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नर्सिंग होमों की जांच कराए सरकार:हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर राज्य सरकार को दिया आदेश, कमेटी बनाकर तीन महीने में कराओ जांच

जबलपुर2 महीने पहले
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हाईकोर्ट में नर्सिंग होमों के मामले में दायर याचिका निराकृत, राज्य सरकार को तीन महीने में कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट में नर्सिंग होमों के मामले में दायर याचिका निराकृत, राज्य सरकार को तीन महीने में कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश।

एमपी में नर्सिंग होमों की जांच के लिए राज्य सरकार को हाईकोर्ट ने तीन महीने में कमेटी बनाकर जांच कराने का आदेश दिया है। कमेटी इसकी रिपोर्ट कोर्ट के साथ ही याचिकाकर्ता को देगी। इसके बाद भी याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं हुआ तो उसे नए सिरे से याचिका लगानी होगी। कमेटी रूल्स के अनुसार निजी अस्पतालों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी कि 13 सालों में कितना सुधार आया है। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी।

निजी नर्सिंग होम के लिए 1973 में एक्ट बना था। 2006 में संशोधन कर रूल्स तय किए गए थे। इसमें नर्सिंग होम के संचालन के लिए एक मानक तय किया गया था। प्रदेश के निजी नर्सिंग होमों में रूल्स तय नहीं करने पर 2008 में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने जनहित याचिका लगाई थी। याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में संचालित निजी नर्सिंग होमों में प्रशिक्षित डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ का अभाव है। आईसीयू, बेड आदि के लिए पर्याप्त मानक की जगह नहीं है। समय-समय पर हाईकोर्ट ने दो बार अंतरिम आदेश भी जारी किया था।

इसी लंबित याचिका पर हुई सुनवाई

13 साल पहले की इस लंबित याचिका पर 14 सितंबर मंगलवार को हाईकोर्ट में जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और वीरेंद्र सिंह की डबल बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि 13 सालों में अस्पतालों में कई तरह के सुधार हो चुके होंगे। क्या अब भी इस याचिका का औचित्य बना हुआ है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। बताया कि आज भी निजी नर्सिंग होमों में रूल्स के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल सहित अन्य मानकों का पालन नहीं हो रहा है।

खुद निजी निर्संग होम एसोसिएशन की ओर से लिखित रूप से जवाब पेश किया गया है कि ये संभव नहीं है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को कमेटी गठित कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश देते हुए याचिका को निराकृत कर दिया। याचिकाकर्ता को कहा है कि यदि वह इस कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो वह नई याचिका के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।

याचिका में इन बिंदुओं को उठाया गया था

2006 रूल्स के अनुसार निजी नर्सिंग होम में एक बेड के लिए 75 वर्गफीट की जमीन होनी चाहिए। मतलब 750 वर्गफीट के हाल में 10 बेड से अधिक नहीं हो सकते हैं। इसी तरह एलोपैथी के क्वालीफाई डॉक्टर, नर्स तैनात होने चाहिए। इमरजेंसी में क्वालीफाई डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित हो। रात में भी एलोपैथी के क्वालीफाई डॉक्टर मौजूद रहें। मरीजों से संबंधी सारे रिकॉर्ड होने चाहिए। अस्पताल में मौजूद जांच और इलाज की दर डिस्प्ले होना चाहिए। अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक कोविड में निजी अस्पतालों की असलियत सामने आ चुकी है। आज भी इन बिंदुओं का पालन नहीं हो रहा है।

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