• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Jabalpur
  • Poor Companies Are Neither Able To Buy Coal Nor Electricity From Outside, Cuts Started In MP With Surplus Power

MP में बिजली का मिस मैनेजमेंट:कंगाल कंपनियां न कोयला खरीद पा रहीं और न ही बाहर से बिजली; सरप्लस बिजली वाले प्रदेश में शुरू हो गई कटौती

जबलपुर10 महीने पहले

बिजली कंपनी के बिगड़े मैनेजमेंट का दुष्परिणाम उपभोक्ता को झेलना पड़ रहा है। आलम ये है कि बारिश न होने से सूख रहे खेतों की सिंचाई के लिए न तो गांवों में बिजली मिल पा रही है और न ही उमस भरी रात में चैन की नींद ले पा रहे हैं। शहर और तहसील मुख्यालयों पर तो बिजली मिल रही है, लेकिन गांवों में हालत बहुत खराब हैं। कंगाल कंपनियां न तो कोयला खरीद पा रही हैं और न ही मार्केट से बिजली खरीद पा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मुश्किल से टुकड़ों में 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।

मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि बिजली कटौती की सूचना आम लोगों का अधिकार है। ये कंपनियों की जवाबदारी भी है। बिजली मामलों के जानकार अधिवक्ता एके अग्रवाल के मुताबिक कंपनियां घोषित कटौती की बजाए तकनीकी फॉल्ट का हवाला देकर बिजली कटौती कर रही हैं। जबलपुर के जुगपुरा निवासी नारायण सिंह के मुताबिक पिछले एक सप्ताह से बिजली मुश्किल से 7-8 घंटे ही मिल पा रही है। खैरी निवासी गजेंद्र सिंह के मुताबिक 25 दिनों से ट्रांसफॉर्मर खराब है, लेकिन कोई बदलने वाला नहीं है।

उमरिया निवासी मुकेश विश्वकर्मा के मुताबिक बारिश न होने से खेत सूख रहे हैं। न तो खेतों को पानी मिल पा रही है और न ही उमस के चलते रात में चैन की नींद ले पा रहे हैं। पूरी रात बिजली की आंख मिचौली जारी है। इंद्राना निवासी उमेश यादव के मुताबिक टुकड़ों में 12 घंटे बिजली मिल रही है। पौंडा निवासी काशीराम बाथरे के अनुसार उनके यहां 18 घंटे बिजली मिल पा रही है।

सरकार ने स्वीकारा MP में बिजली संकट:गृह मंत्री बोले- कम बारिश और कोयले की सप्लाई प्रभावित होने से आई दिक्कत; 5 दिन में सब ठीक हो जाएगा

गांवों में लौटा ढिबरी युग।
गांवों में लौटा ढिबरी युग।

इस कारण संकट गहराया
प्रदेश सरकार का दावा है कि जनरेटिंग कंपनियों सहित अनुबंध और सेंट्रल कोटा मिलाकर उसके पास 22 हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता है, लेकिन 10 हजार मेगावाट बिजली सप्लाई करने में ही हालत खराब है। मप्र पावर जनरेशन कंपनी की ताप विद्युत इकाइयों की कुल क्षमता लगभग 5400 मेगावाट है। वर्तमान में कोयले की कमी, वार्षिक मेंटेनेंस के चलते महज 1700 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। लगभग इतनी ही बिजली जल विद्युत संयंत्रों, विंड और सोलर से मिल पा रही है। शेष बिजली सेंट्रल कोटा से लेना पड़ रही है।

1,000 से 1,500 मेगावाट का आ रहा अंतर
पिछले एक सप्ताह से मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी करीब 3500 मेगावाट ही उत्पादन कर पा रही है। सेंट्रल कोटा से 5500 से 6000 मेगावाट बिजली ले रहे हैं। जबकि प्रदेश में पिछले दिनों बिजली की डिमांड 10,333 तक हो गई है। एक से 1,500 मेगावाट के अंतर को दूर करने के लिए ग्रामीणों के हक की बिजली काटी जा रही है। प्रदेश में इस समय विंड से 1,500 से 1,700 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, लेकिन हवा विपरीत होने से ये उत्पादन भी घटकर 150 मेगावाट पर आ गया था।

1,500 करोड़ से अधिक का बकाया
मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी के कोयले आधारित ताप विद्युत संयंत्रों को (WCL) वेस्टर्न कोल लिमिटेड, साउथ-ईस्टर्न कोल लिमिटेड और (SECL) नार्दन कोल लिमिटेड (NCL) से कोयला लेता है। वर्तमान में जनरेटिंग कंपनी पर तीनों कोल कंपनियों का 1500 करोड़ से अधिक का बकाया है। जनरेटिंग कंपनी को विद्युत वितरण कंपनियां और पावर मैनेजमेंट कंपनियों से 2,500 करोड़ रुपए लेने हैं। विद्युत वितरण कंपनियों को सरकार से सब्सिडी के 8000 करोड़ रुपए लेने हैं। सरकार के स्तर पर भुगतान न होने से ये संकट बना हुआ है।

