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डिस्चार्ज करने का नया तरीका:अब मरीज 10 नहीं बल्कि 5 दिन में ही किए जा रहे डिस्चार्ज, कोविड गाइडलाइन की अनदेखी

जबलपुरएक महीने पहले
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  • हकीकत -इस तरीके से एक्टिव केस हो रहे कम, साथ में बढ़ रही डिस्चार्ज की संख्या
  • घर में जाकर सेहत बिगड़ी तो दोहरी मुसीबत, मौत हो जाए तो कोविड के रिकार्ड में भी दर्ज नहीं, जानकार हैरान

स्वास्थ्य विभाग की हेल्थ रिपोर्ट में सामने आने वाले मरीजों की संख्या, एक्टिव केस, डिस्चार्ज और मौत के आँकड़ों पर सवाल तो उठ ही रहे हैं अब अस्पतालों से डिस्चार्ज करने के तरीकों से भी लोग हैरान हैं। कोविड गाइडलाइन का नियम यही कहता है कि पेशेंट को कम से कम 10 दिन अस्पताल में भर्ती रहना चाहिए।

ब्लड रिपोर्ट, सीटी स्केन, लक्षण गायब होने के साथ बुखार उतरने के बाद रिपोर्ट निगेटिव हो तो डिस्चार्ज करना चाहिए। पर हो रहा है कि मरीज को थोड़ी सी राहत मिली और सीधे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है। अधिकतम 5 से 7 दिनों तक ही पेशेंट अब भर्ती रह पाता है। लोग यहाँ तक आरोप लगाते हैं कि डिस्चार्ज संख्या ज्यादा दिखाने और एक्टिव केस सीमित दायरे में रखने की कवायद के चलते इलाज के दौरान ही पीड़ित अस्पताल से रवाना कर दिया जा रहा है।

अस्पताल से जल्द छुट्टी मिलने पर या पूरा आराम न लगने पर घर में फिर हालत बिगड़ी तो दोबारा पलंग मिलना संभव ही नहीं है। इसी तरह सेहत में एकदम गिरावट के बाद पीड़ित ने दमतोड़ दिया तो ऐसी मौत भी कोविड में दर्ज नहीं हो सकती है। पेशेंट के डिस्चार्ज का मतलब यही माना जा रहा है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका है और अब उसको भर्ती रहकर इलाज की जरूरत नहीं है।

नया स्ट्रेन 17 दिनों तक इफेक्टिव

एक्सपर्ट का मानना है कि जो वायरस का नया स्ट्रेन है वह इस तरीके से आदमी को जकड़ता है िक उसमें फिलहाल 10 दिन प्राथमिक रूप से और पूरे इलाज के रूप में 17 दिनों तक नजर रखना पड़ता है। अनेकों बार लाॅन्ग कोविड में इसलिए डेथ हो रही हैं कि मरीज को थोड़े दिन इलाज के बाद हल्के ठीक होने पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता है। कई प्रकरणों में हृदयाघात लाॅन्ग कोविड में लापरवाही की वजह से सामने आ रहे हैं।

रिपोर्ट निगेटिव तभी स्वस्थ

इस तरह के तरीकों पर एक्सपर्ट कहते हैं कि जब तक रिपोर्ट निगेटिव नहीं आती है तब तक पेशेंट को स्वस्थ मान लिया जाना मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। तकनीकी पहलू यही है कि जब रिपोर्ट निगेटिव आती है तभी शरीर से मर्ज दूर हुआ माना जाता है। सीनियर मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. अजय तिवारी कहते हैं कि अनेकों केस में देखा गया कि बाद में मरीज की हालत बिगड़ी और भर्ती करने की नौबत आ गई। इलाज अधूरा छोड़ा जाए तो कई केसों में केज्युअलटी भी हो सकती है इसलिए गाइडलाइन के तहत भर्ती हाेकर इलाज जरूरी है।

यह भी हो सकता है प्रमुख कारण

जानकार सूत्रों का कहना है कि केवल सरकारी में ही नहीं बल्कि कुछ निजी अस्पताल में भी मरीज को जल्द डिस्चार्ज कर दिया जा रहा है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोग इसे ज्यादा लाभ कमाने की बात से जोड़ रहे हैं, तो कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जिस तरह मरीजों की संख्या बढ़ रही है उस हिसाब से अस्पतालों में बैड कम हैं। आने वाले सभी मरीजों को भी प्राथमिक चिकित्सा का लाभ मिल सके इसलिए भी कुछ मरीजों को समय से पहले डिस्चार्ज किया जा रहा है।

हम जो तय गाइडलाइन है उसी के अनुसार पेशेंट को डिस्चार्ज कर रहे हैं। सेहत ठीक होने पर 10 दिन बाद अस्पताल से छोड़ा जा रहा है। किसी भी तरह से इस नियम की अनदेखी न हो हम इसका पूरा ख्याल रखते हैं।
डॉ. संजय मिश्रा, ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ

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