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  • The first corona patient of the state is in Jabalpur, the least sampling in metros is also here, the test is two and a half times in Gwalior, 8 times in Bhopal and seven times in Indore.

कोरोना संक्रमण / प्रदेश का पहला कोरोना मरीज जबलपुर में, महानगरों में सबसे कम सैम्पलिंग भी यहीं, ग्वालियर में टेस्ट ढाई गुना, भोपाल में 8 गुना तो इंदौर में सात गुना

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  • जबलपुर: जिले में सैम्पलिंग की रफ्तार सबसे कम, रुचि नहीं दिखा रहे जिम्मेदार

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:04 AM IST

जबलपुर. 20 मार्च की शाम जब प्रदेश के पहले चार कोरोना संक्रमित जबलपुर में मिले थे उस समय सभी का पूरा ध्यान यहीं था। आईसीएमआर की वायरोलॉजी लैब होने के कारण टेस्टिंग भी पहले यहीं शुरू हुई, लेकिन बाद में जाँच के मामले में यह शहर पिछड़ता गया। दूसरे महानगरों या पड़ोसी राज्य के नागपुर से तुलना की जाए तो जबलपुर जाँच में काफी पीछे है। इसका कारण समझ से परे है, आईसीएमआर के साथ ही मेडिकल काॅलेज में लैब शुरू की गई, जिला अस्पताल में भी ट्रूनाॅट मशीन आई, लेकिन इनकी क्षमता के अनुरूप टेस्टिंग नहीं हो पा रही है। अनलॉक शुरू होने के बाद जिस तरह लोग कोरोना संक्रमण को भूले हैं वह उस बुद्धिजीवी वर्ग को परेशान कर रहा है जो यह जानते हैं कि वायरस समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि लापरवाही बरत कर हम ही उसके पास जा रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा सैम्पलिंग होने की स्थिति में या तो समय रहते मरीज चिन्हित होंगे या रिपोर्ट निगेटिव आएगी दोनों ही मामलों में शहर के लिए यह बेहतर ही होगा। प्रदेश के दूसरे शहरों के साथ ही नागपुर में निजी लैबों में भी कोरोना जाँच कराई जा रही है, ऐसा यहाँ भी होना चाहिए, एक बड़ा वर्ग संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए इसके लिए निर्धारित शुल्क देने का भी पक्षधर है। 

संक्रमित मरीजों का पता लगाने सिर्फ बातों में बढ़ी सैम्पलिंग, हकीकत में कुछ नहीं हो सका

20 मार्च को प्रदेश के पहले संक्रमित यहीं मिले थे, उम्मीद की जा रही थी कि तेजी से सैम्पलिंग होगी तो जल्द ही इसके संक्रमितों का पता चलेगा जिससे इसकी चेन टूटेगी। इसके बाद लॉकडाउन लगा, लेकिन सैम्पलिंग नहीं बढ़ी अलबत्ता मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा। शहर में यदि 15 मार्च से सैम्पलिंग की शुरूआत मानी जाए तो 30 अप्रैल तक प्रतिदिन औसतन 50 सैम्पल ही लिए जा रहे थे। आईसीएमआर लैब में दूसरे शहरों की जाँचों का दबाव का हवाला दिया जा रहा था, जबकि इन 45 दिनों में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 87 हो गई थी, जिसमें सराफा और हनुमानताल से संक्रमितों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया था। जब संक्रमितों की संख्या और बढ़ी तो मई महीने में सैम्पलिंग में कुछ इजाफा हुआ और यह इस महीने 150 प्रतिदिन के औसत से सैम्पल लिए गए। जिला प्रशासन दो माह पहले से ही यहाँ सैम्पलिंग बढ़ाने की बात करता रहा, लेकिन जून महीने में 166 मामले आने के बाद भी औसत सैम्पल 190 तक ही पहुँच सके।

क्षमता से कम हो रहे टेस्ट

आईसीएमआर और मेडिकल काॅलेज की वायरोलाॅजी लैब में टेस्टिंग क्षमता 500 के करीब ही मानी जा रही है। हालाँकि बीच में एक दिन मेडिकल की लैब ने अधिकतम 283 टेस्ट किए जाने का दावा किया था, लेकिन अभी वहाँ औसत तौर पर 200 सैम्पल ही जाँचे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के रीजनल डायरेक्टर डॉ. वायएस ठाकुर का कहना है कि जबलपुर संभाग में करीब 400 सैम्पल रोज आईसीएमआर लैब भेजे जा रहे हैं, इन्हें पेंडेंसी की स्थिति में मेडिकल काॅलेज भी पहुँचाया जा रहा है। विक्टोरिया अस्पताल में एक ट्रूनॉट मशीन से एक दिन में अधिकतम 30 सैम्पल जाँचे जा रहे हैं। यदि मेडिकल और विक्टोरिया की जाँच क्षमता के बराबर ही सैम्पलिंग हो तो संख्या 300 से ज्यादा हो सकती है। 

कुछ क्षेत्र अतिसंवेदनशील

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मानें तो शहर के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ सख्ती से जाँच हो तो संक्रमितों की संख्या चौंकाने वाली होगी। अनलॉक में यह विस्तार शहर के लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है, जिससे प्रभावितों की पहचान करने के लिए सिर्फ जाँच दायरा बढ़ाना ही एक मात्र रास्ता है। दूसरी ओर चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि हालात काबू में तब ही कहे जा सकते हैं जब तक ज्यादा सैम्पलिंग नहीं होती, एक जून से लॉकडाउन में ढील के बाद जिस तरह से लोगों ने कोरोना को भुलाया है वह स्थिति ठीक नहीं है। अनलॉक की शुरूआत कई बंदिशों के साथ की गई थी, लेकिन प्रशासन ने उन पर अमल कराने में ढिलाई दिखाई जिसके कारण हालात बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ विशेषज्ञ कड़ी सख्ती के पक्षधर हैं, मौसम में बदलाव से साँस संबंधी परेशानियाँ बढ़ेंगी, वहीं यदि कोरोना संक्रमण की चपेट में ऐसे लोग आते हैं तो यह जानलेवा भी हो सकता है। पी-4

ग्वालियर में जाँच ज्यादा, मरीज कम
ग्वालियर यहाँ के मुकाबले छोटा शहर है, वहाँ संक्रमितों के मिलने का सिलसिला कई दिनों बाद शुरू हुआ, लेकिन प्रशासन ने सतर्कता के तौर पर वहाँ सैम्पलिंग पर फोकस किया। आज यह हालात हैं कि वहाँ हमसे कम 393 मामले हैं, जबकि करीब 29 हजार लोगों की कोरोना जाँच हो चुकी है। ग्वालियर जाँच के लिए शुरूआती दिनों में भोपाल पर निर्भर था, वहाँ के शासकीय मेडिकल काॅलेज में जाँच सुविधा शुरू होने के बाद ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कराए गए। फिलहाल वहाँ औसतन 725 सैम्पल रोज जाँच के लिए भेजे जा रहे हैं। इसके विपरीत हमारे यहाँ पॉजिटिव मामले 400 के पार हैं, लेकिन अभी तक पूल सैम्पल मिलाकर 13 हजार के करीब ही नमूने लिए जा सके हैं।

हम सैम्पलिंग बढ़ा रहे हैं, किल कोरोना अभियान में इसकी संख्या बढ़ेगी, साथ ही जिला अस्पताल और मेडिकल में अधिक क्षमता की जा रही है। 
-महेशचंद्र चौधरी, कमिश्नर  

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