गुजरात के आरोपियों की चार दिन की रिमांड मिली:सिटी अस्पताल के दवा कर्मी देवेश की रिमांड अपील खारिज, फिर कोशिश करेगी एसआईटी

जबलपुर4 महीने पहले
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गुजरात के चारों आरोपियों को चार दिन की रिमांड पर लिया गया। - Dainik Bhaskar
गुजरात के चारों आरोपियों को चार दिन की रिमांड पर लिया गया।

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की जांच अब आखिरी चरण में पहुंच गई है। गुजरात से लाए गए चारों आरोपियों को एसआईटी ने 17 जून को दोपहर बाद कोर्ट में पेश किया। एसआईटी ने आरोपियों की रिमांड पांच दिन की मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने चार दिन कही दी। वहीं जबलपुर में सबसे पहले गिरफ्तार हुए सिटी अस्ताल के दवा कर्मी देवेश चौरसिया की रिमांड नहीं मिल पाई। एसआईटी शुक्रवार को फिर कोशिश कर सकती है।

ओमती थाने में दर्ज नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन प्रकरण में नामजद चार आरोपी नकली फार्मा कंपनी के डायरेक्टर मोरबी गुजरात निवासी पुनीत शाह, कौशल वाेहरा, रीवा निवासी सुनील मिश्रा और अधारताल निवासी फार्मा संचालक सपन जैन को गुजरात से लाने वाली एसआईटी ने गुरुवार शाम को जस्टिस मोना शुक्ला की कोर्ट में पेश किया। वहां से चारों को चार दिन की रिमांड पर लिया गया है। चारों को क्राइम ब्रांच के थाने में रखकर पूछताछ की जा रही है।

एएसपी खुद कर रही मामले को लीड

एसआईटी प्रभारी आईपीएस रोहित काशवानी खुद इस मामले को लीड कर रहे हैं। एसआईटी टीम के साथ वे भी पूछताछ के दौरान मौजूद हैं। विवेचक सीएसपी अखिलेश गौर सहित एसआईटी की पूरी टीम चारों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ में जुटी है। पुनित शाह व कौशल वोरा से यह पता लगाने में टीम जुटी है कि वे कब से नकली इंजेक्शन बनाना शुरू किए। कौन-कौन लोग इस खेल में शामिल थे। कहां से वे रैपर, शीशियां आदि मंगवाते थे। अब तक कहां-कहां बेच चुके हैं। जबलपुर में 500 इंजेक्शन का ऑर्डर कहां से मिला।

कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद ले जाती एसआईटी।
कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद ले जाती एसआईटी।

35 इंजेक्शन का राज बताएगा सपन

सपन जैन ने सिटी अस्पताल में 465 इंजेक्शन ही दो कार्टून के माध्यम से 23 व 27 अप्रैल को भिजवाए थे। 35 इंजेक्शन उसने खुद रख लिए थे। पूर्व में गिरफ्तार उसके साथी राकेश शर्मा ने तिलवारा में फेंकने की बात बताई थी। अब सपन से भी इसे लेकर पूछताछ की जा रही है। जरूरत पड़ी तो टीम उसे लेकर घटना का रिक्रिएशन भी करा सकती है।

सुनील मिश्रा से मिल सकता है अहम जानकारी

एसआईटी को सपन और सुनील मिश्रा से ही कुछ अहम क्लू मिलने की उम्मीद है। सुनील मिश्रा ही वह शख्स है, जो ऑनलाइन रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने का एड डाला था। इसी एड को देखकर विजय नगर के दवा व्यवसायी ने सिटी अस्ताल के दवा कर्मी देवेश चौरसिया को उसका नंबर दिया था। देवेश का दावा है कि उसने उक्त नंबर अस्पताल के डायरेक्टर मोखा और फिर उनके कहने पर सपन को दिया था। जबकि सपन का दावा है कि उसे उक्त नंबर मोखा ने दिया था। अब एसआईटी राकेश शर्मा से यह उगलवाने में जुटी है कि उसकी सपन के अलावा किस-किस से बात हुई है।

विक्टोरिया में मुलाहिजा के बार कोर्ट में पेश किए गए चारों आरोपी।
विक्टोरिया में मुलाहिजा के बार कोर्ट में पेश किए गए चारों आरोपी।

देवेश का रिमांड इस कारण जरूरी

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के सौदे में देवेश, सपन और राकेश की तिकड़ी की भूमिका सबसे अधिक रही। यही कारण है कि एसआईटी ने देवेश को भी रिमांड पर लेने की कोशिश की। हालांकि रिमांड नहीं मिल पाया। शुक्रवार को एक बार फिर देवेश को रिमांड पर लेने की कोशिश एसआईटी करेगी, जिससे तीनों आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर उनके बयानों को क्रास चेक किया जा सके। इसके बाद जरूरत पड़ी तो मोखा को भी रिमांड पर लिया जाएगा।

ये है पूरा मामला
1 मई को गुजरात में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन का भंडाफोड़ हुआ। 6 मई की रात गुजरात पुलिस ने जबलपुर से सपन जैन को गिरफ्तार किया। उसने सिटी अस्पताल के डायरेक्टर सरबजीत मोखा का नाम लिया और बताया कि 465 इंजेक्शन उसने दिया है। इसमें से 171 मरीजों को 209 इंजेक्शन लगाए गए। इसमें नौ की मौत हो चुकी है। 50 मरीजों के इलाज के बिल, बयान आदि दर्ज किए जा चुके हैं।

सरबजीत माेखा व बेटा हरकरण सिंह जेल में हैं। मोखा के एनएसए पर भी एडवाइजरी बोर्ड की मुहर लग गई है।
सरबजीत माेखा व बेटा हरकरण सिंह जेल में हैं। मोखा के एनएसए पर भी एडवाइजरी बोर्ड की मुहर लग गई है।

तोड़ कर फेंके गए 200 के लगभग वायल भी पुलिस ने जब्त किए हैं। चार नकली इंजेक्शन भी पुलिस ने जब्त किए हैं। प्रकरण में देवेश चौरसिया, सिटी अस्पताल के डायरेक्टर सरबजीत मोखा, उसकी पत्नी सिमरत कौर, बेटा हरकरण, मैनेजर सोनिया खत्री और राकेश शर्मा को पहले ही एसआईटी गिरफ्तार कर चुकी है। उक्त चार आरोपियों की गिरफ्तारी शेष रह गई थी।

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