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टमाटर की खेती से ऐसे कमाएं लाखों:रिटायर DSP का सब्जी की खेती में कमाल, 8 महीने में ढाई एकड़ से 3 लाख रुपए की कमाई

जबलपुर7 महीने पहले

जबलपुर सहित महाकौशल का क्षेत्र सब्जी खेती का हब बनता जा रहा है। खासकर पंजाब-हरियाणा के बड़े किसानों के आने के बाद उनके अनुभवों का लाभ यहां के स्थानीय लोग भी उठा रहे हैं। ऐसा ही एक नाम है आरएस कालरा। पुलिस में DSPपद से रिटायर कालरा पिछले पांच साल से उन्नतशील सब्जी की खेती कर रहे हैं। पांच एकड़ के अपने फार्म हाउस में इन दिनों वे ढाई एकड़ में टमाटर की फसल लगा रखे हैं। भास्कर खेती-किसान सीरीज-9 में आईए जानते हैं कि किसान अपने टमाटर की फसल को झुलसा और फलों को इल्लियों के प्रयोग से कैसे बचाएं…

टमाटर की दुश्मन है झुलसा और इल्ली रोग

टमाटर के लिए न तो जमीन अधिक सूखी और न ही अधिक गीली होनी चाहिए। टमाटर की फसल में फूल और फल आने के समय झुलसा रोग लगता ही है। खासकर बारिश के तुरंत बाद धूप निकलने पर टमाटर में ये रोग तेजी से पनपता है। ऐसे में किसानों को फूल आने पर या बारिश होने के तुरंत बाद झुलसा रोग से बचाने वाले कीटनाशक का छिड़काव कर देना चाहिए। इसी तरह इल्ली का भी उपचार फूल व फल आने के समय करना बेहद जरूरी है, नहीं तो फल टेढ़े-मेढ़े होंगे और फूल सूखने से उत्पादन प्रभावित होगी।

6 महीने की फसल है टमाटर

टमाटर की नर्सरी अपने ढाई एकड़ खेत में 31 अगस्त को रोपा था। दो महीने बाद फल आ गए। ये अधिक गर्मी नहीं पड़ी तो फरवरी तक चलेगा। चार महीने टमाटर का उत्पादन होता है। ढाई एकड़ में एक सीजन में 1200 कैरेट के लगभग टमाटर निकलता है। एक कैरेट में 22 से 24 किलो तक टमाटर आता है। अभी 500 रुपए कैरेट कीमत मिल रही है। शुरूआत में 800 रुपए कैरेट तक टमाटर बिका था।

झुलसा रोग को समय पर स्प्रे कर बचा लिया, अब ले रहे भरपूर पैदावार।
झुलसा रोग को समय पर स्प्रे कर बचा लिया, अब ले रहे भरपूर पैदावार।

शुरूआत में महंगी दवा से बचें

किसान भाई टमाटर में झुलसा या इल्ली के प्रकोप की शुरूआत में ही महंगी एवं अधिक डोज के कीटनाशक का स्प्रे कर देते हैं। पर बाद में इन कीटनाशकों का असर नहीं होता। इस कारण पहले कम मंहगी दवाओं का स्प्रे करें। किसान को पता होना चाहिए कि कब और क्या स्प्रे करना है। जैसे पौधे छोटे हैं तो पौधे और जड़ के ग्रोथ के लिए खाद व दवाओं का उपयोग करना चाहिए।

इस तरह खेत की तैयार करें

टमाटर जैसी सब्जी की खेती वाली जमीन में पानी का भराव नहीं होना चाहिए। नहीं तो फसल गल जाएगी। इसके लिए किसान एक सिरे को ऊंचा और दूसरे सिरे को नीचा करके मेड़ बना लें। इसे ड्रिप इरीगेशन पाइप से लैस कर पॉलीथिन से ढंक दें। फिर जहां पौधे रोपे जाते हैं। वहीं पर ड्रिप को खोलते हैं। इसका फायदा दो तरह से किसानों को मिलता है। एक तो खरतपतवार नहीं होगा।

