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निजी अस्पताल की मनमानी:जबलपुर में 47 हजार रुपए बकाया होने पर शव को बना लिया था बंधक, कलेक्टर के निर्देश पर 10 हजार लेकर शव सौंपा

जबलपुरएक महीने पहले
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प्रशासन की दखल देने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 37 हजार का बिल माफ किया। 10 हजार पड़ोसी आरक्षक के देने पर शव सौंपा। - Dainik Bhaskar
प्रशासन की दखल देने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 37 हजार का बिल माफ किया। 10 हजार पड़ोसी आरक्षक के देने पर शव सौंपा।

शहर में फिर एक निजी अस्पताल संचालक की संवेदनहीनता सामने आई। एक गरीब परिवार के व्यक्ति की मौत के बाद अस्पताल ने शव काे बंधक बना लिया। पीड़ित परिवार से 47 हजार रुपए का बिल जमा करने का दबाव बना रहे थे। जबकि परिवार की आर्थिक स्थित ऐसी नहीं थी कि वे इतने पैसों का इंतजाम कर पाए। पीड़ित परिवार ने केयर बाय कलेक्टर के सोशल नंबर 75879 70500 पर अपनी पीड़ा बयां किया। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर 10 हजार रुपए जमा कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

शहर के धनी की कुटिया न्यू रामनगर आधारताल निवासी 50 वर्षीय महिला दुर्गेश चौहान को सांस लेने में परेशानी थी। परिजनों ने उसे राइट टाउन स्टेडियम स्थित महाकौशल अस्पताल में 11 दिसंबर को भर्ती कराया था। मरीज की मंगलवार को मौत हो गई थी। मरीज के इलाज का 47 हजार रुपए बकाया था। अस्पताल प्रबंधन ने पैसे जमा कराने को बोला तो पीड़ित परिवार ने हाथ खड़े कर दिए। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से मना कर दिया।

परिवार में दो बेटियों के अलावा कोई नहीं

दुर्गेश चौहान के पति का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में दो बेटियों के अलावा कोई नहीं है। रिश्तेदारों ने भी मदद करने से हाथ खड़े कर दिए। मां की मौत से दोनों बेटियां पहले ही परेशान थी। जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो बेटियों ने केयर बाय कलेक्टर के सोशल नंबर 75879 70500 पर अपनी परेशानी लिखते हुए मदद मांगी। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने तत्काल निजी अस्पतालों पर निगरानी रखने नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए डॉ. विभोर हजारी को इस प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए।

37 हजार रुपए का बिल माफ, पड़ोसी आरक्षक ने 10 हजार रुपए जमा किए

डॉ. विभोर हजारी और डॉ. प्रियंक दुबे तत्काल महाकौशल अस्पताल पहुंचे। अस्पताल प्रबंधक से बात की और बकाया बिल की राशि माफ करने की समझाईश दी। प्रशासन के दबाव और पीड़ित परिवार के हालात को देखते हुए आखिरकार अस्पताल प्रबंधन ने बकाया 47 हजार रुपए में 37 हजार रुपए का बिल माफ कर दिया। शेष दस हजार रुपए भी पीड़ित परिवार जमा करने की हालात में नहीं था। ऐसे में पड़ोसी आरक्षक मोहम्मद खान आगे आए और 10 हजार रुपए अपने पास से अस्पताल में जमा कराई। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि वह सिर्फ दवा और जांच का बिल मांग रहे थे। शव बंधक नहीं बनाया था।

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