अघोषित बिजली कटौती पर 'अपनों' से घिरी सरकार:BJP विधायक राकेश गिरि का CM को पत्र; कहा- 12 से 15 घंटे बिजली बंद होने से किसान परेशान, कांग्रेस बड़े आंदोलन में जुटी

जबलपुर लोड डिस्पेच सेंटर से रखी जाती है मांग और आपूर्ति पर नजर।
जबलपुर लोड डिस्पेच सेंटर से रखी जाती है मांग और आपूर्ति पर नजर।

NLDC ने लगाया 5 करोड़ का जुर्माना
27 अगस्त को सेंट्रल कोटा से लगभग 1700 मेगावाट ज्यादा बिजली लेने पर एमपी पावर जनरेटिंग कंपनी पर नेशलन लोड डिस्पेच सेंटर (NLDC) ने पांच करोड़ का जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना ग्रिड अनुशासन तोड़ने पर लगाया गया है। ग्रिड अनुशासन के मुताबिक न तो कोई राज्य शेड्यूल के अनुसार बिजली ओवर ड्रा कर सकते हैं और न ही अंडर ड्रा कर सकते हैं। ऐसा करने पर ग्रिड फेल होने का खतरा रहता है। ग्रिड अनुशासन तोड़ने पर सख्त जुर्माने का प्रावधान किया गया है। एमपी वेस्टर्न लोड डिस्पेच सेंटर के अंतर्गत आता है। इसमें एमपी सहित महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, छत्तीसगढ़ और दो केंद्र शासित प्रदेश दमन द्वीप व दादर नागर हवेली आते हैं।

16 बिजली इकाइयों में से 9 बंद
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के कुल चार बिजली घर सिंगाजी पावर प्लांट खंडवा, सतपुड़ा ताप विद्युत सारनी, संजय गांधी पावर प्लांट बिरसिंहपुर और अमरकंटक ताप गृह चचाई में कुल 16 इकाई हैं। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 5400 मेगावाट है। वर्तमान में कोयले की कमी और वार्षिक मेंटेनेंस के चलते 2,990 मेगावाट क्षमता की 9 इकाइयों से उत्पादन बंद है। 1500 मेगावाट के लगभग ही उत्पादन हो पा रहा है। कोल शार्टेज की वजह से श्रीसिंगाजी पावर प्लांट की दो नंबर की इकाई बंद चल रही है। श्रीसिंगाजी की 600 मेगावाट की दो नंबर की इकाई कोयले की कमी और एक नंबर की इकाई वार्षिक मेंटेनेंस के चलते बंद हैं। बिरसिंहपुर की दो और पांच और सतपुड़ा सारनी की 11 नंबर की ईकाई भी बंद है। सतपुड़ा की 6, 7, 8 व 9 नंबर इकाई लंबे समय से बंद है।

बिजली घरों में इतने दिन का बचा है कोयला

  • अमरकंटक में 200 मेगावाट के संयंत्र को चलाने के लिए रोज 3.12 हजार टन की जरूरत है। यहां 14 दिन का स्टॉक बचा है।
  • श्री सिंगाजी में 2520 मेगावाट के संयंत्र के लिए 25 दिन का स्टॉक होना चाहिए। यहां रोज 12.71 हजार टन कोयले की जरूरत है। महज 4 दिन की कोयला बचा है।
  • सतपुड़ा में 1330 मेगावाट के संयंत्रों के लिए 20 दिन का स्टॉक होना चाहिए। यहां 12.71 हजार टन कोयले की जरूरत है। यहां 9 दिन का कोयला बचा है।
  • संजय गांधी में 1340 मेगावाट के संयंत्रों के लिए 20 दिन का स्टॉक होना चाहिए। यहां 12.71 हजार टन कोयले की रोज खपता है। यहां 9 दिन का ही कोयल बचा है।
बेलखेड़ा के खैरी गांव में 25 दिन से खराब ट्रांसफर नहीं बदला जा सका।
बेलखेड़ा के खैरी गांव में 25 दिन से खराब ट्रांसफर नहीं बदला जा सका।

आगे रबी सीजन में और बड़ा संकट
बिजली मामले के जानकार एके अग्रवाल के मुताबिक अभी से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती शुरू हो गई है। एमपी के कई हिस्सों में बारिश नहीं होने से प्रमुख बांध नहीं भर पाए हैं। इसकी वजह से अभी से नहरों से सप्लाई की जा रही है। कोयले संकट और वित्तीय प्रबंधन न होने से जल संयंत्रों से बिजली बनाई जा रही है। यह रबी सीजन में बड़ा संकट बन सकता है। एमपी में बिजली की सबसे अधिक डिमांड 17,000 मेगावाट के लगभग रबी सीजन में पहुंचने का अनुमान है। तब पेयजल संकट के साथ ही नहरों में पानी छोड़ने में भी परेशानी आएगी। उस समय जरूरत के अनुसार बिजली की उपलब्धता के अनुसार जल संयंत्रों से बिजली भी नहीं बना पाएंगे।

खबरें और भी हैं...