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आयुध कंपनियों का निगमीकरण शुरू:जबलपुर की चारों आयुध निर्माणियों को चार कंपनियां चलाएंगी, श्रमिक संगठन विरोध में करेंगे भूख हड़ताल

जबलपुरएक महीने पहले
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जीसीएफ देश की सबसे पुरानी आयुध निर्माणियों में शामिल। - Dainik Bhaskar
जीसीएफ देश की सबसे पुरानी आयुध निर्माणियों में शामिल।

सेना के लिए हथियार बनाने वाली जबलपुर की चारों आयुध कंपनियाें को अब चार कंपनियां चलाएंगी। अभी तक इन कंपनियों का संचालक रक्षा मंत्रालय के अधीन आयुध निर्माणी बोर्ड करता था। रक्षा मंत्रालय ने देश की 41 आयुध निर्माणियों को सात भागों में विभक्त कर निगम में तब्दील करने का फैसला लिया है। रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय से कर्मचारी संगठनों में आक्रोश है और उन्होंने क्रमित भूख हड़ताल का निर्णय लिया है।

जबलपुर की चारों आयुध निर्माणियों में गन कैरिज फैक्ट्री और ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया का निर्माण तो अंग्रेजी शासनकॉल में हुआ था। वहीं जीआईएफ व वीएफजे देश की स्वतंत्रता के बाद यहां स्थापित हुई थीं। चारों फैक्ट्रियों का सेना के वाहन से लेकर गोला-बारूद और तोप आदि निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब केंद्र सरकार की ओर से बनाई जाने वाली कंपनियों के अधीन इनका संचालन होगा। इसी को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश देखा जा रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि कंपनी बनने के बाद आयुध कंपनियों की स्थित खराब हो जाएगी।

जीआईएफ में बम, हैंड ग्रेनेड की बॉडी और एरियल बम की ढलाई होती है।
जीआईएफ में बम, हैंड ग्रेनेड की बॉडी और एरियल बम की ढलाई होती है।

चारों आयुध कंपनियां सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण

  • गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) देश की सबसे पुरानी आयुध निर्माणियों में शामिल है। 1904 में इसकी स्थापना हुई थी। फैक्ट्री में तोप और सेना के वाहन का उत्पादन होता था। अभी दुनिया की सबसे बड़ी तोप धनुष तोप का उत्पादन हो रहा है। शारंग तोप सहित एलएफजी और मोर्टार का निर्माण भी यहीं हुआ था। फैक्ट्री में 3500 के लगभग अधिकारी-कर्मचारी हैं।
  • आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) की स्थापना 1942 में हुई थी। यहां तीनों सेनाओं के लिए बम और मिसाइल तैयार की जाती है। कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट यहां पर चलते हैं। इसमें अधिकतर विदेशी तकनीक पर आधारित हैं। अब उत्पादन स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यहां 6 हजार कर्मचारी-अधिकारी हैं।
  • ग्रे आयरन फाउंड्री (जीआईएफ) देश की सबसे छोटी निर्माणियों में शामिल है। यहां पर ढलाई का काम होता है। सेना के लिए तैयार होने वाले हथियारों में उपयोगी कलपूर्जे यहां बनाए जाते हैं। सेना के लिए हैंड ग्रेनेड की बॉडी, वायुसेना के प्रमुख हथियार एरियल बम की बॉडी की ढलाई यहीं होती है। इससे पहले रेलवे के लिए भी निर्माणी काम करती थी। यहां 700 के लगभग कर्मचारी-अधिकारी हैं।
  • वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान से लगी पाकिस्तानी सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए वाहनों का निर्माण करती है। फैक्ट्री में साधारण वाहनों के अलावा बुलेटप्रूफ, माइंस प्रूफ वाहनों का उत्पादन व्यापक पैमाने पर होता है। हाल ही में सैन्य वाहनों के साथ शारंग तोप का पूरा काम इसी निर्माणी में शुरू हुआ। यहां भी लगभग 3500 अधिकारी-कर्मचारी हैं।
वीएफजे में तैयार होता है सैन्य वाहन।
वीएफजे में तैयार होता है सैन्य वाहन।

कर्मचारी संगठन लामबंद, करेंगे विरोध
चारों आयुध कंपनियों के निगमीकरण की प्रक्रिया शुरू होते ही कर्मचारी संगठनों में उबाल आ गया है। सरकार के निर्णय के खिलाफ तीनों महासंघ एआईडीइएफ, आईएनडीडब्ल्यूएफ व बीपीएमएस से संबद्ध लेबर यूनियन, सुरक्षा कर्मचारी यूनियन इंटक और कामगार यूनियन खमरिया के पदाधिकारियों ने गुरुवार को एक बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तय की। आरोप लगाया कि 15 जून को चीफ लेबर कमिश्नर के साथ बैठक रद्द होने और फेडरेशन के बिना संज्ञान में लिए यह निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों ने क्रमिक भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया है।

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