हाईकोर्ट का अहम फैसला:विवाहित पुत्री को भी अनुकम्पा नियुक्ति पाने का है अधिकार

जबलपुर9 महीने पहले
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  • हाईकोर्ट ने निरस्त किया अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अयोग्य करार दिए जाने का आदेश

मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि विवाहित पुत्री को भी अनुकम्पा नियुक्ति पाने का हक है। हाईकोर्ट की फुल बैंच ने भी मीनाक्षी दुबे मामले में न्याय दृष्टांत दिया है कि विवाहित पुत्री को भी अनुकम्पा नियुक्ति पाने का अधिकार है। इस आधार पर एकलपीठ ने पुलिस मुख्यालय द्वारा विवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अयोग्य करार दिए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। ये है मामला-यह याचिका प्रोफेसर कॉलोनी सुहागी अधारताल जबलपुर निवासी प्रीति सिंह ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि वह दो विवाहित बहनें हैं। उनकी माँ मोहनी सिंह सतना के कोलगवाँ थाने में एएसआई के पद पर कार्यरत थीं। ड्यूटी पर जाते समय 23 अक्टूबर 2014 को उनकी माँ की बस दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

माँ की मृत्यु के बाद उसने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया, लेकिन पुलिस मुख्यालय ने उसका आवेदन अमान्य कर दिया। 22 जनवरी 2015 को जारी आदेश में कहा गया कि अनुकम्पा नियुक्ति नीति के पैरा 2.4 में कहा गया है कि विवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती है।
समानता के अधिकार का उल्लंघन
याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 14 में भारत के हर नागरिक को समानता का अधिकार दिया गया है। किसी भी नागरिक के साथ लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडे ने तर्क दिया कि मप्र हाईकोर्ट की फुल बैंच ने भी मीनाक्षी दुबे मामले में न्याय दृष्टांत दिया है कि विवाहित पुत्री को भी अनुकम्पा नियुक्ति पाने का अधिकार है। इसके बाद भी पुलिस मुख्यालय द्वारा याचिकाकर्ता के अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन को निरस्त कर दिया गया। एकलपीठ ने विवाहित पुत्री को अनुकम्पा नियुक्ति के अयोग्य बताने वाले आदेश को निरस्त कर दिया है।
सेवानिवृत्त एएसआई से वसूले गए 2.08 लाख रुपए वापस करने पर 60 दिन में करो निर्णय

हाईकोर्ट ने किया याचिका का निराकरण
मप्र हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि शिवकुमार सिंह मामले में पारित निर्णय की रोशनी में सेवानिवृत्त एएसआई से वसूले गए 2.08 लाख रुपए वापस करने पर 60 दिन में निर्णय किया जाए। जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने इस निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया है। हाईकोर्ट ने शिवकुमार सिंह मामले में निर्णय दिया है कि सेवा के दौरान विभागीय त्रुटि से वेतन में हुए अधिक भुगतान की वसूली सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से नहीं की जा सकती है।

सिहोरा निवासी गणेश कुमार पांडे की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह कटनी पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एएसआई के पद पर कार्यरत थे। 30 जून 2020 को वह एएसआई के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जिला पेंशन अधिकारी कटनी ने जानकारी दी कि सेवाकाल के दौरान उसे वेतन में 68 हजार 12 रुपए का अधिक भुगतान किया गया है।

इसके बाद उसे ब्याज सहित 2 लाख 8 हजार 797 रुपए वसूली का नोटिस दिया गया और उसके सेवानिवृत्ति लाभों से रकम की वसूली कर ली गई। अधिवक्ता सचिन पांडे ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने शिवकुमार सिंह मामले में अभिनिर्धारित किया है कि विभागीय त्रुटि से वेतन में हुए अधिक भुगतान की वसूली सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से नहीं की जा सकती है। सुनवाई के उपरांत एकलपीठ ने पुलिस विभाग को शिवकुमार सिंह मामले की रोशनी में प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

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