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  • Gulauatal Was Put To Rest With Great Vigor, But Now I Have To Take Care Of Him, There Is No Care In The Morning Or Evening.

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अनदेखी:गुलौआताल को बड़ी शिद्दत के साथ सँवारा तो गया, पर अब उसी को ठिकाने लगाने उतारू, सुबह-शाम कोई देखरेख नहीं

जबलपुरएक महीने पहले
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यहाँ हर जगह गाजर घास उगी है, फाउंटेन जंग खा रहा है।
  • किनारे के हिस्से में उग रही गाजरघास, बारिश के बाद अब तक तालाब की सफाई नहीं, गंदगी से आसपास अब सैर करना भी मुश्किल हो रहा, यही हाल रहा तो दम तोड़ देगा एक बेहतर स्थान

गुलौआताल को दो साल पहले बड़ी शिद्दत के साथ 6 करोड़ से अधिक की लागत से सुधारा गया। इसका पहले गहरीकरण कराया, पाथ-वे बनाया गया, फाउण्टेन, म्यूजिक सिस्टम, बच्चों के खेलने के लिए झूले सहित वर्जिश की कुछ मशीनें भी लगाई गईं। कुल मिलाकर इस कोशिश में गुलौआताल एक बेहतर स्वरूप में निखरा, लेकिन इसी तालाब पर ऐसा लगता है कि जिम्मेदारों की ही टेढ़ी नजर है। हालत ऐसी है कि बारिश के बाद जो घास इसके किनारे के हिस्से में उगी है उसकी अब तक छँटाई नहीं हुई है।

अमूमन हर हिस्सा इसका अभी बिखरा-बिखरा नजर आ रहा है। तालाब के किनारे झाड़ियाँ हैं तो पाथ-वे के किनारे भी घास उगी है जिससे वाॅकिंग करने वाले सहजता के साथ नहीं निकल पाते हैं। एक अच्छे-खासे विकसित तालाब की दशा ऐसी है कि कोई देखरेख वाला तक नहीं है। क्षेत्रीय नागरिक जेपी गुप्ता कहते हैं कि किनारे के हिस्से में बेहतर तरीके से सफाई नहीं होने से हमेशा डर बना रहता है, क्योंकि कई बारी किनारे से साँप तक निकल चुके हैं।

बीते दिन शाम के वक्त अचानक तालाब के किनारे जहाँ पर झाड़ियाँ ज्यादा हैं वहाँ पर एक साँप निकल आया जिससे भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई। गुलौआ चौक निवासी रामस्वरूप गुप्ता कहते हैं कि तालाब की देखरेख बारिश के बाद बहुत ज्यादा जरूरी हो जाती है, बारिश में जो यहाँ हरियाली पनपती है उसको क्लीन करना जरूरी होता है। यदि इसको समय पर साफ नहीं किया जाता है तो लोगों को परेशानी होती है, इस बार यही हो रहा है। वार्ड के पूर्व पार्षद संजय राठौर कहते हैं कि बड़ी मशक्कत के बाद इस तालाब को सुंदर स्वरूप दिया गया, पर अब अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

घट गई ऑक्सीजन मछलियों को खतरा
तालाब का पानी सफाई न होने की वजह से पूरी तरह से गंदा हो चुका है। कई हिस्सों में एकदम हरा तो जहाँ पर इसके किनारे घर बने हैं वहाँ पर अब भी पानी कलर बदलकर काला हो चुका है। पूरे तालाब के किनारे दुर्गन्ध महसूस की जा सकती है। हालत ऐसी है कि तालाब की जल्द से जल्द सफाई होना चाहिए। तालाब की मछलियाँ जो अभी तक स्वच्छ पानी में आजादी के साथ रहती थीं ऑक्सीजन घटने पर इनका जीवन भी खतरे में पड़ गया है।

किसी काम का नहीं म्यूजिक सिस्टम
तालाब में इसलिए म्यूजिक सिस्टम लगाया गया कि वाॅकिंग करते समय लोगों को एक बेहतर माहौल मिले। इसके लिए अलग-अलग तरह से साउण्ड सिस्टम फिट किये गये। कुछ दिन तो यह चला, लेकिन जैसे ही समय गुजरा इस सिस्टम का खुद बैंड बज गया। अभी म्यूजिक सिस्टम है और यह चालू हालत में भी है, लेकिन कभी किसी को सुनाई नहीं देता है। तालाब के किनारे पाथ-वे में सुबह-शाम पैदल चलने वाले संजय गुप्ता, संतोष ठाकुर, दिनेश गुप्ता, नीरज श्रीवास्तव कहते हैं कि जिस उद्धेश्य से यहाँ पर संसाधन जुटाये गये वह उद्धेश्य धरा का धरा रह गया। किसी तरह का कोई नियम ही नहीं है। हालत ऐसी है कि कभी सफाई तक ढँग से होती नहीं, और तो और कोई सफाई कर्मी तक यहाँ दिखाई नहीं देता है।

एक नजर इस पर भी

  • कुल तालाब का एरिया 14 एकड़ का।
  • अभी फिलहाल चारों ओर गंदगी, सफाई नहीं।
  • लोगों के बैठने वाली जगहों तक घास उगी।
  • पहले जैसा सुधार हुआ वह धीरे-धीरे हो रहा बर्बाद।
  • नगर निगम की अनदेखी से बदतर हो रहे हालात।
  • गंदगी से जलीय जंतु के जीवन को भी खतरा।

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