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सख्ती:बिजली बिलों को लेकर सख्ती, छोटे व्यापारियों से वसूली को लेकर निर्देशों का पालन नहीं

जबलपुरएक महीने पहले
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पहले कोरोना के चलते व्यापार-कारोबार ठप रहे, जिससे बिगड़ी आर्थिक स्थिति से अभी ठीक ढँग से उभर भी नहीं पाए थे कि अब बिजली कंपनी ने जबरन बिल वसूली का अभियान छेड़ दिया है। ऐसे में बिल जमा नहीं करने पर विद्युत कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जबकि शासन द्वारा लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं कि बिजली बिलों को लेकर सख्ती न बरती जाए, खासकर विद्युत कनेक्शन काटने की कार्रवाई न की जाए, मगर देखने में आ रहा है कि इन निर्देशों का बिजली कंपनी के अधिकारियों पर कोई असर नहीं दिख रहा है। व्यापारियों के साथ बिजली बिलों को लेकर बरती जा रही सख्ती से आक्रोश पनप रहा है।

छोटे व्यापारियों को राहत नहीं| छोटे और मध्यम व्यापारियों में इस बात को लेकर भी आक्रोश व्याप्त है कि चाहे शासन हो या फिर बिजली कंपनी दोनों ओर से बड़े व्यापारियों और औद्योगिक संस्थानों को फिक्स चार्ज में 6 माह की छूट प्रदान की गई है, मगर छोटे या मध्यम व्यापारियों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा रही है।

लॉकडाउन के दौरान व्यापार-कारोबार पूरी तरह बंद होने से सभी की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। ऐसी स्थिति में अब किसी तरह से व्यापार चालू करने की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं, मगर बिजली कंपनी की बिलों को लेकर सख्ती कम नहीं हो रही है।

लॉकडाउन के दौरान भी भेजा गया अनाप-शनाप बिल

व्यापारियों का कहना है कि बिलों को लेकर व्यापारियों की एक नहीं सुनी जा रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि लॉकडाउन के दौरान जब दुकानें व व्यापार पूरी तरह से बंद थे, तब भी अनाप-शनाप बिल दिए गए, जिन्हें सुधरवाने अनेक चक्कर अधिकारियों के लगाए गए। उस वक्त भी व्यापारियों ने माँग रखी कि जब दुकानें बंद हैं तो इतने अधिक बिल कैसे आ गए, मगर अधिकारियों ने एक नहीं सुनी और मिनिमम चार्ज जमा कराने की बात कहकर बिल की राशि का पार्ट पेमेंट लिया गया। इतना ही नहीं कुछ व्यापारियों के बिल तो आज तक नहीं सुधरे हैं और वे सभी व्यापारी चक्कर लगा रहे हैं।
^जिस दौरान दुकानें बंद थीं उस वक्त मिनिमम चार्ज ही लिया गया और अब मीटरों में जो रीडिंग है उसका बिल लिया जा रहा है।
-आईके त्रिपाठी, एसई

45 दिन की खपत की रीडिंग, बढ़े स्लेब से उपभोक्ताओं को करना पड़ रहा भुगतान

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकांश क्षेत्रों में निर्धारित तिथि पर बिजली की रीडिंग न होने से उपभोक्ताओं को बढ़े स्लेब पर भुगतान करना पड़ रहा है। निर्धारित समय पर रीडिंग नहीं होने से उपभोक्ताओं को 40 से 45 दिनों की खपत का बिल दिया जा रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस मामले में जब उपभोक्ता कंपनी के सेंट्रल कॉल सेंटर में शिकायत कर रहा है तो उनकी शिकायत तक दर्ज नहीं की जा रही है। बिजली कंपनी की इस अव्यवस्था के चलते उपभोक्ताओं में आक्रोश व्याप्त है।

गौरतलब है कि बिजली उपभोक्ताओं को निर्धारित तिथि में मीटर रीडिंग न करने कोई आधिकारिक सूचना तक नहीं दी गई है। जब अचानक बढ़ी राशि का बिल उपभोक्ताओं के पास पहुँच रहा है तो उपभोक्ता सुधरवाने अधिकारियों के पास जा रहे हैं तब पता चलता है कि डेढ़ माह की रीडिंग उपभोक्ताओं की दी जा रही है। समय पर रीडिंग न हाेने का एक कारण यह बताया जा रहा है कि एक किलोवाॅट तक के बिजली उपभोक्ताओं की पिछली बकाया राशि की वसूली स्थगित करने के कारण ही मीटर रीडिंग निर्धारित समय पर नहीं हो पा रही है।

कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली पर आक्रोश

उपभोक्ताओं में इस बात को लेकर ज्यादा आक्रोश व्याप्त है कि एक तो डेढ़ माह का बिल दिया जा रहा है, इतना ही नहीं जमा करने की अंतिम तिथि के दो से तीन दिन पहले ही बिल दिया जा रहा है। इस बढ़ी हुई खपत की सेंट्रल कॉल सेंटर में शिकायत करने पर सुनवाई हाेना तो दूर शिकायत तक दर्ज नहीं की जा रही है। ऐसे में अब उपभोक्ता अपनी शिकायत कहाँ दर्ज कराएँ।

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