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MP में पहली बार लंगूर का इंटरलॉकिंग मेलिंग ऑपरेशन:रॉड-स्क्रू से पैर जोड़ा, हाथ का ऑपरेशन 5 दिन बाद होगा; एक्सीडेंट में हड्डियों के 5 टुकड़े हुए थे

जबलपुर3 महीने पहले

जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सालय (वेटरनरी) यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने एक मादा लंगूर को नया जीवन दिया है। सड़क हादसे में लंगूर के हाथ और पैर की हडि्डयां 5 टुकड़ों में बंट गई थी। लंगूर की जान बचाने के लिए स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के डॉक्टरों ने इंटरलॉकिंग मेलिंग (हड्डी के अंदर राड डालकर बाहर से स्क्रू कसना) से लंगूर के पैर का ऑपरेशन किया। मध्यप्रदेश में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन है। 5 दिन बाद हाथ का भी ऑपरेशन होगा। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि एक महीने में ही मादा लंगूर पहले की तरह उछल-कूद करने लगेगी।

मध्यप्रदेश में इससे पहले जानवरों के इस तरह के जो भी ऑपरेशन हुए, उसमें केवल अंदर से रॉड डाली गई थी। नरसिंहपुर जिले की वन विभाग की टीम को 1 सितंबर को ये मादा लंगूर घायल हालत में मिली थी। 10 साल की इस मादा लंगूर की हाथ की हड्डी दो टुकड़ों में और बाएं पैर की हड्डी 3 टुकड़ों में बंट गई थी।

लंगूर के हाथ और पैर की टूटी हडि्डयां।
लंगूर के हाथ और पैर की टूटी हडि्डयां।

महज 6% था हीमोग्लोबिन
लंगूर के ऑपरेशन के लिए वेटरनरी डॉक्टरों को एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ा। लंगूर की हालत काफी खराब थी। उसका हीमोग्लोबिन 6% ही था, इसे 10.4% बढ़ाने के लिए डॉक्टरों ने उसे एक सप्ताह तक रोजाना अनार का रस, नारियल पानी, केले सहित अन्य फल खिलाए। 8 सितंबर बुधवार को लंगूर के पैर का ऑपरेशन हुआ। 4 घंटे चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने लंगूर के पैर की टूटी हड्‌डी को रॉड डालकर स्क्रू से कस दिया है। पांच दिन बाद हाथ का ऑपरेशन होगा।

ऑपरेशन करते वेटरनरी के चिकित्सक।
ऑपरेशन करते वेटरनरी के चिकित्सक।

एक माह में ऊछल-कूद करने लगेगी
स्कूल ऑफ वाइ्ल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ डॉक्टर शोभा जवारे ने बताया कि पहली बार इंटरलॉकिंग मेलिंग से लंगूर के पैर का ऑपरेशन किया गया है। 5 दिन बाद हाथ का ऑपरेशन किया जाएगा। 20 दिन तक लंगूर डॉक्टरों की निगरानी में रहेगी। करीब एक माह बाद उसे जंगल में छोड़ा जाएगा। जहां वह आसानी से ऊछल-कूद कर सकेगी।

लंगूर को लगातार केयर में रखा जा रहा है।
लंगूर को लगातार केयर में रखा जा रहा है।

जान बचाना मुश्किल लग रहा था
डॉक्टर शोभा जवारे के मुताबिक, हफ्ते भर पहले जब लंगूर को वेटरनरी लाया गया था, तो हालात देखकर लग रहा था कि इसका बचना मुश्किल है। वह दर्द से कराह रही थी। वेटरनरी के डॉक्टर रणधीर सिंह, डॉ. बबीता दास, डॉ. अतराशाही, डॉ. निधि राजूपत, डॉ. माधुरी भैरकर के साथ पीजी के छात्रों की टीम ने लगातार उसकी देखभाल कर ऑपरेशन के लायक बनाया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है, उसने खाना-पीना भी शुरू कर दिया है।

पैर की टूटी हड्‌डी को जोड़ते चिकित्सक।
पैर की टूटी हड्‌डी को जोड़ते चिकित्सक।

इस तरह चला इलाज

  • हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ाने के लिए डॉक्टरों ने उसे अनार रस, नारियल पाली, केले सहित दवाइयां दी।
  • बॉटल ड्रिप लगाई गई। इस दौरान डॉक्टरों ने बहुत केयर की।
  • बुखार और दर्द के लिए एक हफ्ते तक दवाइयां दी गई।
  • लंगूर के लिए व्हील कार्ट बनाया जा रहा है, जिसकी मदद से वह आसानी से चल सके।
  • डॉक्टरों की टीम ने हाथ का ऑपरेशन इंटरलॉकिंग मेलिंग पद्धति से किया।
  • ऑपरेशन के बाद लंगूर को आईसीयू में रखा गया है। जहां लगातार डॉक्टर निगरानी कर रहे हैं।
  • हाथ का ऑपरेशन 5 दिन बाद होगा।
  • 20 दिन तक मादा लंगूर वेटरनरी डॉक्टरों की देख-रेख में रहेगी।
  • इसके बाद उसे जंगल में छोड़ा जाएगा।
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