मुंबइया जॉब छोड़ शुरू किया स्टार्ट अप, बनाया ब्रांड:पिता करते थे जैविक खेती; बेटे ने उपज की पैकेजिंग कर प्रॉडक्ट बनाया, आज 17 जिलों में सप्लाई

जबलपुर9 महीने पहले

खेती-किसानी को लेकर अलग राय रखने वाली नई पीढ़ी के युवाओं के लिए जबलपुर का युवक का स्टार्टअप बड़ा संदेश है। पिता जैविक खेती करते हैं। उन्होंने 17 जिलों में 250 किसानों का एक संगठन बना रखा है। अभी तक उनके जैविक उत्पाद औने-पौने कीमत पर बिक रहे थे। सिविल इंजीनियरिंग बेटे ने मुंबई में अच्छे जॉब ऑफर को ठुकरा कर पिता के कारोबार को आगे बढ़ाने के बारे में सोचा। उसने पिता और उनके सहयोगी किसानों के जैविक उत्पाद को प्रोसेसिंग कर खुद पैकेजिंग कर मार्केट में उतारने का स्टार्टअप शुरू किया। युवा कैसे खेती-किसानी को व्यवसाय में तब्दील कर सकते हैं। भास्कर खेती-किसानी सीरीज-29 में आइए जानते हैं एक्सपर्ट शुभम पटेल (सिविल इंजीनियरिंग स्टूडेंट) से

मसाले और स्टीविया पाउडर बना रहे

अगद्यति ब्रांड नाम से रजिस्ट्रेशन कराकर स्टीविया पाउडर, मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर तैयार करके बेचते हैं। स्टीविया शक्कर से 20 गुना अधिक मीठा होता है। ये डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। इसके साथ ही जेल प्रशासन के साथ विंध्या वैली नाम से मसालों का अनुबंध किया है। ऑनलाइन पोर्टल पर भी मसालों को उपलब्ध करा रहे हैं। जल्द ही प्रदेश के हर जिले में एक स्टॉकिस्ट तैयार हो जाएगा।

17 जिलों के 250 किसानों का खरीद रहे उपज

प्रगतिशील किसान पिता अम्बिका पटेल ने 17 जिलों में 250 किसानों का एक समूह तैयार किया है। ये सभी किसान आपस में जुड़े हैं। औषधि सहित मसालों की जैविक खेती करते हैं। जैविक उत्पाद का सही कीमत नहीं मिल रही थि। उनकी समस्या को देखते हुए आइडिया आया कि खुद की प्रोसेसिंग और पैकजिंग कर जैविक ब्रांड बाजार में उतारा जाए। जवाहर लाल नेहरू कृषि विवि के जवाहर राबी के साकार योजना से प्रशिक्षण लिया। तीन लाख का सहयोग मिला। इससे मार्केटिंग को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

50 लाख की मशीनरी लगाई, अब खुद का तैयार कर रहे उत्पाद।
50 लाख की मशीनरी लगाई, अब खुद का तैयार कर रहे उत्पाद।

50 लाख की मशीनरी लगानी पड़ी

जैविक उत्पादों को प्रोसेस करके उसे तैयार करने के लिए 50 लाख की मशीनरी लगानी पड़ी। इसमें मसाले पीसने से लेकर पैकिंग मशीन शामिल है। 200 ग्राम से लेकर आधा किलो व एक किलो की पैकेट तैयार किया है। ग्रेडिंग मशीन से मसालों की सफाई होती है। पल्वरवाइजर से हार्ड मटेरियल जैसे हल्दी, आंवला, हर्रे आदि की पिसाई करते हैं। ये ऑटोमेटिक है। वहीं, एक मशीन हल्के मसाले जैसे मिर्च, धनिया, स्टीविया के पत्तों की पिसाई कर पाउडर तैयार के लिए लगाया है। फाइनल ग्रेडिंग मशीन पाउडर पिसने के बाद उसे रिफाइन करने के लिए लगाया है। इसके बाद मसालों को पैकिंग मशीन से अलग-अलग वजन में पैक करते हैं।

स्टीविया पाउडर से लेकर मसाले के तैयार कर रहे जैविक उत्पाद।
स्टीविया पाउडर से लेकर मसाले के तैयार कर रहे जैविक उत्पाद।

स्टीविया को कर रहे प्रमोट

देश में 18 करोड़ के लगभग डायबिटीज पेशेंट हैं। ऐसे सभी लोग स्टीविया का प्रयोग करें तो कभी कोई परेशानी नहीं होगी। एक किलो स्टीविया 20 किलो शक्कर के बराबर काम करती है। डायबिटीज पेशेंट आराम से इसकी चाय या अन्य मीठे का प्रयोग करते हैं। आधा किलो का पैकेट 250 से 300 रुपए में उपलब्ध करा रहे हैं। जैविक प्रोडक्ट का बड़ा फायदा ये है कि इसका फायदा हमारे साथ जुड़े 250 किसान परिवारों को भी मिल रहा है। उनको फसल की अच्छी कीमत मिल रही है। हम आयुर्वेदिक, मेडिसिनल और हर्बल उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

भास्कर खेती-किसानी एक्सपर्ट सीरीज में अगली स्टोरी होगी गुलाब की खेती कर कैसे किसान कम जमीन में भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। आपका कोई सवाल हो तो इस नंबर 9406575355 वॉट्सऐप पर मैसेज करें।

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