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  • The Story Of Rajinikanth Yadav's Struggles From A Renowned Cinematographer To A Solar Man And Writer Is Wonderful.

नर्मदा का पथिक, अनंत यात्रा पर:प्रख्यात छायाकार से सोलर मैन और लेखक बनने की अद्भुत है रजनीकांत यादव के संघर्षों की कहानी

जबलपुर23 दिन पहले
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रजनीकांत यादव। - Dainik Bhaskar
रजनीकांत यादव।

नर्मदा का पथिक अपने अनंत यात्रा पर 6 जुलाई मंगलवार को रवाना हो गया। सोलर मैन के नाम से आदिवासियों में प्रसिद्ध रजनीकांत यादव (78) अब नहीं रहे। छायाकार के तौर पर नर्मदा बचाओ आंदोलन ने उन्हें नई पहचान दी तो "नर्मदा की नई कथा' ने साहित्यकारों की जमात में ला खड़ा किया। आदिवासियों से उनका लगाव ही था कि उनके छायाचित्र छत्तीसगढ शासन के कला एवं संस्कृति विभाग ने स्थाई वीथिका में संजोकर रखे हैं।

जबलपुर के आमनपुर निवासी रंजनीकांत यादव ने आठ साल पहले बिना किसी सरकारी मदद के जबलपुर के आसपास सात आदिवासी और विस्थापन के दर्द झेल रहे गांवों में सोलर की बिजली पहुंचाई थी। सोलर लाइट में उनकी ऐसी गहरी रुचि और महारत थी कि उन्होंने कई प्रयोग कर डाले। उनका पूरा घर सोलर लाइट से ही जगमग है। आदिवासी ग्रामीणों को सोलर लाइट ठीक करने ओर लगाने का प्रशिक्षण भी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया था।
48 वर्षों से फोटोग्राफी से जुड़े थे रंजनीकांत
रजनीकांत यादव 48 वर्षों से फोटोग्राफी से जुड़े हुए थे। वे मानते थे कि कोई भी विधा व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं होती। वे 26 वर्षों से आदिवासी और ग्रामीण भारत की फोटोग्राफी कर रहे थे। जब वे इन क्षेत्रों में फोटोग्राफी करने गए, तब उन्हें इस बात का आभास हुआ कि निर्धन और मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग कितनी भयावह जिंदगी जी रहे हैं। इसके बाद उन्होंने हमेशा अपने छायाचित्रों के माध्यम से आदिवासियों और ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं को आम लोगों के सामने लाकर उसके समाधान के प्रयास में जुटे रहे।

नर्मदा परिक्रमा और नर्मदा घाटी के जीवन का जीवंत वृतांत है इस किताब में।
नर्मदा परिक्रमा और नर्मदा घाटी के जीवन का जीवंत वृतांत है इस किताब में।

