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MP की पहली ब्रेन बाइपास सर्जरी जबलपुर में:8 घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन, सुपर स्पेशलिटी न्यूरो सर्जन डॉक्टर्स ने पैर की नस को ब्रेन में खून की नस में जोड़ा

जबलपुर2 महीने पहले
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जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग में प्रदेश की पहली ब्रेन बाइपास सर्जरी की गई। ग्वालियर की 35 साल की महिला के पैर से खून की नस को निकाल कर गर्दन की बड़ी खून की नस से जोड़ा गया। ब्रेन के खून की नस से जोड़ कर ब्लड संचार का नया रास्ता बनाया गया। महिला की हालत अब ठीक बताई जा रही है। एक-दो दिन में उसे छुट्‌टी मिल जाएगी।

डायरेक्टर डॉ. वाय आर यादव के मुताबिक ग्वालियर की रहने वाली महिला को सिर दर्द और ब्रेन हेमरज होने पर वहां के डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराया था। इससे पता चला कि ब्रेन की बायीं ओर की मुख्य नस (इंटर्नल करोटिड धमनी) में बड़ा गुब्बारा जिसे जॉइंट ऐन्यरिजम कहते हैं, बन गया है। इसके फटने से मरीज को ब्रेन हेमरेज के कारण जान को खतरा था। वहां के डॉक्टराें ने उसे दिल्ली एम्स ले जाने की सलाह दी थी। महिला के कुछ रिश्तेदार जबलपुर में रहते हैं। जिन्होंने सुपर स्पेशलिटी में दिखाने के लिए महिला को बुलाया।

इस टीम ने जटिल ऑपरेशन किया।
इस टीम ने जटिल ऑपरेशन किया।

ब्रेन की एंजियोग्राफी की गई
यहां सुपर स्पेशलिटी के न्यूरो सर्जरी विभाग में महिला के ब्रेन की एंजियोग्राफी की गई। इससे उसकी बीमारी के बारे में पता चला। इसके बाद वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉक्टर वाय आर यादव की अगुवाई में न्यूरो सर्जन, इंटर्वेन्शन न्यूरो विज्ञान और न्यूरो निश्चेतना एक्सपर्ट की टीम ने ईसी-आईसीआई फ्लो बाइपास करने का फैसला लिया।

इस तरह हुआ ये जटिल ऑपरेशन
ऑपरेशन में सामान्यतः हार्ट बाइपास में इस्तेमाल की जाने वाली पैर की खून की शिरा (ग्रेट सेफनस वेन) को वैस्क्युलर सर्जन की मदद से निकाला गया। फिर इसे न्यूरो सर्जरी टीम ने गर्दन की बायीं तरफ की बड़ी खून की नस ( एक्स्टर्नल करोटिड धमनी) से लेकर ब्रेन की नस (मिडल सेरब्रल धमनी) से बारीक टांकों से एडवांस माइक्रोस्कोप की मदद से ग्राफ्ट किया। इसे हाई फ्लो ईसी-आईसी बाइपास ऑपरेशन कहा जाता है। इसके साथ ही मरीज के ब्रेन की खून की नस के बड़े गुब्बारे जॉइंट ऐन्यरिजम को बंद किया गया।

ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज की फिर से एंजियोग्राफी हुई
ऑपरेशन के बाद अत्याधुनिक माइक्रोस्कोप की सुविधा से ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज की दोबारा एंजियोग्राफी कर नए बनाए रास्ते में खून के संचार को जांचा गया। न्यूरो सर्जन डॉक्टर वाय. आर. यादव ने बताया कि इस तरह के ऑपरेशन हाइअर इंस्टीट्यूट जैसे दिल्ली एम्स आदि में ही होते हैं। एमपी में सम्भवतः यह पहला ऑपरेशन है, जिसे आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क किया गया है। मरीज के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।

(मेडिकल एथिक्स के कारण मरीज का नाम नहीं दिया गया)

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