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MP: मां-बेटी समेत 3 के जिंदा जलने की आंखों देखी:गार्ड ने कहा- बेटी को कलेजे से लगाकर मां पुकारती रही- कोई तो बचा लो... दोनों नहीं बचीं; हथौड़े से गेट तोड़ा तब बच्ची की नानी को बचा सके

जबलपुर4 महीने पहले
सुरक्षा गार्ड राहुल विश्वकर्मा ने हादसे के बारे में रोंगटे खड़े करने वाली बातें बताई।
  • भोपाल की रहने वाली थी मां-बेटी, दोनों भाई के यहां जबलपुर गई हुई थीं

जबलपुर में आग में तीन जिंदगियां खत्म हो गईं। इनमें सात साल की बच्ची भी थी, जो अपनी मां के सीने से चिपकी थी। एक बुजुर्ग महिला को बचा लिया गया। उन्हें बचाने वाले गार्ड राहुल विश्वकर्मा ने आंखों-देखी बयां की है। उन्होंने बताया कि लोगों को बचाने के लिए वह दौड़कर घर गया और हथौड़ा मारकर दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। तीन बार हथौड़ा मारने पर दरवाजा टूटा। बुजुर्ग महिला की जान बचा ली, लेकिन उनकी भोपाल निवासी बेटी, पोती और बहु को नहीं बचा सका।

ITI माढ़ोताल निवासी सुरक्षा गार्ड राहुल विश्वकर्मा (28) वो पहले व्यक्ति हैं, जिसने हादसे के बाद चीख रहे पश्चिम मध्य रेलवे के प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर आदित्य सोनी को देख मोहल्ले वालों को मदद के लिए बुलाया था। खुद ने आग की लपटों के बीच से 70 साल की अरुणबाला सोनी को निकालने में मदद की। दैनिक भास्कर से राहुल ने इस हादसे के बारे में जैसा बताया-

गोराबाजार पिंक सिटी के गेट नंबर 3 से 4 की सुरक्षा करनी होती है। रातभर कई बार राउंड लेता हूं। रेलवे में प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर आदित्य सोनी के घर से तीसरे मकान में रहने वाले COD कर्मी पीयूष दुबे रात करीब डेढ़ बजे के आए थे। उनकी सास निजी अस्पताल में भर्ती हैं। वह पत्नी मोनिका दुबे को घर छोड़ने दोस्तों के साथ आए थे। पत्नी को छोड़ने के बाद पीयूष दोस्तों के साथ लौट गए।

रात सवा दो बजे बालकनी में खड़े होकर मदद के लिए चीख रहे आदित्य सोनी पर नजर पड़ी। रूआसा होते हुए बोले कि भाई मेरी मां (अरुणबाला सोनी) नीचे फंसी हैं, उन्हें बचा लो। राहुल ने बताया कि मैं BIS की ट्रेनिंग ले चुका हूं और इस तरह के हालत से निपटना वहां बताया गया था। उनके कहे अनुसार गेट कूदकर अंदर पहुंचा। दरवाजे पर तीन-चार लात मारी, लेकिन वह नहीं खुला। फिर बाहर निकल आया। खिड़की से आग की लपटें निकलने लगीं। अंदर बेडरूम में फंसी अरुणबाला सोनी चीख रही थीं।

मैंने आसपास के लोगों को बुलाया। दो बार घर में घुसने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया। मोनिका दुबे मैडम ने तब तक अस्पताल को निकले अपने पति पीयूष दुबे को वापस बुला लिया। सभी सामने निर्माणाधीन मकान के लेबर से बोलकर पानी की पाइप लगाकर कमरे में लगी आग बुझाने का प्रयास करने लगे। दो बार के प्रयास से भी दरवाजा नहीं टूटा। तीसरी बार दौड़ कर मोनिका मैडम के घर से हथौड़ा लाया। जाली वाले दरवाजे सहित अंदर के दरवाजे को तोड़ा। बगल में रहने वाली फूललता मजूमदार ने कंबल गीला करके दिया। उसे ओढ़कर पीयूष दुबे और उनके दो दोस्त अंदर पहुंचे और अरुणबाला सोनी को निकाला।

