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उम्मीदों का बजट:कुछ दरियादिली दिखाए सरकार तो टूरिज्म, इंडस्ट्री, एजुकेशन और एग्रीकल्चर सेक्टर को मिल सकती है संजीवनी

जबलपुर9 महीने पहले
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सांकेतिक फोटो - Dainik Bhaskar
सांकेतिक फोटो

वैक्सीन के बाद अगर राहत भरी उम्मीद का कोई दूसरा मुद्दा है तो वो है राज्य का बजट..। कोरोना से राहत के लिए जिस तरह लोगों ने वैक्सीन के आने का इंतजार किया। कराहती, लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को भी ठीक इसी तरह आर्थिक डोज यानी विशेष पैकेज का इंतजार है...। हालाँकि हालातों के बीच बैलेंस शीट को बैलेंस करना प्रदेश सरकार के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

जबलपुर शहर और जिला ही नहीं बल्कि पूरे महाकोशल को विकास की दरकार है। ऐसे में बजट के जरिए टूरिज्म, इंडस्ट्री, इलेक्ट्रिसिटी, एजुकेशन और एग्रीकल्चर सेक्टर पर अगर थोड़ी सी भी दरियादिली दिखाई जाती है तो प्राकृतिक संसाधनों से लबरेज इस क्षेत्र को नई संजीवनी मिल सकती है। वक्त के साथ कदमताल मिलाते हुए विकास की राह में वह आगे बढ़ सकता है।

वक्त की मांग: टूरिज्म के सेन्ट्रल प्वाइंट के रूप में जबलपुर का हो विकास , ब्रांडिंग भी जरूरी

नर्मदा नदी और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जबलपुर और इसके इर्दगिर्द पुरातत्व से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जगहें जबलपुर में हैं। लेकिन इसके बावजूद आज तक यहाँ का विकास को सही रफ्तार हासिल नहीं हो पाई। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना और नौरादेही जैसे नेशनल पार्कों के अलावा अमरकंटक और पचमढ़ी जैसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल की जबलपुर से सीधी कनेक्टिविटी है।

  • राज्य सरकार को बजट में टूरिज्म की सुविधाओं पर ध्यान देकर जबलपुर को सेन्ट्रल पाइंट के रूप में िवकसित करना चाहिए।
  • अब केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल भी केन्द्र में जबलपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर जबलपुर को मिल सकता है।
  • टूरिस्ट डेस्टिनेशन को जोडने वाली सड़कों को बेहतर करने की जरुरत है। इसके अलावा पब्लिक ट्रांस्पोर्ट को बढ़ावा मिलना चाहिए।
  • नर्मदा नदी पर बने बरगी डेम और भेड़ाघाट के आसपास खंडवा के हनुवंतिया जैसे केन्द्र स्थापित होने चाहिए, जहाँ देश भर के टूरिस्ट आकर रुकें।

शिक्षकों को वेतन के लाले : रादुविवि ने माँगे 64 करोड़, ताकि नए पाठ्यक्रम भी शुरू हो सकें

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के नियमित तथा अतिथि शिक्षकों के आगे वेतन का बडा संकट है। रिटायर्ड हो चुके प्रोफेसरों की पेंशन भी अटक रही है। कुल मिलाकर बजट में अगर विवि की ओर से माँगी गई 64 करोड की रकम मिल जाती है तो तो वेतन और पेंशन की टेंशन तो खत्म होगी ही साथ मेें नए पाठ्यक्रम भी शुरू हो सकेंगे।

फंड हासिल होने से विवि में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी। विकास के नए अवसर बनेंगे। इतना भर नहीं स्किल डव्ल्प्मेंट जैसी दिशा में बढावा मिलेगा।

बजट में डिजिटल टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने की जरुरत है। विवि कुलप्रति प्रो. कपिल देव मिश्र मानते है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसका लाभ होगा।

महँगाई कम करने प्रयास करे सरकार- बजट में मप्र सरकार को अपने हिस्सा का वेट टैक्स कम करने प्रयास करने चाहिए। इससे पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों में गिरावट आएगी और महँगाई पर कुछ हद तक लगाम कसी जा सकेगी।

-प्रो. मुकेश शाह, अर्थशास्त्री

सरकार रिसर्च पर ध्यान देवें- एक समृद्ध राज्य बनने के लिए शोध जरूरी होता है। इसलिए सरकार को रिसर्च कार्य को बढ़ावा देना चाहिए। रिसर्च पर इन्वेस्ट करना चाहिए। ऑनलाइन स्टडीज की महत्ता बढी है इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार जरूरी है।

