उपभोक्ताओं के हितों से कुठाराघात:सारे बिल जमा कर लिए अब जवाब भी नहीं दे रही मैक्स बूपा

जबलपुर3 महीने पहले
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  • पीड़ित ने कहा- मानसिक रूप से भी परेशान कर रही बीमा कंपनी

लोग इस उम्मीद से बीमा कराते हैं कि संकट के समय उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा, लेकिन कई बीमा कंपनियाँ नियम व शर्तों का उल्लंघन करते हुए उपभोक्ताओं के हितों से कुठाराघात कर रही हैं। इसके उदाहरण भी लगातार सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में कुछ बीमितों ने आरोप लगाया है कि मैक्स बूमा कंपनी सारे दस्तोवेज जमा करने के बाद भी क्लेम का भुगतान नहीं कर रही है। इससे उन्हें आर्थिक के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ रही है।

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इस तरह की समस्या यदि आपके साथ भी है तो आप दैनिक भास्कर, जबलपुर के मोबाइल नंबर - 9425324184, 9425357204 पर बात करके प्रमाण सहित अपनी बात रख सकते हैं। संकट की इस घड़ी में भास्कर द्वारा आपकी आवाज को खबर के माध्यम से उचित मंच तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

केस.1 टोल फ्री नंबर पर कह रहे, हमारे पास आपकी पॉलिसी की जानकारी नहीं
कटनी मदन मोहन चौबे वार्ड दुर्गा मंदिर स्थित निवासी अरुण विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने मैक्स बूपा कंपनी से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। मैक्स बूपा के एजेंट व कंपनी के जिम्मेदार लोगों ने कहा था कि अतिरिक्त प्रीमियम देने के बाद पहले दिन से ही हमारी कंपनी सारे लाभ शुरू कर देती है, जबकि उन्हें बताया गया था कि हमारे पिता जिया लाल विश्वकर्मा शुगर के मरीज हैं। सारी जानकारी लेने के बाद ही बीमा कंपनी से पॉलिसी हमारे द्वारा कराई गई थी। पॉलिसी लेने के कुछ माह बाद अचानक पिता की तबियत खराब होने पर कटनी के निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराना पड़ा था। वहाँ से नागपुर ले जाना पड़ा। नागपुर में इलाज चलता रहा और वहाँ पर बीमा कंपनी ने कैशलेस नहीं किया। अस्पताल का सारा भुगतान स्वयं जमा करने के बाद बीमा कंपनी में बिल सबमिट किए गए थे। बीमा कंपनी की टीम द्वारा अनेक क्वेरी निकाली गईं। क्वेरी निकालने के बाद बीमा कंपनी के सर्वे टीम अधिकारी ने कहा था कि जल्द ही आपको क्लेम मिल जाएगा। वे महीनों से क्लेम का इंतजार कर रहे हैं पर आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया।

बेखौफ होकर बीमित से की जा रही ठगी
बीमा कंपनियों का क्लेम डिपार्टमेंट हो या फिर सर्वेयर टीम किसी को भय नहीं है। वे सही को गलत व गलत को सही करके बीमित को क्लेम देने से बच रहे हैं। लंबे समय तक वे मामले को लंबित रखते हैं और उसके बाद नो क्लेम का लैटर भेज देते हैं। बीमित काफी परेशान हैं और न्याय की गुहार लगाने के लिए शिकायत लेकर वे विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीश मनीष ठाकुर (सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण) के समक्ष पहुँच रहे हैं।

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