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  • Mokha's Mobile Became A Mystery, Stirred Up By Revelations To Tell Authorities About Fake Injection, IPS Said, No Information Was Given To The Police

हरकरण की रिमांड समाप्त, गया जेल:मोखा का मोबाइल बना रहस्य, नकली इंजेक्शन के बारे में अधिकारियों को बताने के खुलासे से मचा हड़कंप, IPS बोले- पुलिस को नहीं दी थी कोई सूचना

जबलपुर4 महीने पहले
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बेटा हरकरण गया जेल, सरबजीत मोखा की शनिवार को समाप्त हो रही रिमांड। - Dainik Bhaskar
बेटा हरकरण गया जेल, सरबजीत मोखा की शनिवार को समाप्त हो रही रिमांड।

गुजरात से 500 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन जबलपुर लाने के प्रकरण में घिरे सिटी अस्पताल के डायरेक्टर सरबजीत मोखा का मोबाइल एसआईटी नहीं जब्त कर पाई। मोखा का दावा है कि कोविड के दौरान वार्ड में उसका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया था। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मोबाइल कहां गया, उसे नहीं पता। लेकिन पूछताछ के दौरान उसके इस रहस्योद्धाटन कि 3 मई को कुछ अधिकारियों को उसने सच्चाई से अवगत कराते हुए मार्गदर्शन मांगा था, इससे हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को आईपीएस एएसपी रोहित काशवानी मीडिया के सामने आए और बोले कि मोखा ने ऐसी कोई सूचना पुलिस को नहीं दी थी।

आईपीएस काशवानी ने कहा कि सरबजीत को यदि नकली इंजेक्शन के बारे में पता चल गया था, तो उसे सूचित करना था, लेकिन उसने कभी सूचित नहीं किया। नकली इंजेक्शन मंगवाने के संबंध में सरबजीत मोखा और उसके बेटे हरकरण ने बातचीत की थी। यही साक्ष्य मिटाने के लिए हरकरण ने अपने दोनों मोबाइल दिल्ली भागते समय पाटन की पहाड़ी पर तोड़ कर फेंक दिए थे। रिमांड के दौरान टीम अवशेष जब्त करने उसे लेकर गई थी, लेकिन वह नहीं मिला।

हरकरण की रिमांड समाप्त, गया जेल

सरबजीत मोखा के बेटे हरकरण की रिमांड समाप्त होने के बाद शुक्रवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं सरबजीत मोखा से एसआईटी की पूछताछ जारी है। आईपीएस रोहित काशवानी के मुताबिक मोखा ने पूछताछ में यह स्वीकार कर लिया है कि नकली इंजेक्शन आए और मरीजों को लगाए गए। इसके बाद उसे नष्ट भी किया गया। उससे कुछ और साक्ष्यों के बारे में पूछताछ की जा रही है। मोबाइल के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। उसके मोबाइल की सीडीआर निकाली जा चुकी है।

कंपनी के एक्सपर्ट भी आएंगे जांच करने

रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के एक्सपर्ट भी एसआईटी के पत्र पर यहां जांच करने आने वाली है। इस कंपनी के नाम, रैपर आदि का प्रयोग नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन तैयार करने में हुआ है। कंपनी की शिकायत पर भी आरोपियों के खिलाफ काॅपी राइट एक्ट सहित अन्य धाराएं बढ़ाई जा सकती है। वहीं नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन में किस तरह का केमिकल है और इसका शरीर पर किस तरह का प्रभाव पड़ सकता है, इसकी भी जांच कराएंगे।

अब ट्रांसफर वारंट पर गुजरात से आरोपियों को लाएगी पुलिस

गुजरात पुलिस द्वारा गिरफ्तार अधारताल आशा नगर निवासी सपन जैन, रीवा निवासी सुनील मिश्रा, नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाली फार्म कंपनी के डायरेक्टर कौशल वोहरा व पुनीत शाह को अब ट्रांसफर वारंट पर जबलपुर लाया जाएगा। इसके लिए एसआईटी कोर्ट से ट्रांसफर वारंट जारी करा रही है। ये वारंट लेकर एक टीम आरोपियों को लेने गुजरात जाएगी। अभी इन आरोपियों को लाने के लिए प्रोडक्शन वारंट SIT ने जारी कराए थे, लेकिन वहां की पुलिस आरोपियों को लेकर अब तक जबलपुर नहीं आई। गुजरात से इन आरोपियों के आने के बाद सरबजीत और उसके अस्पताल के दवा कर्मी देवेश चौरसिया का फिर से रिमांड लिया जा सकता है।

बैंक से आरोपियों के खाते की मांगी जानकारी

एसआईटी ने आरोपियों के खाते की जानकारी के लिए बैंक को लिख है। वहीं दो टीम आसपास के जिलों में मरीजों से संपर्क साधने गई है। उनसे इलाज के असल बिल जब्त किए जा रहे हैं। केस डायरी में इसे संलग्ध किए जाएंगे। एसआईटी हर बिंदु की बारीकी से जांच कर रही है। जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उसे इस केस में शामिल किया जाएगा।

कांग्रेस का आरोप, सच के लिए सीबीआई जांच जरूरी

उधर, कांग्रेस ने एक बार फिर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में सीबीआई जांच की मांग दाेहराई है। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी लगातार इस मामले को लेकर सवाल उठा रही है। मोखा का मोबाइल अभी तक कहां है? यह आज तक उजागर नहीं हो पाया है। मोबाइल और उसमें दर्ज अधिकारियों से बातचीत का सच सामने लाया जाना चाहिए। इस पूरे प्रकरण में सीबीआई जांच ही दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है।

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