-प्रो. पीके सिंघल, रादुविवि

कब होगी मुनाफे की खेती: 2.75 लाख हेक्टेयर का रकबा फिर भी सुविधाएँ नहीं

कृषि के क्षेत्र में हर फसल जिले में भरपूर मात्रा में होती है। 2 लाख 75 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि रकबा है फिर भी किसानों को सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं। बिजली, पानी सहित उचित प्लेटफॉर्म जिले के किसानों को नहीं मिल रहा है। मटर की फसल यहाँ बहुतायत में होती है और यहाँ का मटर विदेशों तक जाता है। इसके बाद भी यहाँ प्रोसेसिंग यूनिटें नहीं लग रही हैं, कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं।

  • बजट में इस दिशा में ध्यान देने की जरूरत है कि यहाँ भी मटर के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स लगें और कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएं।
  • एग्रो हब की दिशा में समय-समय पर घोषणाएं होती रही है उम्मीद है कि इस बजट में किसी बडे निवेश को आकर्षित करने की योजना आएगी।

अधूरे है ये वादे...

  • नर्मदा रिवर फ्रंट बजट 10 करोड़
  • शास्त्री ब्रिज में नया निर्माण बजट प्रावधान 150 करोड़
  • कैंसर इंस्टीट्यूट में राज्य का बजट नहीं मिला
  • पल्मोनरी इंस्टीट्यूट, न्यूरो इंस्टीट्यूट में बजट का रोना
  • 80 करोड़ से पक्के नालों का प्लान बजट में अधूरा
  • डुमना नेचर सफारी प्रोजेक्ट जहां का तहां

पॉवर सेक्टर : अब क्वालिटी इम्प्रूवमेंट के लिए जरूरी है एक झटका

पॉवर सेक्टर नए सब स्टेशन निर्माण से लेकर सब्सिडी और नई योजनाओं के लिए राशि मिलने की आस लगाए बैठा है। पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगवाने की योजना है, इसके अलावा निर्बाध आपूर्ति के लिए पॉवर सेक्टर को और ज्यादा मजबूत होने की जरुरत है। सरप्लस बिजली के बाद अब क्वालिटी में सुधार की सख्त जरुरत है और इसके लिए भी फंड जरुरी होगा।

  • निजीकरण की स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार को नया फंड बनाना चाहिए, जिसका बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए।
  • पॉवर जनरेटिंग कंपनी की भविष्य की परियोजना श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह में 6 सौ मेगावॉट की दो यूनिटें बनाने का प्रस्ताव है, बजट में राशि मिलने की उम्मीद है।

ट्रैफिक प्लान : बना और गायब

शहर की फैलती सीमाओं तथा यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए करीब एक दशक पहले शहर के लिए ट्रैफिक प्लान तो तैयार किया गया लेकिन लागू हो नहीं पाया। इसके लिए सभी विभागों की मदद लेकर ट्रैफिक इंजीनियरिंग के हिसाब से खाका बनाया गया। आगे चलकर बजट की समस्या सामने आई और प्लान भी मानो जाम में फंसकर रह गया। इस संबंध में प्लान को अमलीजामा पहनाने की कवायद करने वाले तत्कालीन अधिकारियों का कहना था कि बजट के अभाव में प्लान लागू नहीं किया जा सका। उनका मानना था कि यह तभी संभव हो सकता है जबकि ट्रैफिक प्लान के लिए अलग से बजट में प्रावधान किया जाए।

हैल्थ सेक्टर : अधर में हैं कई काम

शहर के जिला अस्पताल विक्टोरिया में तकरीबन साल भर पहले कांग्रेस सरकार के समय 200 बेड बढ़ाने की घोषणा हुई थी, जो अब तक घोषणा ही बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में बरसों से कई प्रोजेक्ट्स लंबित हैं। सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन न्यूरो सर्जरी, सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट समेत मेडिकल अस्पताल की बिल्डिंग का एक्सटेंशन जैसे प्रोजेक्ट्स में कहीं भवन बनकर तैयार है तो उपकरण नहीं है, तो कहीं स्ट्रक्चर का काम चल रहा है।

लॉ यूनिवर्सिटी : चाहिए 100 करोड़

जबलपुर के पिपरिया क्षेत्र में 125 एकड़ में बनने वाली धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग के लिए राज्य सरकार ने 338 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए हैं, बिल्डिंग निर्माण का काम शुरू करने के लिए 100 करोड़ रुपए की पहली किश्त का आवंटन भी कर दिया गया है, लेकिन अभी तक पहली किश्त की राशि रिलीज नहीं की गई है। इसके कारण लॉ यूनिवर्सिटी को प्रतिवर्ष 6 करोड़ रुपए किराया देना पड़ रहा है।

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