वहीं ड्रिप इरीगेशन से पानी हर पौधे तक जरूरत के अनुसार पहुंच जाता है, तो कम पानी लगता है। वहीं इसी के माध्यम से खाद भी सीधे पौधे तक पहुंचा जाता है। टमाटर में इल्ली नीचे से लगते हैं। क्योंकि ऊपर से धूप पड़ता है। पॉलीथिन लगाने का फायदा ये होता है कि नीचे से भी हीट होने से इल्ली का प्रकोप कम होता है। बारिश होने पर ढलान से पानी तुरंत निकल जाता है।

बीज या नर्सरी का चयन महत्वपूर्ण

किसान भाईयों को टमाटर के अच्छे बीज का चयन बेहद सावधानी पूर्ण तरीके से करना चाहिए। खासकर पॉली हाउस में कोकोपीट में उगाए गए ट्रे नर्सरी वाले पौधे लें तो अच्छा रहेगा। जमीन में खुले में लगाई गई नर्सरी वाले पौधे में जमीन के रोग भी आ जाते हैं। इसमें झुलसा रोग लगने की आशंका अधिक रहती है। नर्सरी रोपने के बाद हर स्टेज पर अलग-अलग साइज के अनुसार खाद डालते हैं। पौधे की बढ़वार और जड़ की ग्रोथ देखना पड़ता है।

बांस व रस्सी से पौधों को देते हैं सहारा।
बांस व रस्सी से पौधों को देते हैं सहारा।

बांस व रस्सी से पौधे को बांध लें

किसानों को टमाटर से अच्छे उत्पाद लेने हैं तो पौधे को जमीन पर न फैलने दें। बांस व रस्सी की मदद से पौधे को सपोर्ट देकर रखे। इससे फल भी खराब नहीं होता और उसे तोड़ने में भी आसानी होती है। आप देख सकते हैं कि किस पौधे में कौन से टमाटर पक गए और कौन पकने में समय लेगा।

टमाटर की सिंचाई कब-कब करें

सब्जी के फसलों में पानी बड़ा फैक्टर माना जाता है। पौधे में पर्याप्त नमी होना चाहिए, लेकिन पानी की अधिकता फसल को झुलसा देगा। खेती करते-करते किसान को अनुभव हो जाता है कि पानी कब देना है। जब पत्तियां मुरझाने लगें तो समझ जाएं की पौधे को पानी की जरूरत है। टमाटर में 1 लीटर का ड्रिप लगा है।

कीट व रोग का पता लगा ट्रिप कार्ड

किसान केमिकल युक्त पीले व नीले ट्रिप कार्ड खेत में जगह-जगह लगा दें। इसका फायदा ये है कि टमाटर में लगने वाले कीट-पतंग के प्रकोप की सही जानकारी मिल जाती है कि अमुम कीट-पतंग लगे हैं। इससे किसान आसानी से उस कीट-पतंग से बचाव संबंधी स्प्रे कर कम खर्च में फसल को बचा सकता है। कीटनाशक का प्रयोग एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें।

ढाई एकड़ में 1200 कैरेट टमाटर एक सीजन में पैदा होता है।
ढाई एकड़ में 1200 कैरेट टमाटर एक सीजन में पैदा होता है।

10 मजदूरों को काम, यूपी तक होती है सप्लाई

आधे एकड़ खेत में 10 मजदूरों को छह महीने बराबर काम मिलता है। पौधे की देखभाल से लेकर फल की तुड़ाई और फिर ग्रेडिंग का काम करना पड़ता है। यहां पैदा होने वाले टमाटर यूपी के इलाहाबाद, मिर्जापुर, बनारस आदि कई जिलों तक जाता है।

भास्कर खेती-किसानी एक्सपर्ट सीरीज में अगली स्टोरी होगी शिमला मिर्च की उन्नत खेती के लिए किसान क्या करें। यदि आपका कोई सवाल हो तो इस नंबर 9406575355 वाॅट्सएप पर कर सकते हैं।

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