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1 हजार साल पहले 1 जनवरी को मनाई जाती थी:मकर संक्रांति कल, हर 72 साल में तारीख 1 दिन बढ़ जाती है

जबलपुर5 दिन पहले
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  • 5 हजार साल बाद फरवरी के अंत में मनाया जाएगा यह पर्व

मकर संक्रांति एक ऋतु पर्व है। यह दो ऋतुओं का संधिकाल है। यह त्योहार शीत ऋतु के खत्म होने और वसंत ऋतु के शुरूआत की सूचना देता है। पिछले कुछ सालों से मकर संक्रांति का पर्व कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति कल यानी 14 जनवरी को पड़ रही है।

इसलिए 14 जनवरी को सूर्योदय के साथ स्नान, दान और पूजा-पाठ के साथ यह त्योहार मनेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश हर साल 20 मिनट की देरी से होता है। इसलिए सूर्य की चाल के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 5000 साल बाद मकर संक्रांति फरवरी महीने के अंत में मनाई जाएगी।

2077 में आखिरी बार 14 जनवरी को पड़ेगी मकर संक्रांति

माना जाता है कि आज से 1000 साल पहले मकर संक्रांति 1 जनवरी को मनाई जाती थी। ज्योतिषाचार्य पं. आनंद शुक्ला के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति पहली बार 1902 में मनाई गई थी। इससे पहले 18वीं सदी में 12 और 13 जनवरी को मनाई जाती थी। वहीं 1964 में मकर संक्रांति पहली बार 15 जनवरी को मनाई गई थी।

इसके बाद हर तीसरे साल अधिकमास होने से दूसरे और तीसरे साल 14 जनवरी को, चौथे साल 15 जनवरी को मनाई जाने लगी। इस तरह 2077 में आखिरी बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।

ज्योतिषीय आकलन के अनुसार सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश करने को मकर संक्रांति कहा जाता है। हर तीन साल के बाद सूर्य एक घंटे बाद और हर 72 साल में एक दिन की देरी से मकर राशि में प्रवेश करता है। पं. वासुदेव शास्त्री के अनुसार दोपहर 2:44 बजे से रात्री 10:44 तक विशेष पुण्यलाभ रहेगा।

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