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MP की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में प्राकृतिक खेती पर रिसर्च:JNKVV के स्टूडेंट्स फसल से ही खाद बनाकर पौधों को दे रहे, कम लागत में डबल फायदा

जबलपुर8 महीने पहले

जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में प्राकृतिक खेती का अनुसंधान शुरू कर दिया गया है। पीजी और पीएचडी के छात्र कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में सबसे सस्ते और कारगर तरीके से प्राकृतिक खेती पर रिसर्च शुरू कर दिया है। इससे किसानों को एक उन्नत तकनीक और विधि प्राकृतिक खेती की बताई जा सके। प्राकृतिक और जैविक खेती किसानों के लिए कैसे डबल इनकम का स्रोत बनेगा। भास्कर खेती-किसानी सीरीज-67 में आईए जानते हैं एक्सपर्ट डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन (कुलपति, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर) से…

JNKVV किसानों की लागत कम करने के लिए पहले से जैविक और प्राकृतिक खेती पर अनुसंधान शुरू कर चुका है। जहां हमारे पास जैविक के लिए 15 तरह के खाद, कीटनाशक और जैविक बीज उपलब्ध हैं। वहीं, प्राकृतिक खेती की उन्नति तकनीक खोजने पर रिसर्च शुरू कर दिया है। जैविक और प्राकृतिक खेती से ही किसानों की डबल आय संभव होगा।

प्राकृतिक खेती पर JNKVV में रिसर्च शुरू।
प्राकृतिक खेती पर JNKVV में रिसर्च शुरू।

पीजी और पीएचडी के छात्र कर रहे रिसर्च

जेएनकेवीवी के पीजी और पीएचडी के छात्र प्राकृतिक खेती पर रिसर्च कर रहे हैं। इसमें सरसो, गेहूं, चना और प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी गोबर व गौ-मूत्र के प्रदान को देखा। पिछले दो सालों से विवि प्राकृतिक खेती का अनुसंधान कर रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में ये रिसर्च सकारात्मक चल रहा है। प्राकृतिक खेती में उपज कम न हो, इस पर रिसर्च चल रहा है।

प्राकृतिक खेती की उन्नति तकनीक पर चल रहा प्रयोग।
प्राकृतिक खेती की उन्नति तकनीक पर चल रहा प्रयोग।

प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीक देंगे देश को

जेएनकेवीवी प्राकृतिक खेती की नई तकनीक खोजने में जुटा है। इस पर अलग-अलग रिसर्च चल रहा है। इसमें पौधों से लेकर गौ आधारित गोबर और गोमूत्र खेती का आधार होगा। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती से भी एक कदम आगे है। इसमें बाहर से कुछ भी नहीं लगाना पड़ता है। फसल के अपशिष्ट से ही खाद और खेत को उर्वरक बनाकर बेहतर उपज लेंगे। जल्द ही, विवि देश व प्रदेश के किसानों को प्राकृतिक खेती की नई तकनीक उपलब्ध कराएगा।