जबलपुर में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल:नीट, पीजी काउंसलिंग न होने से नाराजगी, साल में चौथी बार हड़ताल पर जूडा

जबलपुरएक वर्ष पहले
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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डाॅक्टरों की हड़ताल। - Dainik Bhaskar
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डाॅक्टरों की हड़ताल।

नेताजी सुभाष चंद बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में आज सोमवार 29 नवंबर को जूनियर डॉक्टर (जूडा) हड़ताल पर रहेंगे। ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर में सेवाएं नहीं देंगे। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं में जूडा काम करता रहेगा। ये हड़ताल नीट पीजी काउंसलिंग में हो रही देरी के विरोध में की जा रही है।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन अध्यक्ष डॉक्टर पंकज सिंह के मुताबिक समय पर नीट पीजी काउंसलिंग न होने से पीजी छात्रों की कमी हो रही है। इन हालात के विरोध में पूरे देश में जूनियर डॉक्टरों की तमाम संस्थाएं हड़ताल पर हैं। इसी के समर्थन में जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के जूडा आज दोपहर तक हड़ताल पर रहेंगे। चेतावनी दी कि एक दिन की हड़ताल के बाद भी भारत सरकार ने मांग नहीं मानी तो आगे और भी उग्र आंदोलन होगा।

आंदोलन की ये है वजह

एमडी एमएस का सत्र हर साल एक जून से शुरू होता है। इस साल कोरोना की वजह से पहले तो परीक्षा में देरी हुई। इसके बाद अब काउंसलिंग में देरी से दाखले नहीं हो पा रहे हैं। आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। जूडा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चार हफ्ते में जवाब पेश करने को कहा है। जूनियर डॉक्टर की मांग है कि सरकार जल्द जवाब दें, जिससे मामले का निराकरण होकर काउंसलिंग शुरू हो सके।

1800 जूडा में सिर्फ 500 जूनियर डॉक्टर काम कर रहे

जूडा का कहना है कि काउंसलिंग में देरी से एक तो दाखिला लेने वाले बैच का सत्र देर होगा। दूसरी बात यह कि प्रथम वर्ष के जूनियर डॉक्टर नहीं होने से द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों पर दबाव बढ़ा है। तृतीय वर्ष के छात्र थीसिस तैयार करने में लगे हैं, ऐसे में प्रदेश में तीनों साल के मिलाकर 1800 जूनियर डॉक्टरों की जगह सिर्फ द्वितीय वर्ष के 500 जूनियर डॉक्टर काम कर रहे हैं।

मरीजों को नहीं होने पाएगी दिक्कत

डीन डॉक्टर प्रदीप कसार के मुताबिक जूडा के आंदोलन की वजह से काम प्रभावित नहीं होगा। हमारे पास पर्याप्त फैकल्टी और रेसीडेंट डॉक्टर्स हैं। ऑपरेशन भी नहीं टाले गए हैं। दोपहर बाद जूडा की हड़ताल वैसे भी समाप्त हो जाएगी।

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