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कोरोना का कहर:माँ और भाई की मौत के सदमे में थम गईं बहन की भी साँसें

जबलपुर2 महीने पहले
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  • रांझी में देखते ही देखते खत्म हो गया हँसता-खेलता परिवार, माहौल गमगीन

कोरोना महामारी हर तरफ कहर बरपा रही है। इसकी चपेट में आने से जिन मरीजों की जान जा रही है, उनके परिजन भी मानसिक रूप से विचलित हैं। सदमे की वजह से कुछ लोगों की जान तक जा रही है। इसका जीता जागता उदाहरण रांझी सरस्वती स्कूल के पास रहने वाले विश्वकर्मा परिवार में सामने आया।

इस परिवार की मुखिया पुनिया बाई और उसके बेटे कालीचरण की मौत वैसे तो कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि दूसरी बीमारियों व कोरोना के कारण अस्पतालों में जगह व इलाज न मिल पाने के कारण हुई। माँ और भाई की मौत के बाद घर में अकेली बची 40 वर्ष की सुनीता विश्वकर्मा भी सदमे में आ गई और बीती रात उसकी भी सांसें थम गईं। घटना की जानकारी सामने आते ही आसपास का माहौल गमगीन हो गया।

पड़ोस में रहने वाले लोगों के अनुसार करीब एक साल से रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण रांझी िनवासी पुनिया बाई विश्वकर्मा 70 वर्ष, घर पर ही रहती थीं। उनका 48 वर्षीय बेटा कालीचरण और बेटी सुनीता 40 वर्ष उनकी देखरेख करते थे, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद पुनिया बाई को किसी भी अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण विगत 18 अप्रैल की रात उनका देहांत हो गया था।

कालीचरण पर माँ की मौत का इतना गहरा सदमा बैठा कि माँ को मुखाग्नि देते समय उसने भी दम तोड़ दिया। माँ और भाई को खोने के बाद घर पर अकेली बची सुनीता अपनी बड़ी बहन के घर सिवनी धूमा चली गई थी।

विश्वकर्मा परिवार की मदद कर रहे उनके पड़ाेसी भाजपा नेता वेदप्रकाश अहिरवार ने बताया कि शुक्रवार की शाम उन्होंने सुनीता का हालचाल जानने के लिए जब उसका मोबाइल लगाया तो उसके जीजा ने बताया कि सुनीता की भी मौत हो चुकी है। वेदप्रकाश के अनुसार सुनीता के मृत होने की खबर मिलते ही पूरा मोहल्ला गमगीन हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौर में धैर्य की बड़ी जरूरत है। लोगों को धैर्य व संयम से काम लेना चाहिए।

बेटे की मौत की खबर सुनकर बेसुध हुआ पिता

विश्वकर्मा परिवार की तरह शहर में कई परिवार कोरोना के इस कहर से जूझ रहे हैं। ऐसा ही कुछ करमचंद चौक के पास रहने वाले 50 वर्षीय कोरोना पेशेंट के साथ हुआ। दरअसल कोरोना संक्रमित होने के बाद एक सप्ताह पूर्व 50 वर्षीय व्यक्ति को उसके रिश्तेदारों ने ज्ञानोदय कोविड सेंटर में भर्ती कराया था।

उसका छोटा बेटा पूना में रहता है, जो कुछ दिन पूर्व कोरोना की वजह से अस्पताल में भर्ती था, लेकिन गुरुवार की सुबह उसकी मौत हो गई और जैसे ही इसकी जानकारी अस्पताल में भर्ती पिता को पता चली वो बेसुध हो गया और कोविड सेंटर छोड़कर अपने घर लौटकर यहाँ-वहाँ घूमने लगा। कोविड पेशेंट के इस तरह वापस आने और खुले आम घूमने पर पहले मोहल्ले वालों ने आपत्ति जताई, लेकिन उसके दु:ख और पीड़ा के आगे सभी का गुस्सा शांत पड़ गया।

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