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ये भी खास:गौरवशाली है मध्य प्रदेश हाईकाेर्ट का इतिहास; महज एक रुपए है ऐतिहासिक इमारत का किराया

जबलपुर9 महीने पहले
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देश भर में जबलपुर को न्यायधानी के नाम से जाना जाता है। - Dainik Bhaskar
देश भर में जबलपुर को न्यायधानी के नाम से जाना जाता है।
  • देश भर में जबलपुर को न्यायधानी के नाम से जाना जाता है

मध्य प्रदेश की स्थापना के साथ ही जबलपुर को 1 नवंबर 1956 को हाईकोर्ट की सौगात मिली थी। विशेष बात यह है कि अपने वास्तु शिल्प के लिए मशहूर हाईकोर्ट बिल्डिंग का किराया मात्र एक रुपए है। यहाँ के न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं ने पूरे देश में मप्र हाईकोर्ट का नाम रोशन किया है। यही वजह है कि देश भर में जबलपुर को न्यायधानी के नाम से जाना जाता है।

आपातकाल के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवकांत शुक्ला बनाम एडीएम जबलपुर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। आपातकाल में भी राइट टू लाइफ को खत्म नहीं किया जा सकता। मप्र हाईकोर्ट के इस फैसले को देश के 9 हाईकोर्टों ने मान्यता दी थी, हालाँकि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था। 40 साल बाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को मान्यता प्रदान कर दी है।

वरिष्ठ अधिवक्ता सरदार राजेन्द्र सिंह और जस्टिस जीपी सिंह ने देश भर के न्यायिक क्षेत्र में जबलपुर को पहचान दिलाई। 60 के दशक में हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस पीवी दीक्षित ने न्यायिक क्षेत्र में काफी काम किया। 1972 में जस्टिस आरके तन्खा और जस्टिस जेएस वर्मा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जज नियुक्त हुए। उन्होंने हाईकोर्ट में कई महत्वपूर्ण फैसले दिए।

सिविल मामलों के महारथियों के बेटों ने भी रोशन किया नाम

जबलपुर में 50 से 60 के दशक में अधिवक्ता एमएम सप्रे, अधिवक्ता आरपी वर्मा और अधिवक्ता ताराचंद नायक सिविल मामलों के महारथी माने जाते थे। उनके पुत्रों ने भी न्याय क्षेत्र में उनका नाम रोशन किया। अधिवक्ता श्री सप्रे के पुत्र जस्टिस एएम सप्रे और अधिवक्ता श्री वर्मा के पुत्र जस्टिस दीपक वर्मा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने, वहीं अधिवक्ता ताराचंद नायक के पुत्र जस्टिस प्रकाश नायक हाईकोर्ट जज के पद तक पहुँचे।

सुप्रीम कोर्ट तक फहराई न्याय पताका

मप्र हाईकोर्ट के पहले चीफ जस्टिस एम. हिदायतुल्ला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उन्हें उपराष्ट्रपति भी बनाया गया। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस वर्मा और जस्टिस आरसी लाहोटी भी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उड़ीसा से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आए जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद को सुशोभित किया। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जज रहे जस्टिस फैजानुद्दीन, जस्टिस डीएम धर्माधिकारी, जस्टिस पीपी नावलेकर, जस्टिस दीपक वर्मा, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एएम सप्रे ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश तक का सफर तय कर गौरव बढ़ाया।

महाधिवक्ताओं की रही है गौरवशाली परंपरा

मप्र हाईकोर्ट में महाधिवक्ता रहे एम. अधिकारी, एपी सेन, केके चितले, वायएस धर्माधिकारी, एनसी निहलानी, एसएल गर्ग, एएम माथुर, एमवी तामस्कर, निर्मलचंद जैन, पीएल दुबे, अनूप चौधरी, एसएल सक्सेना, विवेक कृष्ण तन्खा, आरएन सिंह, आरडी जैन, आरसी अग्रवाल, पुरुषेन्द्र कौरव, राजेंद्र तिवारी और शशांक शेखर ने देश भर में प्रदेश का नाम रोशन किया।

ये रहे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस

1 जस्टिस एम. हिदायतुल्ला 2 जस्टिस गणेश प्रसाद भट्ट 3 जस्टिस पीवी दीक्षित 4 जस्टिस विशंभर दयाल 5 जस्टिस पीके तारे 6 जस्टिस शिवदयाल श्रीवास्तव 7 जस्टिस एपी सेन 8 जस्टिस जीपी सिंह 9 जस्टिस गोवर्धन लाल जमनालाल आेझा 10 जस्टिस जेएस वर्मा 11 जस्टिस नारायण दत्त ओझा 12 जस्टिस जीजी सोहानी 13 जस्टिस सुशील कुमार झा

14 जस्टिस यूएल भट्ट 15 जस्टिस एके माथुर 16 जस्टिस भवानी सिंह 17 जस्टिस कुमार राजारत्नम 18 जस्टिस आरवी रविन्द्रन 19 जस्टिस एके पटनायक 20 जस्टिस सैयद रफत आलम 21 जस्टिस शरद अरविंद बोबडे 22 जस्टिस एएम खानविलकर 23 जस्टिस हेमंत गुप्ता 24 जस्टिस एसके सेठ 25 जस्टिस एके मित्तल 26 जस्टिस मोहम्मद रफीक

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