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बयानों की एक जैसी स्क्रिप्ट से उठे सवाल:नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में आरोपियों को सूरत पुलिस ने रिमांड पर लिया, जबलपुर की SIT को करना पड़ेगा इंतजार

जबलपुर2 महीने पहले
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गुजरात की मोरबी पुलिस की गिरफ्त में आए चार आरोपियों को लाया जाएगा जबलपुर। - Dainik Bhaskar
गुजरात की मोरबी पुलिस की गिरफ्त में आए चार आरोपियों को लाया जाएगा जबलपुर।

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में जबलपुर की एसआईटी से पहले ही गुजरात की सूरत पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर ले लिया है। ऐसे में एसआईटी को अभी कुछ और दिन इंतजार करने पड़ेंगे। इधर, एसआईटी जबलपुर में गिरफ्तार और रिमांड के दौरान की गई पूछताछ और बयानों का मिलान करने में जुटी है। सूत्रों की माने तो इस मामले के मास्टरमाइंड सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत मोखा, उसकी मैनेजर सोनिया, दवा कर्मी देवेश और गुजरात पुलिस की गिरफ्त में आए सपन के बयानों में कई विरोधाभास है।

एसआईटी के मुताबिक सरबजीत मोखा और उसकी मैनेजर सोनिया खत्री के बयान को लेकर कहा जा रहा है कि दोनों ने एक जैसे बयान दिए। उनके बयानों की स्क्रिप्ट एक जैसी रही। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि गिरफ्तारी के पहले ही दोनों को क्या बोलना है, ये तय कर लिया था। मोखा ने नकली इंजेक्शन मंगाने और लगाने के बाद उसे नष्ट करने की बात स्वीकार कर ली है, लेकिन वह बयान में यही दोहराता रहा कि जब उसने सपन से मंगवाया था, तब उसे नकली होने की बात मालूम नहीं था।

सिटी अस्पताल की मैनेजर सोनिया, मोखा की पत्नी जसमीत और सरबजीत मोखा।
सिटी अस्पताल की मैनेजर सोनिया, मोखा की पत्नी जसमीत और सरबजीत मोखा।

बयानों में यहां आया विरोधाभाष

सिटी अस्पताल से मिले दस्तावेजों में किए गए हेरफेर को लेकर मैनेजर सोनिया खत्री और डायरेक्टर सरबजीत सिंह मोखा के बयानों में विरोधाभास नजर आया है। इसके अलावा मोखा की पत्नी जसमीत का अस्पताल में दखल देने की बात भी सामने आई है। अस्पताल की सारी गतिविधियों की जानकारी जसमीत के पास होती थी। वहीं इंदौर में रीवा के सुनील, अधारताल के दवा संचालक सपन जैन के बयान भी एसआईटी ने लिए हैं। देवा कर्मी देवेश से भी पूछताछ हो चुकी है। सभी के बयान में कई तरह के विरोधाभाष भी सामने आया है। इसे बिंदुवार सूची बनाकर एसआईटी आरोपियों को आपस में घेरेगी।

रैपर मिटाना, मोबाइल तोड़ना और मोबाइल गायब करना बड़ी साजिश का संकेत

आरोपियों ने गुजरात में नकली इंजेक्शन मामले का भंडाफोड़ होके बाद जिस तरह नकली इंजेक्शन को लेकर सबूत मिटाने की पूरी कवायद की, वो किसी गहरे साजिश का हिस्सा लग रहा है। नकली इंजेक्शन को गरम पानी में डालकर रैपर को मिटाने से लेकर इंजेक्शनों को नष्ट करना, हरकरण का फरारी के दौरान अपने मोबाइल फोन तोड़ना, मोखा का मोबाइल गायब होना, कुछ और ही संकेत दे रहा है। मोखा यह बात अच्छी तरह से जानता था कि यदि मोबाइल एसआईटी के हाथ लगा तो उसके कई राज सामने आ जाएंगे।

सिटी अस्पताल में 171 मरीजों को 209 नकली इंजेक्शन लगाए गए थे।
सिटी अस्पताल में 171 मरीजों को 209 नकली इंजेक्शन लगाए गए थे।

एक इंजेक्शन के 18 हजार रुपए वसूले गए

सिटी हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने के एवज में 18-18 हजार रुपए वसूले गए। शीतला माई घमापुर निवासी अभिषेक श्रीवास्तव ने यह आरोप लगाकर एसआइटी को लिखित शिकायत दी है। इसे जांच में शामिल कर लिया गया है। अभिषेक ने बताया कि उसके मरीज को एक इंजेक्शन 18 हजार 400 रुपए लेकर लगाया गया। बिल मांगने पर जवाब मिला ब्लैक में खरीदे गए इंजेक्शन का बिल नहीं मिलता। अभिषेक ने बताया कि उन्होंने अपनी बुआ को 13 अप्रैल को कोरोना उपचार के लिए सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। तीन मई को उनकी मौत हो गई थी।

इंजेक्शन के लिए सोनिया से संपर्क करने को कहा गया था

अभिषेक के मुताबिक उसकी बुआ का एक बेटा कनाडा में है , तो दूसरे की कोरोना से मौत हो चुकी थी। उनमें कोरोना संक्रमण होने पर डॉ. प्रदीप पटेल के कहने पर सिटी हॉस्पिटल मेंं भर्ती कराया था। 14 मई को उसे 6 इंजेक्शन की व्यवस्था के लिए बोला गया। इंतजाम नहीं होने पर सिटी अस्पताल की मैनेजर सोनिया खत्री से मिलने को बोला गया। सोनिया ने 18 हजार 400 रुपए बताए। दो बार में 73 हजार 600 रुपए जमा कराए गए। पैसे लेने के बाद बताया गया कि 20 अप्रैल को इंजेक्शन मरीज को लगा दिए गए। 6 इंजेक्शन लगने के बाद मरीज की सेहत में सुधार नहीं हुआ। डिस्चार्ज करने का दबाव बनाने लगे। 25 अप्रैल को लामा घोषित (परिजन लिख कर देता है कि मरीज ठीक हो गया उसे ले जा रहे हैं) कर डिस्चार्ज कर दिया गया। बिल के तौर पर 3 लाख 73 हजार 164 रुपए भरना पड़ा।

बिल में किया हेरफेर

अभिषेक के मुताबिक उसकी बुआ को दो इंजेक्शन नहीं लगाए गए थे। जिसके लिए मोखा ने 36 हजार 800 रुपये नकद वापस कर दिए थे। बिल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत 5400 रुपये लिखी गई थी। पूछे जाने पर मोखा व सोनिया ने कहा कि ब्लैक में मंगाए गए इंजेक्शन की ज्यादा कीमत वसूल की जाती है।

अब सूरत पुलिस की पूछताछ के बाद ही जाएगी टीम

गुजरात पुलिस की गिरफ्त में आए सपन जैन, सुनील मिश्रा, कौशल वोरा, पुनीत शाह की रिमांड पाने में एसआईटी को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। एसआईटी की टीम रविवार को गुजरात जाने वाली थी। प्रोडक्शन वारंट 29 मई को ही गुजरात जेल को तामील करा दी गई थी। पर ऐन वक्त पता चला कि सूरत पुलिस ने आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर ले लिया है। अब उनके जेल जाने के बाद ही यहां की एसआईटी गुजरात जाएगी।

रोहित काशवानी, एएसपी सिटी

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