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MP में बिजली संकट के बीच सुरक्षा की चिंता:जबलपुर के ग्रामीण संभाग के चार बिजली केंद्रों के कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पुलिस की मांग, कटौती होते ही ग्रामीण पहुंच जा रहे केंद्र

जबलपुर9 महीने पहले
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बिजली कटौती से ग्रामीण गुस्से में, बिजली कर्मचारी सुरक्षा को लेकर सशंकित। - Dainik Bhaskar
बिजली कटौती से ग्रामीण गुस्से में, बिजली कर्मचारी सुरक्षा को लेकर सशंकित।

एमपी में बिजली संकट के बीच बिजली कर्मचारियों पर हमले की आशंका भी बढ़ गई है। आलम ये है कि लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही अघोषित कटौती से परेशान ग्रामीण अब बिजली केंद्रों का घेराव करने पहुंच जा रहे हैं। कई जगह ग्रामीण एकत्र होकर बिजली चालू करने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों की सुरक्षा से चिंतित पाटन संभाग के इंजीनियर ने चार पुलिस थानों को केंद्रों की सुरक्षा के लिए पत्र लिखा है।

बिजली कंपनियों की कंगाली और भुगतान न होने से कोयले की आपूर्ति लड़खड़ा गई है। साथ ही कई बिजली ईकाईयां मेंटीनेंस पर चली गई हैं। मांग की तुलना में उत्पादन कम होने और मिस-मैनेजमेंट के चलते प्रदेश में अघोषित कटौती चालू कर दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में टुकड़ों में 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। अघोषित कटौती से ग्रामीण गुस्से में हैं और बिजली केंद्रों पर पहुंच जा रहे हैं।

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गांवों में ढिबरी युग की वापसी।
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4 विद्युत उप केन्द्रों के लिए सुरक्षा मांगी
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पाटन संभाग के कार्यपालन अभियंता ने पाटन, कटंगी, शहपुरा और बेलखेड़ा विद्युत केंद्रों में सुरक्षा की मांग करते हुए पत्र लिखा है। पत्र में लिखा है कि तकनीकी कारणों से लोड शैडिंग हो रही है, इससे स्थानीय लोगों को विद्युत सप्लाई करने में बाधा हो रही है। ऐसे में उप केंद्रों में बड़ी संख्या में भीड़ पहुंच रही है। ये बिजली चालू करने का अनावश्यक दबाव बनाते हैं। कर्मचारियों के इनके गुस्से का शिकार बनने का खतरा है। इस कारण चारों क्षेत्रों के विद्युत केंद्रों पर पुलिस बल मुहैया कराया जाए।

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सिंचाई वाले फीडरों में पावर कट।
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सिंचाई प्रभावित होने से सूख रहे फसल

बिजली कंपनी के आदेश पर कृषि फीडरों की सप्लाई बंद कर दी गई है। जबलपुर संभाग में औसत से कम बारिश के चलते संकट और गहरा गया है। फसलों की सिंचाई न होने से फसल के सूखने का संकट पैदा हो गया है। अधिकतर किसान सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर हैं। पर बिजली की अघोषित कटौती और कृषि फीडरों की सप्लाई बंद किए जाने से उनका गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

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