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दो माह में दोगुने हो गए रेत के दाम:जबलपुर में ही प्रति हाइवा 25 हजार रुपए, कटनी में 32 हजार तक वसूले जा रहे

जबलपुर9 महीने पहले
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रेत खदानों का ठेका हासिल करने जिस तरह से रेत का काम करने वाली कंपनियों ने ऊँची बोली लगाईं उसका असर बाजार में दिखने लगा है। 31 मार्च तक जबकि पुराने ठेकेदार काम कर रहे थे रेत के जो दाम थे वे नई ठेका कंपनियों द्वारा काम शुरू किए जाते ही दोगुने हो गए। जबलपुर में जो रेत का हाइवा 13 हजार रुपए में मिल जाता था, उसके दाम आज 25 हजार रुपए हो गए हैं। कटनी में जहाँ कि, ठेका कंपनी विस्टा सेल्स प्रा. लि. ने सबसे पहले काम शुरू किया था, प्रति हाइवा बत्तीस हजार रुपए तक कीमत हो गई है। समीपी नरसिंहपुर जिले में प्रति हाइवा दाम 20 से 25 हजार रुपए के बीच हो गए हैं। हाइवा ही नहीं डंपर व ट्रालियों के भी दाम बेतहाशा बढ़े हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। जिसका खुद के घर का सपना तो महँगा हुआ ही, जरूरी निर्माण कार्यों की भी लागत बढ़ गई। 

ऐसे ज्यादा बढ़ रहे रेत के दाम
कंपनियों ने प्रति घनमीटर जिस दर पर ठेका लिया उसकी राॅयल्टी तो वे वसूलेंगे ही, जो कि पिछले सालों की राॅयल्टी दर 125 रुपए घनमीटर से कहीं ज्यादा है। रेत इसलिए भी महँगी मिल रही है, क्योंकि ठेका कंपनियाँ अपने जिले की टीपी पर उन दूसरे जिलों से भी रेत लेकर आ रही हैं जहाँ उस जिले की ठेका कंपनी ने अभी काम शुरू नहीं किया है। जबलपुर का ही उदाहरण लें। जबलपुर की 46 रेत खदानों के समूह का ठेका 31 करोड़ 54 लाख 54 हजार 55 रुपए में श्याम सुहाने के संचालन वाली आराध्या लॉजिस्टिक साल्यूशन प्रा. लि. ने लिया है। इस कंपनी ने अपसेट प्राइज से चार गुना अधिक कीमत पर ठेका लिया। लिहाजा वह 525 रुपए प्रति घनमीटर तो राॅयल्टी ही वसूल रही, जो एक गाड़ी की करीब 14 हजार रुपए होती है। इसके अलावा वह रेत लेने वाले लोगों को समीपी नरसिंहपुर जिले का रास्ता दिखा देती है। नतीजतन करीब 65 किलोमीटर के अतिरिक्त डीजल आदि के खर्चे व प्रॉफिट मार्जिन का करीब दस-ग्यारह हजार रुपए का बोझ भी उपभोक्ता पर पड़ता है और उसे एक गाड़ी रेत के 25 हजार रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। 

