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  • On The 6th To 9th Day, The Virus That Injured The Lungs Got A Bit Of A Mistake In It And Risked Life Directly.

एक्सपर्ट की राय:6 से 9वें दिन फेफड़ों काे जख्मी बना रहा वायरस इसमें थोड़ी सी गफलत की और सीधे जान पर जोखिम

जबलपुरएक महीने पहले
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  • हल्के बुखार के साथ होती है समस्या फिर जल्द ही विकराल रूप ले लेती है
  • जाँच के लिए सैम्पल देने के साथ दवा खाना शुरू कर दें तो ही कुछ आराम

पहली लहर का कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश करने के साथ इलाज में थाेड़ा वक्त देता था, कुछ स्पष्ट से लक्षण थे, लेकिन नई लहर के नए स्ट्रेन वाले वायरस में लक्षण तो अलग हैं ही साथ ही यह बहुत तेजी के साथ फेफड़े तक पहुँचकर लोगों की जान ले रहा है। अप्रैल के पहले दिन तक शहर में 1328 एक्टिव केस थे उसके बाद नए स्ट्रेन ने असर दिखाया जिसमें यह देखने मिला है कि नई लहर का वायरस खासकर 6 से 9 दिनों में घातक रूप लेकर फेफड़े को डैमेज कर देता है।

पेशेंट का इलाज करने वाले एक्सपर्ट के अनुसार 2 से 3 दिनों तक हल्का बुखार फिर शरीर का तापमान बढ़ना, घबराहट, बेचैनी, प्रतिमिनट हार्ट रेट बढ़ना, सीने में भारीपन, ऑक्सीजन का 90 से नीचे चला जाना और फिर जान एकदम साँसत में फँस जाने के हालात निर्मित होते हैं। इसमें विशेष बात यह है कि उम्र का बंधन नहीं है, यह 35 से 50 तक की उम्र वालों को बड़ी आसानी से अपना शिकार बना रहा है।

सीनियर मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. दीपक बहरानी कहते हैं कि बेहतर तरीका यही है कि जाँच के लिए सैम्पल देने के साथ ही एक्सपर्ट से राय लेकर इसका इलाज शुरू कर दें। डॉ. बहरानी कहते हैं ऐसा देखा जा रहा है कि इसमें मामूली सी भी देरी बहुत खतरनाक साबित हो रही है।

सावधान - 10 माइक्रोमीटर का रूप लेकर हमला
सीनियर मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. अजय तिवारी कहते हैं कि यह 10 माइक्रोमीटर का रूप लेकर साँस लेते या छींकते वक्त एक से दूसरे शरीर तक जा रहा है। डॉ. तिवारी के अनुसार 5 से 6वें दिन के बाद यदि अगले 12 से 36 घण्टों में इलाज में देरी हुई तो साँस लेने में तकलीफ के साथ यह लंग्स के पाँच लोब को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इन हालातों में इलाज कठिन होता है इसलिए सतर्कता ही सबसे बेहतर तरीका है। ​​​​​

इस वजह से ज्यादा घातक रूप

वायरस जब भी अपना जेनेटिक कोड बदलता है तब वह इंसान की प्रतिरोधक क्षमता और एंटीबाॅडीज से बचते हुए हमला करने के रास्ते खोजता है। इस तरह वह ज्यादा तेजी से इन्फेक्शन फैलाने के काबिल हो जाता है। यही वजह है कि अभी जो मामले सामने आ रहे हैं वे कम उम्र के लोगों के हैं और ज्यादा घातक रूप में सामने आ रहे हैं। नई लहर के वायरस में उम्र का बंधन नहीं है और यह युवाओं को पूरी ताकत के साथ अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
अभी इस तरह के स्ट्रेन सक्रिय हैं

एक्सपर्ट के अनुसार अभी भारत में 2 वायरस के स्ट्रेन इण्डियन हैं तो एक यूके का है। इनमें प्रमुख रूप से बी.1. 1.7 एक अन्य बी.1.617 और बी.1.3.5 सक्रिय बताये जा रहे हैं। इनमें जिसकी भी मारक क्षमता अधिक है यदि उससे सीधा वास्ता पड़ गया तो आदमी का फेफड़ा उसी हिसाब से जख्मी या यूँ कहिए तो संक्रमण के बाद दम तोड़ रहा है।

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