पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Jabalpur
  • Finding Sarabjit's Mobile Became A Question Of Nose, The Secret Of The Officers Or Evidence Against Himself Is Hidden In The Mobile

SIT ने मोखा की दो दिन रिमांड और ली:सरबजीत का मोबाइल ढूंढना बना नाक का सवाल, मोबाइल में छिपा है अधिकारियों का राज या खुद के खिलाफ साक्ष्य

जबलपुर4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सरबजीत सिंह मोखा अपनी पत्नी जसमीत के साथ। - Dainik Bhaskar
सरबजीत सिंह मोखा अपनी पत्नी जसमीत के साथ।

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में गिरफ्तार सरबजीत मोखा की रिमांड अवधि एसआईटी ने दो दिन और बढ़वा ली है। शनिवार को मोखा को मुलाहिजा के बाद कोर्ट में पेश किया गया। वहां उसके अधिवक्ताओं की लंबी फौज लगी थी। एसआईटी ने कोर्ट से मोखा का दो दिन रिमांड और मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। बताते हैं कि एसआईटी को अभी मोखा का मोबाइल नहीं मिल पाया है। इसके अलावा इंजेक्शन को लेकर भी कुछ पूछताछ शेष है।

सरबजीत मोखा द्वारा रिमांड के दौरान अधिकारियों को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के संबंध में बताने वाले दावे के बाद से खलबली मची हुई है। सिटी अस्पताल में कोविड मरीजों के इलाज को लेकर उसकी पुलिस, प्रशासनिक, अधिवक्ता, ज्यूडिसरी से लेकर कई नेताओं से बातचीत होती थी। एसआईटी सूत्रों की मानें तो उसने पूछताछ में कुछ अधिकारियों के नाम भी बताए हैं, लेकिन अधिकृत तौर पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है।

कमलनाथ का आरोप- MP में कोविड माफिया हावी:बोले- अगर मैं सच्चाई बोलूं तो देशद्रोही हूं, प्रश्न पूछूं ताे FIR कर दो, आज ये छुपाने-डराने और दबाने की राजनीति हो रही है

मोबाइल में छिपा है राज या खुद के खिलाफ साक्ष्य

मोखा का मोबाइल अब एसआईटी के लिए भी नाक का सवाल बन गया है। तीन दिन की रिमांड में भी मोखा से मोबाइल को लेकर एसआईटी कोई जानकारी नहीं उगलवा पाई। मोखा की गिरफ्तारी के समय भी एसआईटी ने इसी तरह की लापरवाही दिखाई थी। बाद में उसकी पत्नी सिमरत कौर, मैनेजर सोनिया खत्री और बेटे हरकरण से भी पूछताछ हुई, लेकिन मोबाइल नहीं मिला।

मोखा का जवाब है कि कोविड वार्ड में ही उसका मोबाइल छूट गया था। इसके बाद वह गिरफ्तार हो गया। फिर मोबाइल का क्या हुआ, उसे नहीं मालुम। पर एसआईटी की मानें तो मोखा झूठ बोल रहा है। उसके मोबाइल में टेक्स्ट मैसेज से लेकर कुछ ऐसे गहरे राज और साक्ष्य हैं, जाे वह बाहर नहीं आने देना चाहता है।

सीडीआर में अधिकारियों से बातचीत का दर्ज है रिकॉर्ड

एसआईटी ने मोखा के मोबाइल का एक महीने का सीडीआर निकलवाया है। इसमें कई अधिकारियों से बातचीत होने का रिकॉर्ड दर्ज है। पर नकली रेमडेसिविर को लेकर उसकी किस अधिकारी से क्या बात हुई, ये स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। मोखा से बातचीत करने वाले कई अधिकारियों ने सफाई में कहा है कि उससे बातचीत सिर्फ कोविड मरीजों के भर्ती को लेकर हुई है।

हरकरण की रिमांड समाप्त, गया जेल:मोखा का मोबाइल बना रहस्य, नकली इंजेक्शन के बारे में अधिकारियों को बताने के खुलासे से मचा हड़कंप, IPS बोले- पुलिस को नहीं दी थी कोई सूचना

इंजेक्शन को लेकर भी टीम की होगी पूछताछ

एसआईटी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर एक बार फिर मोखा से पूछताछ की तेयारी हैं है। वहीं उसे लेकर शुक्रवार को एसआईटी की टीम उसके अस्पताल और घर भी लेकर गई थी। अस्पताल में उसने किस कम्प्यूटर से रिकॉर्ड व बिल मॉडीफाई कराए थे, उसे क्रास चेक करना था। वहीं पत्नी जसमीत के बयानों की मोखा से तस्दीक करानी के लिए घर ले गई। मोखा ने भी घर के उसी हिस्से में नकली इंजेक्शन की शीशियां तोड़ना बताया, जहां जसमीत ने बताया था। अब टीम इंजेक्शन की मात्रा और किसे कितना और कब-कब इंजेक्शन लगाए गए। इसका पूरा विवरण एसआईटी जुटाएगी।

जालम सिंह पटेल ने मोखा की संपत्ति की जांच करने की मांग की।
जालम सिंह पटेल ने मोखा की संपत्ति की जांच करने की मांग की।

ईओडब्ल्यू से मोखा की संपत्ति की जांच कराने की मांग

गोटेगांव से बीजेपी विधायक जालम सिंह पटेल ने एक बार फिर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में बड़ा अारोप लगाया है। विधायक पटेल के मुताबिक सिटी अस्पताल के डायरेक्टर सरबजीत मोखा ने आयुष्मान भारत योजना सहित सीचीएचएस, अन्य स्टेट व सेंट्रल की स्वास्थ्य व हेल्थ बीमा का बेजा फायदा उठाया है। उसने बीमारी को बढ़ा-चढ़ाकर अधिक बिल दर्शा कर कमाई की है। रेलवे एकाउंटेंट पिता के बेटे मोखा ने 1990 से प्रॉपर्टी व बिल्डिंग के क्षेत्र में कदम रखा था। 1992 में भी वह जेल में गया था। इसके बाद उसकी संपत्ति 29 सालों में बेहिसाब बढ़ी। विधायक ने EOW को पत्र लिखकर मोखा की बेहिसाब संपत्ति की जांच करने की मांग उठाई है।

बैंक मैनेजर, बोला उसकी मां को भी लगे हैं नकली इंजेक्शन

सिवनी में बैंक मैनेजर जबलपुर निवासी विनोद जगवानी भी ओमती थाने पहुंचे। बताया कि उनकी मां 13 अप्रैल को भर्ती थी। 30 तक भर्ती रहीं। पांच इंजेक्शन रेमडेसिविर के लगाए गए। बावजूद वह ठीक नहीं हुईं। वहां से डिस्चार्ज कराकर दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से दो दिन पहले वह ठीक हुई और डिस्चार्ज कराकर घर ले गया हूं। उसने इलाज से संबंधी सारे दस्तावेज भी एसआईटी के सामने पेश किए। एसआईटी ने जांच में उसके दस्तावेज और शिकायत को भी सलंग्न करने की बात कही है।

खबरें और भी हैं...