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देश की पिंक सिटी में MP के गुलाब की डिमांड:जबलपुर में आधे एकड़ के पॉलीहाउस में गुलाब की पैदावार, रोज 7 से 8 हजार की सप्लाई

जबलपुर9 महीने पहले

परंपरा से हटकर खेती करना लाभ का धंधा बन सकता है। ये साबित किया है जबलपुर जिले के प्रगतिशील किसान ने। पांच साल पहले जबलपुर मुख्यालय से 25 किमी दूर पहाड़ी खेड़ा में आधे एकड़ में पॉलीहाउस लगाकर गुलाब की खेती शुरू की थी। लॉकडाउन के दो सालों को छोड़ दें, तो वह रोज सात से आठ हजार रुपए के गुलाब बेचते हैं। चार से पांच स्थानीय लोगों को काम मिला है। उनके गुलाब की डिमांड जबलपुर के साथ लखनऊ, दिल्ली और जयपुर के बाजारों में काफी रहती है। भास्कर खेती किसानी सीरीज-30 में आइए जानते हैं गुलाब की खेती के गुर एक्सपर्ट संजय परोहा (प्रगतिशील किसान) से…

पॉलीहाउस में गुलाब की खेती।
पॉलीहाउस में गुलाब की खेती।

40 लाख रुपए आया था खर्च

पहाड़ीखेड़ा नाम के अनुरूप ही पहाड़ी वाला इलाका है। एक एकड़ के खेत में बड़े-बड़े पत्थरों में गुलाब की खेती लोगों को आश्चर्यचकित कर देती है। 2016 में जब यहां खेती के लिए जमीन की तैयारी शुरू कराई तो लोग हंसते थे। पहली वजह पानी की समस्या थी। यहां जलस्तर बड़ी मुश्किल से मिल पाता है। मुझे 400 फीट गहराई में पानी मिल पाया। गुलाब के लिए लाल मिट्‌टी अच्छी मानी जाती है। उसे अलग से इस पहाड़ी खेत में डलवाया। पाॅलीहाउस से लेकर गुलाब के 22 हजार पौधे लगाने में 40 लाख का प्रारंभिक खर्च आया था। इस तरह की खेती में हार्टीकल्चर विभाग से सब्सिडी के तौर पर मदद भी मिलती है।

आधे एकड़ में 22 हजार पौधे लगाए, रोज 1200 से 1500 फूल निकलते हैं।
आधे एकड़ में 22 हजार पौधे लगाए, रोज 1200 से 1500 फूल निकलते हैं।

पौधरोपण से पहले मिट्‌टी की तैयारी

पीली मिट्‌टी में पांच ट्राली गोबर की सड़ी खाद डलवा कर उसे अच्छे से मिक्सअप कराया था। साथ में इसमें 10 टन धान की भूसी मिलानी पड़ती है। रोटावेटर से जुताई कराकर खाद व भूसी को मिलाते हैं। फिर दो दिन उसे छोड़ देते हैं। इसके बाद हल्का पानी डालकर वेड तैयार किया जाता है। ढाई फीट चौड़ाई और एक फीट ऊंचाई का वेड तैयार किया जाता है। बीच में एक फीट की दूरी रखी जाती है।

पौधरोपण से पहले फंगस से बचाव जरूरी

पौधरोपण से पहले मिट्‌टी में फंगस अवरोधी, दीमक और चूहा दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। तीन से चार दिन बाद पौधरोपण करना पड़ता है। पौधों का चुनाव बेहद जरूरी है। बाजार में सबसे अधिक रेड गुलाब की डिमांड रहती है। आधे एकड़ के लिए मैने पुणे से टाटा स्टार रेड गुलाब के 22 हजार पौधे मंगवाए थे। प्रति पौधा 11 रुपए की दर से प्राप्त हुआ था। एक वेड पर दो लाइन गुलाब की जिग-जैग स्टाइल में 12 इंच की दूरी पर लगाना चाहिए। वेड में पौधे की सिंचाई के लिए दो लाइन ड्रिप पाइप और बीच में मिस्ट (फुहारा) पाइप बिछाना पड़ता है।

