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स्टे ब्रिज:डिटेल ड्रॉइंग देखने के बाद अनुमति देगा रेलवे, एक बार पहले मिल चुकी है निर्माण की एनओसी

जबलपुर8 महीने पहले
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  • मदन महल रेलवे स्टेशन के इस पार से उस पार तक फिर बाधाएँ

दमोहनाका मदन महल फ्लाईओवर के बीच के हिस्से में मदन महल स्टेशन के ऊपर केबल स्टे ब्रिज बनाया जाना है। यह केबल स्टे ब्रिज 385 मीटर का होगा और यह फ्लाईओवर को इस पार से उस पार तक जोड़ेगा। इस केबल स्टे ब्रिज का बनना तभी आरंभ हो सकता है, जब रेलवे, मदन महल रेलवे स्टेशन के आसपास निर्माण की फाइनल अनुमति देगा। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार रेलवे ने फ्लाईओवर के साथ केबल स्टे ब्रिज की डिटेल ड्रॉइंग माँगी है जो दे दी गई है। रेलवे, इस ड्रॉइंग के तकनीकी पहलुओं पर गौर करने के बाद निर्माण कर सकते हैं या नहीं इसकी अनुमति देगा। इससे पहले प्रारंभिक रूप में एनओसी दे दी थी, पर अब रेलवे ने फिर से पूरी जानकारी माँगी है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संभव है कि एक माह के अंदर निर्माण की अनुमति मिल जाए।

मदन महल रेलवे स्टेशन के आसपास निर्माण शुरू होने से पहले फिलहाल अभी अनेक किस्म की बाधाएँ हैं। मदन महल थाने के पीछे और स्टेशन गेट के नजदीक जो नाले हैं, उनका सीमांकन किया जाना है। यह भी तय किया जाना है कि इसमें रेलवे की भूमि कहाँ तक है। इसी तरह उस पार स्टेशन से कुछ दूरी पर कुछ यात्री निवास व होटले हैं, जिनका अधिग्रहण लोक निर्माण विभाग करेगा। इनके अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने पर इनको अलग किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि केबल स्टे ब्रिज का काम शुरू होने में अभी लंबा वक्त लगने वाला है। निर्माण आरंभ होने में लगातार होती देरी के बीच लोक निर्माण विभाग के ईई गोपाल गुप्ता कहते हैं कि केबल स्टे ब्रिज का काम जल्द आरंभ होगा। रेलवे एनओसी जल्द देने वाला है।

इस तरह बनना है केबल स्टे ब्रिज

  • केबल स्टे ब्रिज कुल बनेगा 385 मीटर।
  • फ्लाईओवर के बीच का हिस्सा है ये।
  • इसकी निर्माण लागत है 38 करोड़ रुपए।
  • फ्लाईओवर के साथ इसकी निर्माण अवधि 36 माह।
  • फ्लाईओवर के 52 पिलर बने, स्टे ब्रिज का काम जीरो।पी-2

रेलवे की शर्त कुछ ऐसी
केबल स्टे का निर्माण तभी आरंभ हो सकता है, जब लोक निर्माण विभाग इसमें रेलवे की जमीन का उपयोग नहीं करेगा। मदन महल रेलवे स्टेशन टर्मिनल में बदल रहा है इसलिए इसको बड़ा स्वरूप दिया जा रहा है। रेलवे को इसके लिए अपनी पूरी खाली भूमि की जरूरत है। किसी और विभाग को यहाँ की भूमि नहीं दी जा सकती है, इसलिए रेलवे ने यह शर्त रखी है कि केबल स्टे ब्रिज निर्माण में उसकी किसी भी हिस्से की जमीन का उपयोग नहीं होना चाहिए।

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