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MP में सेब उगाने की तैयारी!:दो साल के पौधे तैयार, संभावनाएं तलाशने में जुटी प्रदेश की सबसे बड़ी एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी

जबलपुर7 महीने पहले

किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में प्रदेश की सबसे बड़ी जवाहर लाल नेहरू कृषि यूनिवर्सिटी जुटी है। इसके लिए कृषि विवि जबलपुर में सेब और कपास की खेती की नई संभावनाएं तलाशने में जुटा है। कपास का जहां बेहतर उत्पादन हुआ है। वहीं सेब का दो साल का पौधा पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। अब उसमें फल आने का इंतजार किया जा रहा है। सेब और कपास की क्या है एमपी में संभावनाएं और किस तरह किसान की आय बढ़ा सकती है। आईए जानते हैं भास्कर खेती-किसानी सीरीज-8 में एक्सपर्ट डॉ. मोनी थॉमस (मुख्य वैज्ञानिक जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय) से…

सेब की खेती है संभव

सेब का नाम आते ही शिमला और कश्मीर का नाम जेहन में आता है, लेकिन अब जबलपुर भी सेब की खेती में पहचान बना सकता है। यहां पूरी परिस्थितियां हैं। अमरकंटक में सेब व नाशपाती की कई वर्षों पहले खेती होती रही है। कृषि विवि में दो साल पूर्व सेब के पौधे लगाए गए हैं, जो अच्छी बढ़वार लिए हैं। यदि यहां की परिस्थितियों में पौधे सर्वाइव नहीं करते तो अब तक सूख चुके होते।

एप्पल प्लांट के पास जेएनकेवी के विशेषज्ञ डॉ. मोनी थॉमस।
एप्पल प्लांट के पास जेएनकेवी के विशेषज्ञ डॉ. मोनी थॉमस।

जबलपुर का मौसम है अनुकूल

सेब के लिए जबलपुर का मौसम काफी अनुकूल माना जा रहा है। यहां साल भर धूप होती है। मिट्‌टी का पीएच 5 से 7 के बीच होनी चाहिए। यहां की मिट़टी भुरभुरी वाली है। इसके पौधे में पानी नहीं लगना चाहिए। वहीं इसके पौधे के लिए ठंड जरूरी है, लेकिन पाला नहीं पड़ना चाहिए। यहां ठंड में 7 से 20 डिग्री तक तापमान रहता है। सेब के पौधे तीन से चार साल में फलने लगते हैं। सितंबर-अक्टूबर के मध्य इसमें फूल आते हैं। 130 से 135 दिनों में ये तैयार हो जाते हैं।

जबलपुर में कपास की खेती की पूरी संभावनाएं हैं।
जबलपुर में कपास की खेती की पूरी संभावनाएं हैं।

कपास की बेहतर खेती हो सकती है महाकौशल अंचल में

कपास की फसल मुख्यत: मालवा, महाराष्ट्र और गुजरात आदि राज्यों में होता है। पर जबलपुर सहित महाकौशल में भी कपास की अच्छी खेती हो सकती है। जबलपुर कृषि विवि ने कपास की अच्छी खेती कर इसकी संभावनाओं का द्वार किसानों के लिए खोल दिया है। कपास छह महीने की फसल है और इसे काटकर किसान गेहूं की उपज ले सकते हैं। जून-जुलाई में किसान भाई इसे लगा सकते हैं। नवंबर से 15 दिसंबर तक 80 प्रतिशत कपास का उत्पादन ले सकते हैं। एक हेक्टेयर में 6 से 8 किलो बीज लगता है। किसान एक हेक्टेयर से 12 से 15 क्विंटल रेशे प्राप्त कर सकते हैं।

भास्कर खेती-किसानी एक्सपर्ट सीरीज में अगली स्टोरी होगी शिमला मिर्च व टमाटर की उन्नत खेती के लिए किसान क्या करें। यदि आपका कोई सवाल हो तो इस नंबर 9406575355 वाॅट्सऐप पर कर सकते हैं।

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