नर्मदाघाटी के जीवन को किताब में पिरो दिया
रजनीकांत ने जीवन में नर्मदा की कई बार परिक्रमा की। उनके घुटने तक खराब हो गए। यात्रा वृतांत और नर्मदाघाटी के जीवन को उन्होंने शब्दों के माध्यम से किताब में पिरो दिए। कैमरे के साथ उनकी कलम भी अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई। नर्मदा बचाओ आंदोलन में कैमरे के साथ उनकी भूमिका ने अंतर्राष्ट्रीय फलक पर पहचान बनाई।
नर्मदा घाटी की अविकृत रूप को चित्र प्रदर्शनी से दिखाया
रजनीकांत यादव ने नर्मदा चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से नर्मदा घाटी की उस अविकृत रूप की झलक प्रस्तुत की थी 'जो था, जो है और जो नहीं रहेगा'। उन्होंने नर्मदा का गुणगान या लच्छेदार भाषा में लिखा गया चित्रित वृतांत प्रस्तुत नहीं किया था। पर उनके छायाचित्र में उस डूबती और खत्म होती दुनिया के छवि चित्र थे, जो हमें जीवन सहज और इस धरती पर सबसे अनुकूल जीवन का गुणसूत्र समझाती है।
खिलाफत को सच्चाई और सौंदर्य में बदला था
विकास को लेकर उनकी अवधारणा अलग थी। उनकी नजर में हम जिस इमारतों, बाजारों, मशीनों के विप्लव, हाईटेक जिंदगी को विकास मानते हैं, उसे वह विनाशकारी बताते थे। कहते थे कि संसार के महान्‌ आदिवासियों, जन जातियों को मौत के कंसों ने निगल लिया है, हम उसके खिलाफ हैं। रजनीकांत ने इसी खिलाफत को सच्चाई और सौंदर्य में बदला था। वास्तविक सौंदर्य हमारी नैसर्गिकता में है। रजनीकांत का कैमरा, रजनीकांत की कलम विकास के असहमत मार्गों पर जीवन पर्यंत चलती रही।
दैनिक भास्कर से लेकर कई समाचारों में प्रकाशित हुए उनके फोटो फीचर
रजनीकांत यादव के फोटो फीचर दैनिक भास्कर से लेकर द हिंदु, टाइम्स आफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, एशियन एज, हिंदुस्तान टाइम्स, जनसत्ता, नवभारत, मिड-डे, बासुमति, आजकल, जन्मभूमि, अमृत बाजार पत्रिका, डाउन टू अर्थ, द इकोलॉजिस्ट, ह्‌यूमन स्पेस, सेंचुरी एशिया, संडे, इंडिया टुडे, एकलव्य पब्लिकेशन, पहल और कादम्बिनी जैसे समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो कर खूब सराहे गए हैं।
एकल प्रदर्शनी- उनकी एकल प्रदर्शनी इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, सी. एस. इ., गांधी पीस फाउंडेशन (नई दिल्ली), बिरला एकेडमी आफ आट्‌र्स (कोलकाता), बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री आफ सोसायटी, नेशन सेंटर फार परफार्मिंग आट्‌र्स-एनसीपीए, टाटा इंस्टीट्‌यूट आफ फार सोशल साइंस-टीआईएसएस (मुंबई), म्यूजियम आफ मेनकाइंड-आईजीआरएमएस, रवीन्द्र भवन (भोपाल) में आयोजित हुई थी।
जीवन में मिला कई सम्मान
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश की स्थापना की प्रथम वर्षगांठ पर रायपुर में रजनीकांत यादव की आदिवासी संस्कृति पर आधारित फोटो प्रदर्शनी आयोजित हुई। इन छायाचित्रों को छत्तीसगढ शासन के कला एवं संस्कृति विभाग ने स्थाई वीथिका में संजोकर आज भी रखा है। फोर्ड फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित घुमंतू प्रदर्शनी ''मोबाइल एक्जीबिशन-ब्लैक एंड वाइट-ए कलेक्शन आफ रिप्रेजेन्टेटिव पिक्चर्स आफ 40 लेंस मेन एंड वूमेन फार्म अराउंड द ग्लोब'' में चयनित हुआ था। वे सर्वश्रेष्ठ छायाकार सम्मान से भी अलंकृत हो चुके थे।
रजनीकांत के निधन से बरगी विस्थापित मर्माहत
प्रसिद्ध छायाकार एवं लेखक रजनीकांत यादव के निधन पर बरगी बांध विस्थापित भी मर्माहत है। 90 के दशक में जब बरगी विस्थापितों के पुनर्वास का संघर्ष चल रहा था तब बस स्टैंड के पास का आकार स्टूडियो उनके संघर्षों का बैठक केंद्र हुआ करता था। बरगी विस्थापितों की दुर्दशा पर फोटो प्रदर्शनी तैयार कर शहर के लोगों को जागृत किया। विस्थापन की त्रासदी जैसी पुस्तक लिखकर उनके दर्द को आमजन से साझा किया था। नर्मदा की नई कथा तो नर्मदा को अलग ढंग से रेखांकित किया है। बरगी डूब का आदिवासी गांव खामखेड़ा, को बिजली नहीं होने पर सोलर लाइट से प्रकाशित कर दिया था।

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