिप्तता से पुलिस इनकार नहीं कर रही है।

पैसे के लालच में नियम ताक पर
सील बनाने के लिए अधिकारी या संबंधित कार्यालय के लेटर पैड पर विवरण देना होता है। इसके बाद ही सील बनती है, लेकिन आरोपी मैहर में एक परिचित को 500 रुपए देकर अलग-अलग तहसील और कार्यालय के नाम का फर्जी सील तैयार कराता था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि कुछ वकील भी शौकत से जमानत लेने के लिए संपर्क करते थे। अब पुलिस ये पता लगाने में जुटी है कि इन अधिवक्ताओं को फर्जी बही की जानकारी थी या नहीं। वहीं, कुछ वकीलों और बदमाशों से आरोपी खुद संपर्क कर पैसे लेकर जमानत कराने की पेशकश करते थे।

हर साल 30 से 35 लोगों की कराते थे जमानत
ये गिरोह हर साल 30 से 35 लोगों की जमानत कराता था। अब तक कितने लोगों की जमानत करा चुका है, इसकी जानकारी खुद उन्हें भी नहीं है। पुलिस इसके लिए कोर्ट को पत्र लिख रही है। इसमें आरोपी के पास से जब्त बही का विवरण देकर, इसके माध्यम से जमानत लेने वालों की सूची प्राप्त करने की कवायद में जुटी है। वहीं आरोपी के जब्त कम्प्यूटर हार्ड डिस्क में भी कुछ डाटा मिले हैं। उसे भी खंगाला जा रहा है।

आरोपी से जब्त कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क, स्कैनर, प्रिंटर मशीन आदि।
आरोपी से जब्त कम्प्यूटर, हार्ड डिस्क, स्कैनर, प्रिंटर मशीन आदि।

आगे क्या
पुलिस मामले में पांचों जिलों के विभिन्न कोर्ट को पत्र के साथ बही का विवरण भेजने जा रही है। इस पत्र के साथ अनुरोध किया जाएगा कि इन बही पर कितने और किस तरह के प्रकरणों में अभियुक्तों को जमानत दी गई है। ऐसी जमानत निरस्त कराई जाएगी। कोर्ट का बाबू या अधिवक्ता की संलिप्तता मिलने पर उसे भी सह आरोपी बनाया जाएगा।

पुलिस ने तह तक जाने का प्रयास नहीं किया
हनुमानताल पुलिस के खुलासे ने सिविल लाइंस पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। 2018 के पहले सिविल लाइंस थाने में मुख्य आरोपी शौकत अली पर फर्जी बही के आधार पर 10 जमानत कराने का प्रकरण दर्ज हुआ। बावजूद पुलिस इसके तह तक जाने का प्रयास नहीं किया। मुख्य सरगना गोहलपुर थाने का निगरानी बदमाश है। बावजूद गोहलपुर पुलिस उसकी गतिविधियों का पता लगाने में फिसड्‌डी साबित हुई। इसके अलावा, अभियुक्त सलमा बी 2018 में सिविल लाइंस में और मार्च 2020 में ओमती थाने में फर्जी बही से जमानत कराने के प्रकरण में कोर्ट के आदेश पर आरोपी है। सिविल लाइंस के प्रकरण में तीन हजार और ओमती के प्रकरण में चार हजार का इनाम घोषित था। बावजूद दोनों थानों की पुलिस ने गिरफ्तारी के प्रयास नहीं किए।

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