पांच साल से गुलाब की खेती कर रहे।
पांच साल से गुलाब की खेती कर रहे।

पोधरोपण के 75 दिन बाद से आने लगता है फूल

पौधरोपण के दूसरे दिन सिंचाई करनी होती है। सिंचाई के बाद ड्रिप से 19:19, क्लोरी-50, यूरिया, कैल्शियम, 0050, 13045 खाद देनी पड़ती है। पौधरोपण के ढाई महीने बाद से फूल आने लगता है। खाद के लिए ए-टैंक और बी-टैंक का इस्तेमाल किया जाता है। ए-टैंक से 0050 की 500 ग्राम, 19:19 की 750 ग्राम और यूरिया की 500 ग्राम मात्रा देनी पड़ती है। तीन दिन तक कोई खाद नहीं। बी-टैंक से कैल्शियम की 500 ग्राम व 13045 की 500 ग्राम मात्रा देनी चाहिए। फिर तीन दिन खाद नहीं देते। ए और बी टैंक का प्रयोग क्रमश: करना पड़ता है।

रोग से बचाव जरूरी

गुलाब के पौधे काफी नाजुक होते हैं। इसमें फफूंद जनित रोग, सफेद मकड़ी सहित कई रोग लगते हैं। ध्यान न दें, तो पूरा पौधा सूख सकता है। इस कारण पौधों को रोज देखना चाहिए। किसी भी पौधे में रोग के लक्षण दिखे, तो तुरंत उपचार करना चाहिए। इसके लिए जरूरी कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए।

गुलाब के लिए सिंचाई बेहद अहम

गुलाब के पौधों की सिंचाई बेहद अहम है। इसके पौधों को न तो अधिक गीली मिट्‌टी होनी चाहिए न ही अधिक सूखा होना चाहिए। मिट्‌टी में नमी की मात्रा के अनुसार समय-समय पर सिंचाई करनी होती है। गर्मी के दिनों में फुहारा दस से 15 मिनट चलाकर तापमान नियंत्रित करना पड़ता है। गुलाब में फरवरी से जून तक सबसे अधिक फूल आते हैं। ठंड के दिनों में फूल की मात्रा कम हो जाती है।

गुलाब की रोज कटिंग के बाद उसकी पैकिंग कर बाजार में भेजना पड़ता है।
गुलाब की रोज कटिंग के बाद उसकी पैकिंग कर बाजार में भेजना पड़ता है।

फूल की कटिंग में सावधानी

गुलाब के फूलों की कटिंग में भी बड़ी सावधानी की जरूरत होती है। इसे नीचे से तीन से चार पत्ती छोड़कर तना सहित काटना पड़ता है। जितना लंबा तना होता है, उसकी कीमत उतनी ही अधिक मिलती है। तीन से चार पत्ती छोड़ने का मतलब ये है कि वहां से गुलाब के नए तने निकलते हैं। फिर 20 गुलाब का बंच बनाया जाता है। एक बंच बाजार में 100 रुपए से 350 रुपए तक भाव के अनुसार बिकता है। बाजार का भाव ऊपर-नीचे होता रहता है।

मार्केट का अनुभव और संपर्क जरूरी

गुलाब की अच्छी कीमत के लिए मार्केट का अनुभव और संपर्क जरूरी है। गुलाब की बड़ी डिमांड जयपुर, लखनऊ, दिल्ली में है। लोकल मार्केट सहित इन तीनों शहरों के लिए जबलपुर से सीधी ट्रेन है। जहां अच्छा भाव मिले, वहां सप्लाई कर दें। मेरे आधे एकड़ में सारे खर्च निकाल दें तो हर महीने 60 से 70 हजार रुपए की बचत हो जाती है। एमपी सरकार 2016 में उन्हें प्रदेश में सबसे अच्छा गुलाब उगाने खातिर पुरस्कृत भी कर चुकी है।

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