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जूडा के समर्थन में उतरा IMA, हड़ताल की चेतावनी:इस्तीफा मंजूर करने के एवज में 30 लाख का बांड भरने के लिए भीख मांगेंगे जूनियर डॉक्टर

जबलपुर2 महीने पहले
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जूनियर डॉक्टर छह सूत्रीय मांग को लेकर 31 मई से हड़ताल पर हैं। - Dainik Bhaskar
जूनियर डॉक्टर छह सूत्रीय मांग को लेकर 31 मई से हड़ताल पर हैं।

जबलपुर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 6वें दिन भी जारी है। जूडा के समर्थन में एसआर और जेआर के बाद अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी आ गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जूनियर डॉक्टरों ने कोरेाना जैसे संकट में जान जोखिम में डाल कर मरीजों की सेवा की है। अब उनकी मांग पूरी करने की बजाय सरकार उत्पीड़न कर रही है। ऐसा ही रहा तो आईएमए से जुड़े सभी डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।

उधर, आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों ने कहा है कि इस्तीफा स्वीकार करने के लिए सरकार बांड के तौर पर 30 लाख रुपए जमा करने को बोल रही है। ये रकम तो उनके पास है नहीं। आम लोगों के सामने झोली फैलाकर भीख मांग कर पैसे भरेंगे।

जबलपुर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर पंकज सिंह ने बताया कि हमारे मां-बाप पढ़ाई कराने में जमा-पूंजी खत्म कर चुके हैं। कोविड काल में उनकी हालत और भी पस्त हो चुकी है। ऐसे में शासन को बांड भराने के लिए कुछ दिनों की मोहलत देनी होगी। नहीं तो उनके सामने भीख मांगने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचेगा। सरकार जिद छोड़े और अपने शिक्षा मंत्री के आश्वासन को पूरा करे।

सोशल वर्क में जुटे जूनियर डॉक्टर
पिछले छह दिनों से हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर सोशल वर्क में जुटी है। विश्व पर्यावरण दिवस पर शनिवार शाम चार बजे वे मेडिकल कॉलेज परिसर में पौधरोपण किया। इससे एक दिन पहले जूडा ने ब्लड डोनेशन कैम्प का आयोजन किया था। 25 यूनिट ब्लड डोनेट किया था।

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जूनियर डॉक्टर प्रदर्शन करते हुए।
जूनियर डॉक्टर प्रदर्शन करते हुए।

जेएआर और एसआर भी हड़ताल में शामिल
जूनियर डॉक्टरों की छह सूत्रीय मांग के समर्थन में शुक्रवार से जूनियर रेजिडेंट (जेआर) और सीनियर रेजिडेंट (एसआर) भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इनकी संख्या जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 100 है। एमबीबीएस पासआउट के बाद एक वर्ष का इंटर्नशिप करना होता है। इसमें 6 महीने ग्रामीण व छह महीने कहीं भी सेवा देने की स्वतंत्रता होती है। 6 महीने तक उन्हें जेआर और इसके बाद एसआर कहा जाता है। इनके हड़ताल में शामिल होने से मेडिकल कॉलेज में इलाज ठप सा हो गया है।

जूडा के समर्थन में आईएमए
मप्र चिकित्सा विश्वविद्यालय द्वारा जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ की गई नामांकन रद करने की कार्रवाई के खिलाफ आइएमए ने सरकार को चेतावनी दी है। आइएमए जिला शाखा के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डीन डॉ. प्रदीप कसार को ज्ञापन भी सौंपा। इसमें जूडा का नामांकन बहाल करते हुए उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की मांग की है।

चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं हुआ तो निजी क्षेत्र के चिकित्सक भी स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर देंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दीपक साहू, सचिव डॉ. ब्रजेश चौधरी ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों ने कोविड ड्यूटी में स्वयं की परवाह किए बगैर मरीजों की सेवा की। अब उनके साथ तानाशाहीपूर्ण रवैया अनुचित है।

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इस्तीफा देना है तो पहले बांड की राशि भरो

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर प्रदीप कसार की ओर से हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टराें से साफ कहा गया है कि इस्तीफा देना है तो पहले नियम के तहत 30 लाख रुपए बांड राशि जमा करो। यह राशि कॉलेज के खाते में जमा करना होगा। सूत्रों की माने तो यह शासन की दबाव वाली रणनीति है। इस तरह जूनियर डॉक्टरों पर दबाव बनाकर हड़ताल समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि मांग पूरी करते हुए सरकार को वार्ता की मेज पर लाने की पहल करनी होगी।

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