नरसिंहपुर ही क्यों ..?| महाकोशल में सबसे ऊँची बोली नरसिंहपुर जिले की 36 रेत खदानों के समूह के लिए 63 करोड़ रुपए से ज्यादा की जिस धनलक्ष्मी मर्चेंडाइस ने लगाई थी, उसने अभी आमद भी दर्ज नहीं कराई है। लिहाजा मैदान खाली देख आराध्या लॉजिस्टिक साल्यूशन ने उस गोटेगाँव की ओर रुख किया जो बाहुबल और राजनीतिक प्रभुत्व के लिए पूरे प्रदेश में ख्यात है और आराध्या द्वारा राजनीतिक संरक्षण में जबलपुर की टीपी पर नरसिंहपुर जिले से भी रेत का खनन किया जाने लगा। रेत के इस गोरखधंधे को चलाए रखने दो जिलों के राजस्व अमले, पुलिस महकमे और माइनिंग विभाग को भी साधना पड़ा होगा और यह इतना आसान काम नहीं है कि बिना बड़े राजनीतिक रसूख के इसे अंजाम दिया जा सके, लेकिन यह सब जितने बेधड़क और बेखौफ अंदाज में चल रहा है, उससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि, रेत के इस खेल की जड़ें बहुत गहरी हैं।
बुधगाँव का किसी के पास जवाब नहीं| गोटेगाँव तहसील अंतर्गत आने वाले साकल घाट से लगे बुधगाँव के बारे में नरसिंहपुर जिले का प्रशासन भी खामोश बैठा है। जानकारों के अनुसार जबलपुर रेत जा सके इसके लिए यहाँ बेधड़क रेत का खनन चल रहा है। जिन लोगों ने बुधगाँव का रेत स्टॉक देखा है, उनका अनुमान है कि अवैध रूप से खनन कर निकाली गई इस रेत की रॉयल्टी की वर्तमान दर से कीमत डेढ़ से दो करोड़ के आसपास है और बाजार मूल्य जबलपुर जिले के ठेके का करीब एक तिहाई। ऐसा नहीं कि वहाँ प्रशासन ने सजग होने का प्रयास नहीं किया, लेकिन जिम्मेदारों को उसके जो परिणाम भुगतने पड़े, उसे देख हौसले पस्त हो गए। चर्चा के अनुसार नरसिंहपुर के पूर्व कलेक्टर ने तो इस रेत की जब्ती तैयारी कर ली थी, लेकिन वे अपने इस अभियान पर कूच कर पाते, उसके पहले ही उन्हें तबादला आदेश थमा दिया गया। 

दावे हो गए फेल
सरकार को उसकी अपसेट प्राइस (न्यूनतम कीमत) से तीन गुना अधिक राजस्व बतौर राॅयल्टी रेत खदानों से प्राप्त होने की बात जब सामने आई थी तब इसे लेकर सवाल उठे थे कि आम आदमी को रेत की ऊँची कीमत चुकानी होगी। तत्कालीन खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए तर्क दिया था कि चूँकि क्वांटिटी ज्यादा रहेगी और रेत चोरी भी नियंत्रित रहेगी, लिहाजा रेट में बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ेगा। रेत के दाम में कंपनी की मोनोपॉली के सवाल पर भी उन्होंने ये कहा था कि रेत कहीं से भी खरीदने-बेचने की छूट रहेगी, लिहाजा मोनोपॉली नहीं चल पाएगी। आज ये सारे दावे फेल नजर आते हैं।
दाम पर नहीं लगाम 
जब रेत खदानों की नीलामी हुई थी तब तत्कालीन खनिज मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया था कि यदि रेत के दाम ऊँचे जाते दिखेंगे तो उन पर नियंत्रण लगाया जाएगा। कैसे ...?, यह तब भी पहेली था और आज भी पहेली है। आज किसी भी जिले के प्रशासन के पास इसका जवाब नहीं है कि वह अपने यहाँ रेत के बेतहाशा बढ़े दामों पर कैसे अंकुश लगाएगा।

रेत माफिया की कहानी रोजनामचे में दर्ज
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दर्ज होगा मुकदमा

जिले में रेत खनन ठेका की स्वीकृति के बाद अब रेत माफिया के बीच वर्चस्व की जंग शुरू हो गयी है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कारों का लंबा काफिला निकला था जो कि रेत माफिया के गुटों का होना बताया जा रहा है। इस वीडियाे के वायरल होने के बाद प्रशासन में खलबली मच गयी है। उधर वीडियो को लेकर हड़कम्प मचने के बाद शहपुरा पुलिस ने रोजनामचा में घटनाक्रम को दर्ज किया है और संभवत: आज अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार रेत ठेका होने के बाद बरगी से झाँसी घाट के बीच पिछले कुछ दिनाें से आतंक का माहौल है। दो दिन पहले एक राजनैतिक पार्टी के दो गुटों के बीच शक्ति प्रदर्शन का नजारा पेश किया गया। इस सड़क पर दो दिनों में जो काफिला निकला उसे देखकर लोग दंग रह गये। वहीं व्यवस्था से जुड़े लोगों ने खामोशी ओढ़ ली थी। इस बीच कारों का काफिला निकलने का वीडियो वायरल हाेने पर मचे हड़कम्प के बाद प्रशासन हरकत में आया और पुलिस ने घटना को रोजनामचा में दर्ज किया है और अब अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया जा सकता है।

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