MP में सरकारी भवनों में लगेंगे प्रीपेड मीटर:8 हजार सरकारी कार्यालयों से हर महीने मिलेंगे 600 करोड़, उधारी बंद

जबलपुर9 दिन पहले
प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय दुबे।

बिजली कंपनियों के कर्मियों के आत्मनिरीक्षण पर केंद्रीय मंथन-2022 कार्यशाला का आज समापन हो गया। बिजली हानि कम करने और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की आर्थिक सेहत सुधारने की तीन योजना पर अगले कुछ महीने में अमल हाेगा। पहला सबसे अधिक हानि वाले क्षेत्रों में सबसे पहले एबी केबलिंग या भूमिगत केबलिंग के कार्य कराए जाएं। तीसरा सरकारी भवनों में प्री-पेड मीटर लगाया जाए। इससे उधारी बंद होगी और नकदी की समस्या दूर होगी।

मंथन-2022 में ऑनलाइन जुड़े केन्द्रीय विद्युत सचिव आलोक कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश के तीनों पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को हानि वाले क्षेत्रों में सबसे पहले एबी केबलिंग और अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्य करना चाहिए। इसके समानांतर स्मार्ट व प्रीपेड मीटरिंग का कार्य भी करें। एमपी की बिजली वितरण कंपनियों को सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधि‍क उपयोग करें, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर और त्वरित सेवाएं मिल सकें।

तीन दिवसीय मंथन-2022 कार्यशाला का समापन।
तीन दिवसीय मंथन-2022 कार्यशाला का समापन।

अगले दो सालों में सभी सरकारी भवनों में लग जाएगा स्मार्ट मीटर

प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय दुबे ने कहा कि एमपी में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी आरडीएसएस योजना को लागू किया जा रहा है। इस पर 24 हजार करोड़ रुपए अगले कुछ सालों में खर्च होंगे। इसमें 8700 करोड़ रुपए स्मार्ट एवं प्रीपेड मीटरिंग पर खर्च होने हैं। वहीं 15 हजार 400 करोड़ रूपए अधो-संरचना की मजबूती पर व्यय किए जाएंगे। प्रमुख ऊर्जा सचिव ने कहा कि ब्लॉक स्तर तक लगभग 8 हजार शासकीय कार्यालयों में स्मार्ट व प्रीपेड मीटर प्राथमिकता से लगाए जाएंगे। इससे हर महीने 600 से 700 करोड़ रुपए की उधारी बंद हो जाएगी।

सरकारी भवनों का ये है गणित

प्रदेश में अधिकतर सरकारी भवनों में या तो मीटर खराब पड़े हैं या फिर औसत बीलिंग की जाती है। सरकारी भवनों पर बकाया होने के बावजूद पावर कट विभाग नहीं कर पाता है। हर महीने करोड़ों का बकाया होने पर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का आर्थिक हालत गड़बड़ा जाती है। प्रदेश में जबलपुर, भोपाल, इंदौर व ग्वालियर नगर निगम का ही हर महीने का बिल 100 करोड़ रुपए बनता है।

इसके अलावा अन्य निकायों का लगभग 250 करोड़ का बिल बनता है। इतनी ही बिजली खर्च अन्य सरकारी भवनों का महीने का है। मतलब 600 से 700 करोड़ हर महीने 8 हजार सरकारी भवनों में खर्च होते हैं। प्रीपेड व स्मार्ट मीटर लगाने से ये राशि हर महीने कंपनी को नकद मिलेगी।

कैसा होगा प्री-पेड मीटर-

सामान्य मीटर से अलग ये स्मार्ट मीटर प्री-पेड मीटर होगा। इसमें मोबाइल की तरह बिजली का रिचार्ज होगा। उपभोक्ता उपयोग के अनुसार बिजली का रिजार्च करवा सकता है। मीटर में हर वक्त बिल की खपत के साथ बकाया यूनिट संबंधी जानकारी प्रदर्शित होगी। उपभोक्ता के मोबाइल पर भी रिचार्ज समाप्ति का मैसेज आएगा और मोबाइल से रिचार्ज कराया जा सकेगा।

रिचार्ज खत्म होने तुरंत न कटे बिजली

प्रमुख सचिव ऊर्जा ने सुझाव बिजली वितरण कंपनियों को कहा है कि वे मप्र विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल करें, कि रात में प्री-पेड मीटर के कनेक्शन न बंद हो। भले ही उपभोक्ता का रिचार्ज खत्म हो जाए। दोबार रिचार्ज के लिए कुछ दिन का अतिरिक्त समय दिया जाए। ताकि किसी वजह से उपभोक्ता प्री-पेड मीटर रिचार्ज नहीं करवा पाए, तो उसे दोबारा रिचार्ज करवा सके।

नई तकनीक पर हुई चर्चा।
नई तकनीक पर हुई चर्चा।

पावर सेक्टर को पेपरलेस की ओर बढ़ना होगा

प्रमुख सचिव ने कहा कि रेलवे व बैंकों की तरह पूरा स्टेट पावर सेक्टर पेपरलेस कार्य करने की मानसिकता बना लें। तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करें। इससे कम मैनपावर में हम अधिक कार्यकुशलता दिखा पाएंगे। पावर मैनेजमेंट कंपनी के एमडी विवेक पोरवाल ने कहा कि भविष्य में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी हो जाएगी।

इसको देखते हुए पावर मैनेजमेंट कंपनी में एक अलग प्लानिंग सेल का गठन होना चाहिए। उपभोक्ताओं को भी सोलर रूफटॉप स्थापित करने के लिए प्रेरित व उत्साहित करना चाहिए। नवीकरणीय ऊर्जा की अधिकता और उपलब्धता से सस्ती बिजली मिल सकेगी। प्रदेश में कृषि‍ क्षेत्र में बढ़ती बिजली की मांग एक चुनौती है। इस ओर विशेष ध्यान देना होगा।

समापन दिवस पर इन लोगों ने पावर प्रेजेंटेशन दिया

सीईएससी के जनरल मैनेजर शांतनु सेन ने सब स्टेशनों के आधुनिकीकरण और मेंटेनेंस, पीडब्ल्यूसी के समबि‍तोष मोहपात्रा ने पावर सेक्टर स्ट्रजी व विजन, टाटा पावर के सोमबुद्धा ने डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में आईटी के महत्व, स्टीफन जे. ली ने एग्रीकल्चर इलैक्ट्रिसिटी डिमांड फोरकास्ट‍िंग, एनएलडीसी के समीर सक्सेना ने पावर प्लानिंग, रिन्यू पावर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अभिषेक रंजन ने नवीकरणीय ऊर्जा व ग्रिड और आईआईटी दिल्ली के अभिषेक मल्होत्रा ने ‘कुसुम-सोलर पम्प’पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया।