पटाखों के शोर में दबा NGT का आदेश:जबलपुर में दिवाली की रात पीएम 2.5 का हवा में स्तर 486 पर पहुंचा, AQI​​​​​​​ 247 हुआ

जबलपुर7 महीने पहले
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जबलपुर में पटाखों के चलते हाबो-हवा हुई प्रदूषित। - Dainik Bhaskar
जबलपुर में पटाखों के चलते हाबो-हवा हुई प्रदूषित।

जबलपुर में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के, दो घंटे ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति संबंधी निर्देश हवा में उड़ा दिए गए। शाम से शुरू हुआ पटाखों का शोर देर रात जारी रहा। बारूद के कणों ने शहर की आबो-हवा को खतरनाक स्तर तक प्रदूषित कर दिया। हवा में पीएम-2.5 के कण 486 तो पीएम-10 के कण भी 449 प्रति घनमीटर तक घुल गए, जो हवा के साथ शरीर में प्रवेश करता रहा।

नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़ों के अनुसार जबलपुर में दिवाली की रात से लेकर सुबह 9 बजे तक प्रदूषण का स्तर सबसे खतरनाक रहा। दिवाली की शाम 6 बजे से 5 नवंबर शुक्रवार की सुबह 9 बजे तक जबलपुर की हवा प्रदूषित हो गई थी। शहर में मढ़ाताल में स्थापित वायु प्रदूषण मॉनिटर सिस्टम में हर सेकेंड का डाटा अपडेट होता रहता है।

एनजीटी के ग्रीन पटाखों को लेकर जारी आदेश हुआ हवा।
एनजीटी के ग्रीन पटाखों को लेकर जारी आदेश हुआ हवा।

रात तीन बजे सबसे अधिक वायु प्रदूषण

नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक जबलपुर में रात 3 बजे से सबसे अधिक हवा प्रदूषित रही। इसी समय हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 खतरनाक स्तर तक पहुंचा था। दरअसल, रात 10 बजे से पटाखों का शोर एकदम से बढ़ गया था। पटाखों पर रोक लगाने के लिए शहर में कोई सिस्टम नहीं बना था।

शहर की सड़कों पर पटाखाें के कागज के टुकड़े फैले थे। शाम छह बजे तक पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर हवा में प्रति घन मीटर 70 के लगभग था, जो रात नौ बजे बढ़कर 352, रात 12 बजे 457 और देर रात तीन बजे 486 पर पहुंच गया था। शहर का एक्यूआई 247 पर रहा।

वायु की गुणवत्ता का ये है सूचकांक

  • अच्छा-0 से 50 AQI
  • कम अच्छा-51 से 100 AQI
  • मध्यम-101 से 200 AQI
  • खराब-201 से 300 AQI
  • बहुत खराब-301 से 400 AQI
  • हानिकारक-401 से 500 AQI
जबलपुर में देर रात तक चला पटाखों का शोर।
जबलपुर में देर रात तक चला पटाखों का शोर।
दिवाली की रात जबलपुर में ये रही हवा की गुणवत्ता
श्रेणी04 नवंबर03 नवंबर30 अक्टूबर
AOI247130190
PM 2.5486242328
PM 10449192477
NO2142113142
NH3080705
SO2961515
CO129110151
ओजोन141129147

एक दिन पहले एक्यूआई 129 था

जबलपुर में 3 नवंबर को एक्यूआई 129 तो एक सप्ताह पहले 190 था। दरअसल हवा में प्रदूषण के लिए 8 तत्व जिम्मेदार होते हैं। हवा में इनके बढ़ने-घटने से प्रदूषण और स्वच्छ हवा का पता चलता है।

  • PM 2.5- वायु में मिले धूल के कण 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। ये आसानी से सांस के साथ शरीर के अंदर प्रवेश कर गले में खराश, फेफड़ों को नुकसान, जकड़न पैदा करते हैं। इन्हें एम्बियंट फाइन डस्ट सैंपलर पीएम-2.5 से मापते हैं।
  • PM 10- रिसपाइरेबल पार्टिकुलेट मैटर का आकार 10 माइक्रोमीटर से कम होता है। ये भी शरीर के अंदर पहुंचकर बहुत सारी बीमारियां फैलाते हैं।
  • SO2 (सल्फर डाइऑक्साइड)-हवा में अधिकता होने पर आंखों में जलन, सांस फूलने आदि की परेशानी होती है।
  • O3 (ओज़ोन)- छाती में दर्द, खांसी, गले में जलन और सांस की नली में सूजन आदि हो सकता है। साथ ही दिली को प्रभावित करने वाली कार्डियोवैस्कुलर बीमारी हो सकती है।
  • CO (कार्बन मोनोऑक्साइड)- सिर दर्द, सांस लेने में दिक्कत, घबराहट, मितली आना, सोचने की क्षमता पर असर, हाथों और आंखों का कोऑर्डिनेशन गड़बड़ होना, पेट में तकलीफ व उलटी, हार्ट रेट बढ़ना, शरीर का तापमान कम होना, लो ब्लड प्रेशर, काडिर्एक एवं रेस्पिरेटरी फेलियर आदि की समस्या हो सकती है।
  • NH3 (अमोनिया)- आंख में आंसू आ जाता है। अधिक मात्रा से घुटन महसूस होता है। कभी-कभी दम घुटने से जान भी जा सकती है।
  • NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड)-हृदय और सांस संबंधी बीमारी हो सकती है। इसकी मात्रा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
  • Pb (सीसा)- दिमाग, दिल, फेफड़ों और गुर्दे पर असर डालता है। बच्चों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है।

एक सप्ताह तक होगी माॅनिटरिंग

केन्द्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दीवाली के पूर्व और दीपावली के 7 दिन बाद तक परिवेशीय वायु की मॉनिटरिंग के निर्देश एनजीटी ने दी थी। इसमें नियमित पैरामीटर के साथ प्रदूषकों जैसे- एल्यूमीनियम, बेरियम, आयरन का विश्लेषण मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सभी प्रयोगशालाओं द्वारा किया जाएगा। इसके आधार पर संबंधित जिले के कलेक्टर की तय की गई जवाबदारी को लेकर एनजीटी सवाल-जवाब कर सकती है।