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आदिवासी अंचल में नहीं हो पा रहा वैक्सीनेशन:बालाघाट के गांवों में नक्सलियों से नहीं वैक्सीन से लगता है डर; कोरोना संक्रमण के बाद भी लापरवाही

बालाघाट4 महीने पहले
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मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र दक्षिण बैहर में 50 से अधिक विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा गांव में वैक्सीनेशन के लिए ग्रामीण तैयार नहीं है। यहां अधिकांश आबादी नक्सलवाद के खतरे के बीच ही रहती है लेकिन इन्हें नक्सलियों से कहीं ज्यादा डर कोरोना के वैक्सीन से लगता है।

आदिवासी बाहुल्य दुल्हापुर मुरूम बटरंगा गांव की आबादी में ज्यादातर बैगा परिवार हैं जो पूरी तरह वनों पर निर्भर है। परिवार का गुजर-बसर और इनका जीवन जंगल के ही भरोसे चलता है लेकिन इस गांव तक भी कोरोना का संक्रमण पहुंचा है। साथ ही पहुंचा है सरकार का वैक्सीनेशन प्रोग्राम लेकिन इन आदिवासियों ने अब तक कभी कोई इंजेक्शन नहीं लगवाया। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं तो यहां नहीं पहुंची लेकिन कोरोना के टीके को लेकर अफवाह जरूर यहां तक पहुंच गई।

गांव की भदली बाई ने कहा मैं बेजा डरा टीका से, मे टिका लगवाओ नही, मोला सुहाए ही नही, आह बिलकुल ना लगवा। इसी तरह फूलवती बाई ने कहा मे डर गया हूं, हम लगाते च नी, कैसे लगा बो टीका हमला डर लगथे है। यह बात सिर्फ दो महिलाओं की नहीं है। हर महिला स्थानीय बोली में ऐसा ही जवाब दे रही है। ज्यादातर आदिवासी गांव में हालात कुछ इस तरह के ही हैं लोगों में संक्रमण का डर नहीं है बल्कि हम इस बात से डरते हैं कि कहीं टीका लगाकर उनके साथ कुछ ना हो जाए।

हिरदु लाल, इनवाती, ग्राम प्रधान मुरुम ने बताया कि हमारे यहां सभी विभाग ने प्रयास किया। हमने गांव में ट्रैक्टर भी भेजा कि लोग टीका लगाने आए। शुरू में एक दो लोगों ने लगवाया भी लेकिन उसके बाद अफवाह के कारण लोग टीका लगाने आगे नहीं आए। देश में टीकाकरण को बढ़ावा देना है तो सरकार को न सिर्फ टीकों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी, बल्कि गांव-गांव में जागरूकता शिविर भी लगाने पड़ेंगे। लोगों में विश्वास की कमी और तेजी से फैलती अफवाह टीकाकरण अभियान को ग्रामीण अंचलों में बुरी तरह प्रभावित किया है। सरकारी अधिकारी भी कहते हैं कि यदि टीकाकरण कराना है तो सिर्फ विभाग अकेले के भरोसे यह काम नहीं हो पाएगा।

सीएमएचओ डॉक्टर मनोज पांडे ने बताया विभाग के भरोसे यह काम नहीं होगा। लोगों को ही समझना पड़ेगा कि संक्रमण में कितने लोगों की जान गई है और उससे बचने का सिर्फ एक ही तरीका है टीकाकरण। जिसके लिए लोगों को भी टीका लगवाने के बाद अपने आसपास के लोगों को जागरूक बनाना पड़ेगा।

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