शुक्रवार 6 अगस्त को हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद पुलिस।
शुक्रवार 6 अगस्त को हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद पुलिस।

चीख के साथ ‘कोई तो बचा लो' शब्द थे आखिरी
इस सब में 15 मिनट निकल गए थे। तभी पहली मंजिल पर सीढ़ी से लगी गैलरी में फंसी आदित्य सोनी की बहन रितु सोनी की दर्दभरी चीख कानों में पड़ी। उनके आखिरी लफ्ज ‘कोई तो बचा लो” के बाद खामोशी सी छा गई। अंदर इतना धुआं था कि दम घुट रहा था। आग की लपटों के चलते मदद को नहीं पहुंच पाए। तब तक सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की गाड़ी आई। उसकी सीढ़ी से बालकनी में फंसे आदित्य सोनी नीचे उतरे।

नेहा सोनी (32), परी (7) व रितु सोनी (37)।
नेहा सोनी (32), परी (7) व रितु सोनी (37)।

आग की लपटों में झुलस चुकी थी परिवार की खुशियां
आग बुझी तो बालकनी की गैलरी में बने पूजास्थल के पास मासूम परी उर्फ धनविस्टा और उसे आखिरी दम तक बचाने की कोशिश में सीने से चिपकाए मां रितु (37) की लाश पड़ी थी। बाथरूम में आदित्य सोनी की पत्नी नेहा सोनी (32) मृत हालत में पड़ी थी। उनके हाथ व शरीर पर हल्के फफोले पड़े थे। उनकी मौत घर में फैले धुएं से दम घुटने से हुई होगी।

घर की ये हो गई है हालत।
घर की ये हो गई है हालत।

तीन महीने से पिंक सिटी में गार्ड की ड्यूटी कर रहा राहुल
राहुल ने बताया, गोराबाजार पिंक सिटी में तीन महीने पहले ही गार्ड के रूप में तैनात हुआ हूं। 12वीं के बाद पढ़ाई छूट गई थी। पिता का निधन हो चुका है। परिवार में मां, बड़े भाई, भाभी और एक भतीजी है। दिन में पुलिस में भर्ती की तैयारी करता हूं। रात में गार्ड की नौकरी।

नरसिंहपुर करेली के रहने वाले हैं आदित्य सोनी
रेलवे में प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर आदित्य सोनी दो बहनों के इकलौते भाई हैं। बड़ी बहन रितु की शादी भोपाल में लालघाटी एयरपोर्ट रोड निवासी पत्रकार रत्नेश सराफ से हुई है। परी उर्फ धनविस्टा सोनी (7) उनकी इकलौती बेटी थी। 10 दिन पहले ही मां-बेटी जबलपुर आए थे। दरअसल, रितु की मां अरुणबाला सोनी कैंसर पीड़ित हैं और अकसर बीमार रहती हैं। आदित्य की एक बहन वर्षा आस्ट्रेलिया में है। आदित्य का पैतृक गांव करेला नरसिंहपुर है। तीन साल पहले ही वह पिंक सिटी में घर बनाकर शिफ्ट हुए थे।

उनकी शादी बैतूल की रहने वाली नेहा सोनी से 12 साल पहले हुई थी, लेकिन खुद की औलाद नहीं थी। शहर में उनके फूफा सुरेश कुमार जयप्रकाश नगर में रहते हैं। आदित्य ने सबसे पहले उन्हें हादसे की सूचना दी। मेडिकल के मरचुरी में सुरेश ही बेटों के साथ पीएम कराने पहुंचे थे। भतीजी व नातिन के साथ बहू का शव देख उनका गला भर आया।

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