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बिजली दरें 4% तक बढ़ाने की तैयारी!:MP में बिजली की नई दरें बढ़ाने बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग में दायर की टैरिफ याचिका, 14 को होगी प्रारंभिक सुनवाई

जबलपुरएक वर्ष पहले
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अगले वित्तीय वर्ष 2022-23 में बिजली बिल मारेगा करंट। - Dainik Bhaskar
अगले वित्तीय वर्ष 2022-23 में बिजली बिल मारेगा करंट।

बिजली कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बिजली की नई दरें निर्धारित करने के लिए टैरिफ याचिका नियामक आयोग के समक्ष पेश कर दिया है। सूत्रों की मानें तो इस बार विभाग चार प्रतिशत के लगभग दरें बढ़ाने की तैयारी में है। विभाग ने 34 हजार करोड़ रुपए की जरूरत बताई है। 14 सितंबर को नियामक आयोग में प्रारंभिक सुनवाई होगी। इसके बाद टैरिफ याचिका को सार्वजनिक करते हुए जनसुनवाई के लिए आपत्तियां आमंत्रित किए जाएंगे।

एमपी की बिजली सप्लाई कंपनियों की ओर से पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 01 दिसंबर को नियामक आयोग में टैरिफ याचिका दायर की है। इस बार याचिका में बढ़ाई गई दरों का खुलासा कंपनी ने नहीं किया है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि नियामक आयोग ही प्रस्तावित दरों का खुलासा करेगी।

14 दिसंबर को होगी प्रारंभिक सुनवाई

14 दिसंबर को नियामक आयोग में प्रारंभिक सुनवाई होगी। इसमें याचिका लगाने वाली कंपनी का पक्ष सुना जाएगा। याचिका में यदि किसी दस्तावेज की कमी होगी तो उसकी पूर्ति के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद तय होगा कि कब इस टैरिफ याचिका को सार्वजनिक करते हुए इस पर आम लोगों से आपत्तियां बुलवाई जाए। इसके बाद जनसुनवाई होगी। जनसुनवाई वर्चुअल होगी या भौतिक ये बाद में तय होगा।

अभी टैरिफ याचिका दायर करना नियम विरूद्ध

बिजली कंपनी के मामले में जानकार रिटायर्ड इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल ने बिजली कंपनियों की ओर से दायर की गई टैरिफ याचिका की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। अग्रवाल के मुताबिक अभी नियामक आयोग को वित्तीय वर्ष 2022-202 के लिए नई रेग्युलेशन नीति बनानी है। इसकी जनसुनवाई 24 अगस्त को हो चुकी है। पर अभी तक आपत्तियों को समाहित करते हुए खुदरा टैरिफ निर्धारण हेतु रेग्युलेशन नीति जारी नहीं हो पाया है।

नए रेग्युलेशन ड्राफ्ट की प्रत्याशा में दायर कर दी टैरिफ याचिका

बिजली कंपनी ने ड्राफ्ट के आधार पर इस प्रत्याशा में टैरिफ याचिका दायर कर दी है। यह टैरिफ याचिका ही पूरी तरह से वैधानिक नहीं है। पहले रेग्युलेशन नीति तय होना चाहिए था। बिजली कंपनियों ने इसी साल जुलाई में 0.63 प्रतिशत दर बढ़ाए थे। सूत्रों की मानें तो इस बार कंपनियों ने 04 प्रतिशत के लगभग दर बढ़ाने की मांग टैरिफ याचिका में की है।

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