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MP में छठवीं बार प्राण वायु लेकर आई ऑक्सीजन एक्स.:प्रदेश को 4 टैंकरों में 47 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन मिला, बोकोरा के प्लांट से मिल रही है मदद

जबलपुरएक महीने पहले
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ऑक्सीजन एक्सप्रेस प्राणवायु लेकर जबलपुर पहुंची। - Dainik Bhaskar
ऑक्सीजन एक्सप्रेस प्राणवायु लेकर जबलपुर पहुंची।

कोरोना के मरीजों के लिए प्राणवायु लेकर जबलपुर में गुरुवार को छठवीं ऑक्सीजन एक्सप्रेस पहुंची। एक टैंकर में लगभग 11.84 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन लेकर पहुंची। मध्यप्रदेश के लिए कुल चार टैंकर में 47 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन लेकर बोकारो से ये ट्रेन रवाना हुई थी।

पश्चिम मध्य रेल के सीपीआरओ राहुल जयपुरियार के मुताबिक बोकारो से बुधवार की शाम 7 बजे एमपी के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस रवाना हुई थीं। इसमें चार टैंकर में 47 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन लोड था। ऑक्सीजन एक्सप्रेस गुरुवार को एमपी की सीमा में पहुंची।

इसमें एक टैंकर मेडिकल ऑक्सीजन भेड़ाघाट (जबलपुर), एक टैंकर मकरोनिया (सागर) और दो टैंकर मेडिकल ऑक्सीजन मंडीदीप (भोपाल) में अनलोड किए गए। कम से कम समय में ज्यादा लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए संबंधित रेल मार्ग में ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है। एमपी के लिए रेलवे अभी तक छह ऑक्सीजन एक्सप्रेस संचालित कर चुका है।

अब तक एमपी के लिए 250 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई हुई
रेलवे ने अब तक एमपी के लिए 250 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई की है। एमपी के लिए छठवीं ऑक्सीजन एक्सप्रेस को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) से भरे 4 टैंकरों के साथ रो-रो (RO-RO) सेवा पांच मई को शाम सात बजे बोकारो से रवाना हुई। ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने बोकारो से मण्डीदीप (भोपाल) तक के लिए कुल दूरी 1327 किमी तय किया। इसमें मकरोनिया (सागर) तक 1100 किलोमीटर और भेड़ाघाट (जबलपुर) तक 1016 किलोमीटर की दूरी शामिल है।
ऑक्सीजन एक्सप्रेस के संचालन में खतरा अधिक

  • ऑक्सीजन एक्सप्रेस की अबाध और तेज आवाजाही के लिए उसे ग्रीन कॉरिडोर मुहैया कराया गया था।
  • ऑक्सीजन एक्सप्रेस सभी सुरक्षा मापदंडों को ध्यान में रखते हुए रूट मैपिंग की गई थी।
  • लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के ओवर डायमेंशन कंसाइनमेंट (ODC) होने के कारण इस कंटेनर के क्रायोजेनिक लोड़ होने की वजह से रेलवे द्वारा इसकी गति और त्वरण (एक्सेलेरेशन) का विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • अन्य रेलवे जोनों के साथ इसके सुगम संचालन में बेहतर तालमेल किया गया था। जिससे चालक दल को बदलने और फ्यूल भरने में कम से कम समय लगे।
  • ऑक्सीजन एक्सप्रेस में क्रायोजेनिक टैंकर को लेकर चलने वाली रेलगाड़ियों की अधिक या कम रफ्तार, इन्हें उतारने के लिए उपयुक्त रैम्प आदि की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है।
  • ऑक्सीजन एक्सप्रेस बोकारो से कोटशीला, झारसुगुड़ा, बिलासपुर, न्यू कटनी से जबलपुर और सागर होते हुए भोपाल पहुंची।

पांच बार पहले आ चुकी है ऑक्सीजन एक्सप्रेस

  • 28 अप्रैल को 6 टैंकरों में 64 मीट्रिक टन ऑक्सीजन लेकर पहुंची थी।
  • 30 अप्रैल को दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस 4 टैंकरों में 48 मीट्रिक टन ऑक्सीजन लेकर आई थी।
  • 1 मई को तीसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस बोकारो से 2 टैंकरों में 22 मीट्रिक टन ऑक्सीजन लेकर आई थी।
  • 3 मई को चौथी ऑक्सीजन एक्सप्रेस बोकारो 4 टैंकरों में 46 मीट्रिक टन ऑक्सीजन लेकर आई थी।
  • 5 मई को पांचवी ऑक्सीजन एक्सप्रेस बोकारो से 02 टैंकरों में 23 मीट्रिक टन ऑक्सीजन लेकर आई थी।